हिमाचली बागवानों को फिर झटका, अमेरिकी सेब पर भी घटी इंपोर्ट ड्यूटी
हिमाचली बागवानों को एक बार फिर झटका लगा है। अमेरिकी सेब पर इम्पोर्ट ड्यूटी 50 प्रतिशत से घटाकर 25 प्रतिशत और न्यूनतम आयात मूल्य (MIP) 80 रुपए प्रति किलो कर दिया गया है। भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के तहत अब अमेरिकी सेब भारत में लगभग 100 रुपए प्रति किलो की दर से पहुंचेगा।
केंद्र सरकार इससे पहले भी न्यूजीलैंड और यूरोपियन यूनियन (EU) के सेब पर इम्पोर्ट ड्यूटी 50 फीसदी से क्रमश: 25 व 20 फीसदी कर चुकी है। अब अमेरिकी सेब पर इम्पोर्ट ड्यूटी कम करने से हिमाचल के सेब बागवानों की चिंताएं और बढ़ गई है। इसका सीधा असर हिमाचल के सेब उद्योग पर पड़ेगा। विदेशों से अब सस्ता सेब देश के बाजारों में आएगा। इससे हिमाचल समेत जम्मू कश्मीर और उत्तराखंड के सेब को अच्छे रेट नहीं मिल पाएंगे।
इम्पोर्ट ड्यूटी कम करने के विरोध में हिमाचल के बागवान दो सप्ताह पहले भी सचिवालय के बाहर प्रदर्शन कर चुके है। इनकी मांग सेब इम्पोर्ट पर आयात शुल्क 50 से बढ़ाकर 100 प्रतिशत करने की है। मगर केंद्र सरकार बारी बारी इसे अलग अलग देशों के लिए कम कर रही है, जबकि प्रधानमंत्री बनने से पहले नरेंद्र मोदी ने साल 2014 में सुजानपुर में रैली के दौरान हिमाचल के बागवानों को सेब पर आयात शुल्क 100 फीसदी करने का वादा किया था। इम्पोर्ट ड्यूटी बढ़ाई तो नहीं गई। मगर कम जरूर की जा रही है।
वहीं अमेरिका, न्यूजीलैंड और EU की आड़ में अब दूसरे देश भी इम्पोर्ट ड्यूटी कम करने का दबाव बनाएंगे। भारत के बाजारों में विदेशी सेब आने से देश में पैदा होने वाले सेब को उचित दाम नहीं मिल पाएंगे। हिमाचल में अभी प्रति हेक्टेयर 7 से 8 मीट्रिक टन सेब की पैदावार होती है, जबकि न्यूजीलैंड, अमेरिका व चीन इत्यादि देशों में प्रति हेक्टेयर 60 से 70 मीट्रिक टन सेब पैदा हो रहा है। इसी तरह, चीन, अमेरिका, ईरान इत्यादि देशों की भौगोलिक परिस्थितियां अनुकूल होने से वहां भी 40 से 70 मीट्रिक टन सेब प्रति हेक्टेयर पैदा हो रहा है।
हिमाचल में विपरीत भौगोलिक परिस्थितियों के कारण प्रति किलो सेब तैयार करने पर लगभग 27 रुपए की लागत आती है। इससे हिमाचल के सेब बागवानों को तभी फायदा हो पाता है, जब यहां के बागवानों का सेब कम से कम 50 से 100 रुपए प्रति किलो के हिसाब से बिके।
