शिमला: बहुचर्चित संजौली मस्जिद मामले में सुनवाई आज, इस मुद्दे पर होना है फैसला, जानें
हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में बीते साल राष्ट्रीय सुर्खियां बनाने वाले संजौली मस्जिद मामले में सोमवार 9 मार्च को हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट में सुनवाई होगी। देश भर में चर्चित रहे इस मामले पर सोमवार को हिमाचल हाई कोर्ट में न्यायमूर्ति वीरेंद्र सिंह की अदालत सुनवाई करेगी। शिमला के उपनगर संजौली में अवैध रूप से मस्जिद निर्माण के इस मामले में अब मस्जिद की निचली दो मंजिलों को लेकर फैसला होना है। इससे पहले बीते साल दिसंबर महीने में उच्च न्यायालय ने मस्जिद की निचली दोनों मंजिलों को लेकर स्टेटस को यानी यथा स्थिति बनाए रखने के आदेश दिए थे।
मामला बीते साल दिसंबर महीने में हिमाचल उच्च न्यायालय पहुंचा। 3 दिसंबर 2025 को न्यायमूर्ति अजय मोहन गोयल की अदालत में मामले पर सुनवाई की। सुनवाई के दौरान जस्टिस अजय मोहन गोयल ने प्रतिवादी शिमला नगर निगम को नोटिस जारी किया और 4 हफ्ते में रिप्लाई फाइल करने के लिए कहा। इस दौरान जस्टिस गोयल ने अगले आदेशों तक मस्ज़िद के ग्राउंड फ्लोर और फर्स्ट फ्लोर के संबंध में यथास्थिति बनाए रखने के आदेश दिए। साथ ही वक़्फ़ बोर्ड को दूसरी, तीसरी और चौथी मंजिल को ध्वस्त करने के भी आदेश दिए। अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ता ने स्वयं ऊपरी तीन मंजिलें हटाने का आश्वासन दिया था जो रिकॉर्ड पर है। इस पर नगर निगम शिमला के आयुक्त ने 05 सितंबर 2024 को आदेश भी पारित किए हैं।
जस्टिस अजय मोहन गोयल की अदालत ने आदेश दिए कि याचिकाकर्ता को मौके पर मौजूद संरचना की दूसरी मंजिल से ऊपर के निर्माण को जिसमें दूसरी मंजिल भी शामिल है को ध्वस्त करना होगा। इसके अलावा अदालत ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि न्यायालय के आदेशों को ऊपरी हिस्से को हटाए जाने की कार्रवाई से बचने के लिए किसी प्रकार के औजार के रूप में इस्तेमाल न किया जाए।
साल 2024 में राजधानी शिमला के उपनगर संजौली से अवैध मस्जिद निर्माण का मामला सामने आया था। इसको लेकर स्थानीय लोगों और हिंदू संगठनों ने संजौली में जमकर विरोध किया। इसके बाद कई सालों से नगर निगम आयुक्त के पास लंबित चल रहे संजौली मस्जिद मामला सुर्ख़ियों आया। नगर निगम की अदालत ने पूरी मस्जिद को अवैध करार देते हुए गिरने के आदेश दे दिए थे। इसके बाद मामला जिला अदालत से होते हुए हिमाचल हाई कोर्ट पहुंचा है। इससे पहले जिला अदालत ने भी मामले में नगर निगम आयुक्त के आदेशों को बरकरार रखा है।
