लघु वन उपज के प्रसंस्करण पर कौशल विकास प्रशिक्षण का आयोजन
सतत आजीविका को बढ़ावा देने और किसानों की आय बढ़ाने के लिए अपने प्रयास में डॉ वाईएस परमार औदयानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, नौणी के खाद्य विज्ञान और प्रौद्योगिकीविभाग ने फल, सब्जी और लघु वन उपज के प्रसंस्करण पर चार दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया। यह प्रशिक्षण हिमाचल प्रदेश वन विभाग (वाइल्ड लाइफ डिवीजन) शिमला द्वारा स्थायी आजीविका के लिए कौशल विकास परियोजना का हिस्सा था। इस प्रशिक्षण में किसानों की आय को बढ़ाने के अलावा फसल कटाई के बाद होने वाले घाटे को कम करने के बारे में भी जानकारी दी गई। इस प्रशिक्षण में वाइल्ड लाइफ सैंक्चुअरी चूरधार के आसपास के गांवों के 25 किसानों ने भाग लिया। प्रिंसिपल इंवेस्टिगेटर-कम-ट्रेनिंग ऑर्गनाइज़र डॉ राकेश शर्मा ने बताया कि इस परियोजना के तहत चार ऑफ कैम्पस जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। इसमें जिला सोलन की माजथल सैंक्चुअरी(सेवरा चंडी) और जिला सिरमौर की चूरधार सैंक्चुअरी के आसपास के गांवों के 300 से अधिक किसानों ने भाग लिए। अगले चरण में दो ऑन कैम्पस कौशल विकास कार्यक्रम का आयोजन किया गया जिसमें 25- 25 किसानों को व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया। डॉ शर्मा ने बताया की इस परियोजना में विभाग के प्रोफेसर और हैड डॉ अंजु धीमान और वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ एनएस ठाकुर शामिल है। किसानों को जंगली अनार से अनारदाना,आंवला का मुरब्बा, कैंडी एवं पेय, अचार और चटनी, एलो वेरा उत्पात, स्क्वैश जैसी विभिन्न मूल्य वर्धित उत्पादों को बनाने पर व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया। इसके अलावा बुरान्स, जामुन, कद्दू, टमाटर, अदरक और मशरूम के उत्पाद और सौर ऊर्जा से फलों और सब्जियों को सुखाने आदि के बारे में बताया गया। प्रशिक्षण के अंतिम सत्र के दौरान विश्वविद्यालय के निदेशक अनुसंधान डॉ जेएन शर्मा मुख्य अतिथि रहे। उन्होनें इस तरह के प्रशिक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से अंत उपयोगकर्ताओं के लिए प्रौद्योगिकियों को स्थानांतरित करने के लिए वैज्ञानिकों के प्रयासों की सराहना की। डॉ शर्मा ने प्रशिक्षणार्थियों से आग्रह किया कि वह अपने छोटे-छोटे उद्यम स्थापित करने के लिए प्रशिक्षण के दौरान बताए गई जानकारी का उपयोग करे ताकि स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसर भी पैदा हो। खाद्य विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग की प्रोफेसर और हैड डॉ अंजू धीमान ने फल, सब्जी, औषधीय जड़ी-बूटियों और लघु वन उत्पाद के प्रसंस्करण और मूल्यवर्धन के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने किसानों और युवाओं से स्थायी आजीविका के लिए आगे आने और खाद्य प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धन को अपनाने का आग्रह किया।
