त्रि-आयामी चिकित्सा से मस्क्युलर डिस्ट्रॉफी के रोगियों को राहत प्रदान कर रहा सोलन स्थित मानव - मंदिर
हिमाचल प्रदेश के सोलन जिला के कोठों गांव में स्थित मानव-मंदिर मस्क्युलर डिस्ट्रॉफी जैसे रोग से पीडि़त व्यक्तियों के लिए आशा की एक किरण बनकर उभरा है। मस्क्युलर डिस्ट्रॉफी एक ऐसा रोग है जिसमें शरीर की मांसपेशियां धीरे-धीरे कमज़ोर होती जाती हैं। इस बीमारी से पीडि़त व्यक्ति चलने-फिरने में असमर्थ हो जाता है और वह अपने प्रतिदिन के कार्यों के लिए पूर्ण रूप से अन्य पर आश्रित हो जाता है। यह एक तंत्रिकापेशीय अनुवांशिक विकार(न्यूरोमस्क्युलर जेनेटिक डिस्ऑर्डर) है। प्राप्त आंकड़ों के अनुसार भारत में प्रतिवर्ष लगभग 4000 बच्चों का जन्म मस्क्युलर डिस्ट्रॉफी जैसे रोग के साथ होता है। यह रोग युवावस्था में भी हो सकता है। अभी तक इस रोग का कोई उपचार ज्ञात नहीं है। ऐसे गंभीर रोग से पीडि़त व्यक्तियों के लिए सोलन जिला के कोठों गांव में स्थापित मानव-मंदिर द्वारा उपचार एवं फिजियोथेरेपी के साथ-साथ हाईड्रोथेरेपी की सुलभ सेवाएं प्रदान की जा रही है। मानव-मंदिर में इस बीमारी से पीडि़त रोगियों के लिए फिजियोथेरेपी की बेहतर सेवाएं उपलब्ध है। केंद्र में आधुनिक उपकरणों के साथ रोगियों की शारीरिक एवं मानसिक स्थिति को सुधारने की दिशा में कार्य किया जा रहा है। मानव-मंदिर पुनर्वास केन्द्र मस्क्युलर डिस्ट्रॉफी के लिए एशिया का सबसे बड़ा संस्थान है। यहां इस रोग से पीडि़त व्यक्तियों का भौतिक चिकित्सा एवं योग के माध्यम से उपचार किया जाता है। मानव-मंदिर इस सोच के साथ कार्य कर रहा है कि पीडि़त व्यक्तियों को राहत एवं पुनर्वास प्रदान करके ही उन्हें बेहतर जीवन प्रदान किया जा सकता है। इस बीमारी से लड़ने के लिए रोगियों में दृढ़ इच्छा शक्ति होनी आवश्यक है। मानव-मंदिर में न केवल रोगियों की इच्छा शक्ति को मज़बूत बनाने के लिए योग एवं ध्यान का प्रयोग किया जाता है अपितु विभिन्न प्रकार की थेरेपी एवं उपचार के माध्यम से रोगियों की आंतरिक शक्ति का विकास भी किया जाता है। मस्क्युलर डिस्ट्रॉफी जैसी लाईलाज बीमारी के विषय में देश एवं प्रदेश में लोगों को जागरूक बनाने एवं उन्हें एक ही स्थान पर त्रि-आयामी चिकित्सा प्रदान करने के लिए इंडियन एसोसिएशन ऑफ मस्क्युलर डिस्ट्रॉफी (आईएएमडी) काम कर रही है। संस्था का मुख्यालय वर्ष 1992 से सोलन में कार्यरत है। संस्था नियमित रूप से इस रोग से पीडि़त व्यक्तियों को राहत एवं पुनर्वास प्रदान करने के साथ-साथ लोगों को जागरूक भी कर रही है। संस्था द्वारा स्थापित मानव-मंदिर में रोगियों की संपूर्ण देखभाल, रोग प्रबंधन, पुनर्वास, अनुसंधान एवं उपचार सुनिश्चित बनाया जा रहा है। यह देश का एकमात्र ऐसा संस्थान है जहां इस बीमारी के लिए समर्पित कार्य किया जा रहा है। आईएएमडी द्वारा वर्तमान में चंडीगढ़ तथा दिल्ली में इस रोग से पीडि़त रोगियों की फिजियोथेरेपी तथा परामर्श के लिए ‘राहत’ केन्द्र भी चलाए जा रहे हैं।
मानव-मंदिर में इस रोग पर जागरूकता शिविर आयोजित करने के साथ-साथ आवासीय फिजियोथेरेपी, उचित देखभाल प्रबंधन, व्हील चेयर स्पोर्ट, आर्थिक सहायता और परीक्षण की सुविधा दी जा रही है। यहां मरीजों को हाईड्रोथेरेपी भी प्रदान की जा रही है। हाईड्रोथेरेपी अर्थात जल द्वारा उपचार की विधा को अन्तरराष्ट्रीय स्तर पर सराहा जा रहा है।
यहां पीडि़त रोगियों के लिए माह में 3 शिविर आयोजित किए जाते हैं। वर्ष 2017 से अब तक आयोजित 100 से अधिक शिविरों में लगभग 1000 रोगियों का उपचार किया जा चुका है। आईएएमडी के कार्य को राष्ट्रीय स्तर पर सराहा गया है और संस्था को अब तक अनेक सम्मान प्राप्त हो चुके हैं। इनमें वर्ष 2004 में तत्कालीन राष्ट्रीय डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम द्वारा प्रदत्त राष्ट्रीय पुरस्कार, वर्ष 2006 में हिमोत्कर्ष पुरस्कार, वर्ष 2009 में प्रदेश के सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग द्वारा प्रदत्त राज्य पुरस्कार, वर्ष 2010 में सीएनएन आईबीएन-7 पुरस्कार, वर्ष 2011 में भाजपा महिला मोर्चा द्वारा सक्षम पुरस्कार, वर्ष 2011 में प्रतिष्ठित दिव्य हिमाचल समूह द्वारा सामाजिक कार्यों के लिए पुरस्कार, वर्ष 2014 में आर्ट ऑफ लीविंग संस्था द्वारा विशालाक्षी पुरस्कार, वर्ष 2018 में महिला आयोग पुरस्कार तथा आईसीडीएस द्वारा विश्वकर्मा पुरस्कार प्रमुख है। केंद्र रोगियों के लिए निःशुल्क एंबुलेंस सेवाएं भी उपलब्ध करवाता है। यह सेवा सोलन स्थित मुरारी मार्केट से प्रातः 10.00 बजे, पुराने उपायुक्त कार्यालय से प्रातः 10.10 बजे तथा कोटलानाला चौक से प्रातः 10.20 बजे उपलब्ध है। भगवान शिव को समर्पित एशिया के सबसे ऊंचे जटोली मंदिर के समीप स्थित मानव मंदिर उन रोगियों के चेहरे पर मुस्कान ला रहा है जो संभवतः जीवन की आस छोड़ बैठे थे।
