नशा निवारण अभियान के तहत सभी को जागरूक बनाने का प्रयास
मादक द्रव्यों एवं मदिरा व्यसन के सम्बन्ध में 15 नवम्बर से 15 दिसम्बर, 2019 तक कार्यान्वित किए जा रहे अभियान के तहत प्रदेश सरकार एवं जिला प्रशासन द्वारा यह प्रयास किया जा रहा है कि समाज के सभी वर्गों को अभियान एवं नशा निवारण के सम्बन्ध में जागरूक बनाया जाए। यह जानकारी स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग द्वारा सोलन जिला के विभिन्न स्वास्थ्य खण्डों में छात्रों एवं अन्य को प्रदान की गई। कार्यक्रम के तहत बताया गया कि जागरूकता के द्वारा ही जन-जन को नशे के भयानक दुष्परिणामों एवं परिवार तथा समाज को होने वाली क्षति के बारे मे सचेत किया जा सकता है। आजकल अत्यन्त घातक नशे प्रचलन में है। यह नशे जहां व्यक्ति को शारीरिक एवं मानसिक रूप से समाप्त करते है वहीं व्यसनी व्यक्ति नशा प्राप्त करने के लिए धीरे-धीरे अपराध का सहारा लेने से भी नहीं हिचकता। इस अवसर पर विभिन्न प्रकार के नशों के विषय में विस्तार से बताया गया। स्वास्थ्य शिक्षकों ने नशे के कारण होने वाले मानसिक एवं शारीरिक रोगों की जानकारी भी दी। सभी को अवगत करवाया गया कि नशा व्यक्ति और उसके परिवार को आर्थिक बर्बादी के कगार पर पंहुचा देता है। सभी से आग्रह किया गया कि समाज के सभी वर्गों को नशे से युवा पीढ़ी का बचाने के लिए एकजुट होना होगा। युवाओं को बताया गया कि नशे द्वारा प्राप्त थोड़ी देर का मजा जीवन भर की सजा बन जाता है। इस अवसर पर वरिष्ठ नागरिकों एवं अभिभावकों तथा अध्यापकों से आग्रह किया गया कि युवाओं के व्यवहार एवं मित्रों पर ध्यान दें। विभाग द्वारा आज कुल 724 छात्रों एवं अन्य को नशाखोरी के विषय में जागरूक किया गया। स्वास्थ्य खण्ड चण्डी में 150, अर्की उपमण्डल की राजकीय प्राथमिक पाठशाला बड़ोग में 39, चिकित्सा खण्ड सायरी में 35, नालागढ़ उपमण्डल की राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला बघेरी में 200 तथा धर्मपुर खण्ड की राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला देवठी में 300 छात्रों को नशे जैसी सामाजिक बुराई को समाप्त करने के सम्बन्ध में जागरूक किया गया। इस अवसर पर सभी को नशा निवारण के लिए शपथ भी दिलाई गई। क्षेत्रीय अस्पताल सोलन के जिला कार्यक्रम अधिकारी डाॅ. अजय सिंह ने अस्पताल में कार्यरत मनोचिकित्सक डाॅ. कुशल एवं मनोवैज्ञानिक डाॅ. वैशाली शर्मा के साथ आज शिवालिक बायोमैटल लिमिटिड चम्बाघाट में बहुदेशीय चिकित्सा शिविर का आयोजन किया। इस शिविर में कम्पनी के लगभग 150 कर्मियों को नशाखोरी एवं इसके सामाजिक तथा अन्य दुष्प्रभावों की जानकारी दी गई। सभी की स्वास्थ्य जांच भी की गई। कर्मचारियोें को बताया गया कि किसी भी प्रकार का नशा हानि का स्त्रोत ही होता है। चिकित्सकों ने सभी से आग्रह किया कि वे नशे कोे न कहें और अन्य को भी इस दिशा में प्रेरित करें।
