ज्वालामुखी: समाजसेवी मुकेश कुमार की गिरफ्तारी को लेकर नोएडा में हाई वोल्टेज ड्रामा
समाजसेवी मुकेश कुमार और ज्वालामुखी पुलिस के बीच चला हाई-वोल्टेज घटनाक्रम इन दिनों सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है। मामले से जुड़े वीडियो और दावे-प्रतिदावे तेजी से वायरल हो रहे हैं।
जानकारी के अनुसार हाल ही में आठ स्थानीय लोगों ने ज्वालामुखी थाना में एक शिकायत पत्र सौंपकर मुकेश कुमार पर सोशल मीडिया के माध्यम से स्थानीय विधायक के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणियां करने तथा भड़काऊ बयानबाजी कर लोगों को प्रभावित करने का आरोप लगाया था। शिकायत के आधार पर पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की।
इसी सिलसिले में ज्वालामुखी पुलिस की एक टीम बीते दिनों मुकेश कुमार के अस्थायी निवास, नोएडा (दिल्ली-एनसीआर) पहुंची। इस दौरान मुकेश कुमार ने पुलिस से गिरफ्तारी संबंधी दस्तावेज एवं वारंट दिखाने की मांग की। वायरल वीडियो में वह पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए दिखाई दे रहा है। उसका दावा है कि बिना पर्याप्त दस्तावेज दिखाए उसे हिरासत में लेने का प्रयास किया गया।
मुकेश कुमार ने पूरे घटनाक्रम का वीडियो सोशल मीडिया पर साझा करते हुए आरोप लगाया है कि राजनीतिक दबाव में उसके खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। उसने कहा कि उसे मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है और उसकी गिरफ्तारी के लिए बड़ी संख्या में पुलिस कर्मियों को भेजा गया, जो अनावश्यक प्रतीत होता है। मुकेश का यह भी आरोप है कि पुलिस की मौजूदगी से उसके किराए के आवास के बाहर का माहौल किसी छावनी जैसा बन गया था।
वायरल वीडियो में देखा जा सकता है कि मुकेश अपने कमरे के भीतर से ही रिकॉर्डिंग कर रहा है, जबकि पुलिस कर्मी बाहर मौजूद हैं। इस दौरान उसने स्वयं को कमरे के अंदर रखा और पुलिस टीम से लगातार बातचीत करता रहा।
वहीं, पूरे घटनाक्रम के बाद पुलिस द्वारा संबंधित कानूनी प्रक्रिया के तहत वारंट/नोटिस जारी किए जाने की भी जानकारी सामने आई है। हालांकि मुकेश कुमार ने सोशल मीडिया पर जारी अपने बयानों में इन दस्तावेजों की वैधता पर भी सवाल उठाए हैं।
फिलहाल मामले को लेकर सोशल मीडिया पर बहस तेज है। एक पक्ष मुकेश कुमार के समर्थन में खड़ा दिखाई दे रहा है, जबकि दूसरा पक्ष पुलिस कार्रवाई को कानून के तहत उठाया गया कदम बता रहा है। मामले की वास्तविक स्थिति और आरोपों की सत्यता जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो पाएगी।
हालांकि ज्वालामुखी पुलिस कहना है कि उक्त व्यक्ति के खिलाफ चले हुए केस की समाप्ति तक साफ तौर पर मना किया गया था कि वो सोशल मीडिया पर किसी भी तरह की आपत्तिजनक टिप्पणी न करे लेकिन यह हिदायत न मानी इसके तहत कार्यवाई अमल में लायी गयी है ।
इस सन्दर्भ में मुकेश का कहना है कि मेरे ऊपर एफआईआर दर्ज होने के बाद 26 मई को पुलिस द्वारा मुझे नोटिस जारी किया गया था और थाने में हाजिर होने को कहा था इसके तहत मैं इस मामले को लेकर 30 मई को थाना में हाजिर हुआ था। उन्होंने आरोप लगाया पुलिस राजनीतिक दबाव में यह कार्य कर रही है।
