श्रम कानूनों में किए गए बदलाव, मजदूर विरोधी : ओमप्रकाश शर्मा
वैश्विक महामारी कोरोना वायरस के दौरान श्रमिक संगठनों से चर्चा किए बिना श्रम कानूनों में किए गए बदलाव में आपत्ति जताते हुए अखिल भारतीय सीमेंट मज़दूर महासंघ के राष्ट्रीय उप महासचिव ओमप्रकाश शर्मा ने कहा है कि हिमाचल प्रदेश औद्योगीकरण एवम आर्थिक विकास के पक्ष में है किंतु श्रमिकों, कर्मचारियों के हितों की अनदेखी नहीं की जा सकती। जैसे कि वर्तमान में श्रम कानूनों में बदलाव हेतु संगठनों से विचार विमर्श भी करना चाहिए, किंतु श्रम कानूनो में बदलाव के संदर्भ में ऐसा नहीं किया रहा है जो पूर्णतः अनुचित एवम एक पक्षीय है। इसी संदर्भ में अम्बुजा सीमेंट कर्मचारी संघ (भारतीय मजदूर संघ) ने एक पत्रक मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर को दिया है।
इस पत्र में कहा गया है कि यदि हिमाचल में इस प्रकार का मज़दूर विरोधी श्रम कानून लागू होगा तो इससे उद्योग में अशांति का वातावरण होगा जिससे ओधोगिक शांति प्रभावित होगी क्योंकि मजबूरन श्रमिकों को आंदोलन करने के लिए विविश होना पड़ेगा तथा इसी संदर्भ में 20 मई को विरोध दिवस मनाया जाएगा। जिन जिन राज्यों में श्रम विरोधी कानून लागू किया है, भारतीय मजदूर संघ की राष्ट्रीय कार्यकारिणी ने पुरजोर विरोध किया है। 8 घण्टे से बढ़ाकर 12 घण्टे ड्यूटी करना और इसकी योजना बनाना ऐसा कभी नहीं हुआ। यहां तक कि गैर लोकतांत्रित देशों में भी ऐसा नहीं किया गया, लेकिन वर्तमान सरकार ने साबित कर दिया कि यह सरकार पूर्णतया मज़दूर विरोधी है। इसका जवाब मज़दूर चुनाव के समय अवश्य देंगे क्योंकि मज़दूर विरोधी नीति मज़दूर कभी सहन नहीं करेगा।
सीमेंट उद्योगों के लिए सरकार ने अभी तक कोई नीति नहीं बनाई है। यहां पर श्रमिक 25 सालों से कार्य कर रहें हैं लेकिन पक्के होने की नीति सरकार ने लागू नहीं की है। संगठन से वार्तालाप करके कुछ श्रमिकों को पक्का किया गया है। सरकार यह भी अनदेखी कर रही है, इसलिए सरकार इस विषय चिंतन करें अन्यथा भविष्य में केवल विरोध होगा, मज़दूर विरोधी श्रम कानून के लिए आंदोलन होगा। अन्यथा मज़दूर विरोधी श्रम क़ानून को तुरंत प्रभाव से वापस लिया जाएं।
