राजकीय अध्यापक संघ ने दी सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलने की चेतावनी
हिमाचल राजकीय अध्यापक संघ की एक आपात बैठक पिछले कल प्रदेश अध्यक्ष वीरेंद्र चौहान की अध्यक्षता में शिमला में हुई जिसमें संघ के महासचिव श्याम लाल हांडा सहित अन्य पदाधिकारियों ने भाग लिया। बैठक में संघ ने शिक्षकों के ज्वलंत मुद्दों पर चर्चा की गई। चर्चा उपरांत सरकार से मांग की गई की सरकार अपने घोषणा पत्र के अनुसार अनुबंध अध्यापकों के नियमितीकरण को 3 वर्ष के बजाए 2 वर्ष करने पर तुरंत निर्णय लें। संघ ने प्रधानाचार्य एवं मुख्य अध्यापकों सहित सभी वर्गों के शिक्षकों की पदोन्नति करने की विभाग और सरकार से मांग की है। यह पदोन्नति लंबे समय से नहीं हो पा रही है।
संघ का कहना है कि प्रधानाचार्य की पदोन्नति तो पिछले 2 वर्ष से रुकी पड़ी है जिस वजह से स्कूलों में एक ओर जहां बच्चों की पढ़ाई पर प्रभाव पड़ रहा है, वहीं दूसरी ओर बहुत से मुख्याध्यापक एवं प्रवक्ता बिना पदोन्नति ही सेवानिवृत्त हो रहे हैं जिससे शिक्षकों को भारी नुकसान झेलना पड़ रहा है। साथ ही बैठक में अनुबंध शिक्षकों को जो 6 साल बाद, 5 साल बाद या फिर 3 साल बाद नियमित हुए हैं उन्हें उनकी प्रथम नियुक्ति से वरिष्ठता एवं अन्य सभी लाभ देने की मांग की गई। संघ ने केंद्र सरकार की नई पेंशन नीति के उस प्रावधान को हिमाचल में लागू करने की भी मांग की जिसमें किसी भी कर्मचारी की अकस्मात मृत्यु या अपंगता के कारण उसे पुरानी पेंशन के सभी लाभ दिए जाते है।
संघ ने 4-9-14 टाइम स्केल को 2009 की अधिसूचना के अनुसार बहाल करने एवं ग्रेड पे में लगी 2 साल की शर्त को हटाने , 2016 से केंद्र का नया वेतनमान लागू करने व भूतपूर्व सैनिकों को वरिष्ठता लाभ न देने की भी मांग की। बैठक में केवल शिक्षकों के लिए ही स्थानान्तरण नीति बनाने पर भी आपत्ति दर्ज की गई जबकि सभी कर्मचारियों को समानता का अधिकार है।
संघ का कहना है कि पीटीए, पैरा एवं पैट शिक्षकों के नियमितीकरण को लेकर विभाग द्वारा ढुलमुल रवैया पर भी संघ ने आपत्ति जताई क्योंकि 25 जून को सरकार ने कैबिनेट के द्वारा इनके नियमितीकरण की सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय के अनुसार हरी झंडी दे दी थी। उसके बाद से आज तक इतना लंबा समय बीत जाने के उपरांत भी इनके नियमितीकरण के आदेश जारी नहीं हो पाए हैं जो की बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण हैं।
राजकीय अध्यापक संघ का कहना है कि संघ ने सरकार को एक अल्टीमेटम दिया है यदि इन शिक्षकों का नियमितीकरण नहीं किया जाता है और शिक्षकों की उपरोक्त मांगों को नहीं पूरा किया जाता है तो संघ के पास विरोध प्रदर्शन के सिवा और कोई चारा नहीं बचता है उसका उत्तरदायित्व सरकार व विभाग का होगा।
