जंगलों की ओर रुख कर रहे लोग! जाने वजह
कोरोना वायरस को लेकर प्रदेश में लगे लॉकडाउन के चलते लोग जहां घरों में दुबके बैठे हैं, वहीं लोगों में इन दिनों खानपान को लेकर काफी बदलाव देखने को मिल रहा है। इन दिनों लोग बाजारों में मिलने वाली सब्जियों को खरीदने के बजाए जंगली सब्जियों कचनार काथी सहित जंगलों में पैदा होने वाली अन्य साग-सब्जियों को खाने में काफी दिलचस्पी दिखा रहे हैं। लोग साग-सब्जी ढूंढने के लिए सुबह-शाम जंगलों की ओर रुख कर रहे हैं। हालांकि कोरोना वायरस के दौरान लगे लॉकडाउन को लेकर ग्रामीण परिवेश में रहने वाले लोगों को बाजारों तक न पहुंच पाना इन लोगों की मजबूरी भी है जिस कारण उन्हें यह सब्जियां खानी पड़ रही है। यदि युवा वर्ग की बात करें तो जंगली सब्जियां खाना उन्हें किसी चुनौती से कम नहीं है क्योंकि युवाओं को बाजार की सब्जियों में ज्यादा दिलचस्पी रहती है। लेकिन सब्जियां संक्रमित ना हो इस वजह से सब्जियों की खरीदारी लोग कम ही कर रहे हैं। लोगों का यह भी कहना है कि बाजारों में इन दिनों सब्जियों के दाम आसमान छू रहे हैं साथ ही उन्हें कोरोना जैसी महामारी से इन सब्जियों का संक्रमित होने का डर भी सता रहा है। जिस कारण लोग इन दिनों बाजार से सब्जियां भी कम मात्रा में खरीद रहे हैं।वहीँ गांव से सटे जंगलों में लगी सब्जियों को लाकर बनाना पसंद कर रहे हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि गर्मी में होने वाली सब्जियां कचनार, काथी, शिम्बलोटू, बगनौल (एल्युवेरा) तथा रामबाण में लगने वाले गोब्बा सहित नदी नालों के किनारे लगने वाली छूछ जैसी सब्जियों का लोग आनंद भी उठा रहे हैं। जहां यह सब्जियां खाने में स्वादिष्ट भी है, वहीं कई रोगों से लडने के लिए यह सब्जियां औषधि का काम भी करती है। दाड़लाघाट निवासी शंकर दास गुप्ता व रूप राम शर्मा का कहना है कि जंगलों में लगने वाली सब्जियां कई गुणकारी है तथा कई बीमारियों का रामबाण इलाज भी है, इन्हें हर सीजन में खाना चाहिए। हालांकि इन दिनों वायरस के चलते सब्जी मंडियों में सब्जियों की कीमतों में भारी उछाल है तथा इन जंगली सब्जियों के मिलने से इन्हें राहत मिली है। स्यार निवासी सोमा कौंडल का कहना है कि वे बाजार से सब्जियां हमेशा लाकर खाते हैं लेकिन इन दिनों जंगलों में लगने वाली सब्जियों को लाया जा रहा है तथा उनके बच्चे इन सब्जियों को खा रहे हैं। वहीँ कविता, पदमा, कांता, कृतिका सपना रुक्मिणी निशा, अलका, अंजू, अनु, चम्पा, धनपतु, तृप्ता, किरण व भारती सहित अन्य महिलाओं का कहना है कि कर्फ्यू के चलते गाड़ियां नहीं चल रही है जिस कारण बाजार तक जाना मुश्किल हो रहा है, इसलिए आसपास लगी सब्जियों को खाकर ही गुजारा कर रहे हैं।
दाड़लाघाट निवासी महेश्वर शुक्ला व निशांत गुप्ता का कहना है कि उन्होंने इस तरह की सब्जियां पहले बहुत कम खाई हैं, लेकिन मंडियों से आ रहे सब्जियों का उन्हें संक्रमित होने का खतरा है इसलिए वह बाजार में मिलने वाली सब्जियों को ना खा कर इन्हीं सब्जियों को खाना पसंद कर रहे है। हालांकि उनके घरों में पहले से सब्जी बनाई जाती थी लेकिन उन्हें खाना पसंद नहीं करते थे लेकिन कोरोना वायरस के डर से वह अन्य सब्जियों से किनारा कर इन्हीं सब्जियों को खा रहे हैं।
