जान जोखिम में डालकर अपने कर्तव्य का निर्वहन कर रहे जल कर्मी
अर्की जल शक्ति मंडल के दाड़ला सब डिवीजन की अंतिम व दूरस्थ व दुरुह बैकवर्ड एरिया मांगल उठाऊ पेयजल योजना की तीनों स्टेजिज़ का अधिशाषी अभियंता कंचन शर्मा ने अपनी टीम के साथ निरीक्षण किया। कंचन शर्मा अपनी टीम के साथ लगातार 8 घंटों की पैदल चढ़ाई व उतराई पार करते हुए तृतीया व द्वितीय चरण का निरीक्षण करते हुए पहाड़ की तलहटी में स्थित योजना के प्रथम चरण पर पहुंची जहां उन्होंने स्कीम के कार्यों का निरीक्षण, अपने जलकर्मियों की कोविड के दौरान रहन सहन व जल स्रोत का निरीक्षण किया। प्रथम चरण पर पहुंचकर कंचन वहां कार्यरत अपने जल कर्मियों के लिए भावुक हो गईं।
जहां आज हम कोविड के समय में अपनी ड्यूटी पर तैनात होकर गर्वित हो रहे हैं, वहीं ये जलकर्मी ताउम्र इन कठिन परिस्थितियों में बिना कोई सम्मान की चाहना से, बिना कोई डिमांड के चुपचाप काम कर रहे हैं। हालांकि इस योजना का प्रथम चरण आटोमेटिड है पर यहां स्त्रोत के रखरखाव व सफाई के लिए पहुंचना ही पड़ता है। सैंचुरी एरिया में स्थित इस योजना में बाघ, भालू, जंगली सुअर व अन्य जंगली जानवरों से दो चार होना ये अलग बात है।1989 में कमीशनड इस स्कीम का जीर्णोद्धार करने को है जिसके लिए कंचन शर्मा ने आदेश दे दिए हैं। इसके साथ ही द्वितिय व तृतीय चरण की आटोमेशन के लिए भी एस्टिमेट बनाने के आदेश दे दिए हैं।जल्द ही इस स्कीम को पूर्ण रुप से आटोमेटिड कर दिया जाएगा।
कंचन शर्मा ने जनमानस से अनुरोध किया है कि कृपया वो जल कर्मियों का सम्मान करें। जल कर्मी बड़ी कठिन व भयानक परिस्थितियों में भी बहुत बार जान को जोखिम में डालकर अपने कर्तव्य का निर्वहन करते हैं तो केवल इसलिए कि हमें घर बैठकर पानी पीने को मिले। जहां एक बार भी पहुंचकर वापिस आना कठिन है वहां ये लोग रोज् जाते हैं।
कंचन शर्मा ने यह भी बताया कि तृतिय चरण का बिजली विभाग का ट्रांसफोर्मर बहुत पुराना हो चुका है जो बार बार खराब होकर हमारी स्कीम को बाधित करता है। इसका नवीनीकरण करवाया जाए। उन्होंने बिजली विभाग से अनुरोध किया है कि वे वहां पर इलेक्ट्रिक पोल लगवा दिए जाएं तो सर्दी व बरसात में जल कर्मियों को आने जाने की दिक्कत न हो। कंचन शर्मा के साथ कनिष्ठ अभियंता ओम प्रकाश, जितेंद्र, स्कीम पर कार्यरत जल कर्मी व कांट्रैक्टर भी थे जो वहां पहले भी कार्य कर चुके हैं।
