देहरा: अनूप सिंह जसयाल को पीएच.डी. की उपाधि, क्षेत्र में खुशी की लहर
09 जनवरी 2026 को लवली प्रोफेशनल विश्वविद्यालय, जालंधर में आयोजित दीक्षांत समारोह में गाँव नंगल, बीहन पंचायत निवासी अनूप सिंह जसयाल को पुस्तकालय विज्ञान विषय में डॉक्टर ऑफ फिलॉसफी (पीएच.डी.) की उपाधि से सम्मानित किया गया। उन्हें यह सम्मान ग्रेट ब्रिटेन की पूर्व प्रधानमंत्री मेरी एलिज़ाबेथ ट्रस द्वारा प्रदान किया गया। यह उपलब्धि हिमाचल प्रदेश सहित समस्त क्षेत्रवासियों के लिए गर्व का विषय है। डॉ. अनूप सिंह जसयाल स्वर्गीय बलवंत सिंह जसयाल एवं स्वर्गीय विमला देवी के सुपुत्र हैं। उनकी शोध-अध्ययन का विषय हिमाचल प्रदेश के सरकारी कॉलेजों के पुस्तकालयों में ऑटोमेशन एवं नेटवर्किंग की वर्तमान स्थिति रहा है। शोध में यह तथ्य सामने आया है कि प्रदेश के अधिकांश सरकारी कॉलेजों के पुस्तकालयों में न तो संसाधनों का पूर्ण ऑटोमेशन हो पाया है और न ही नेटवर्किंग की स्थिति संतोषजनक है।
शोध में यह भी उजागर हुआ है कि कई कॉलेजों के पुस्तकालयों में पुस्तकालयाध्यक्षों एवं अन्य आवश्यक स्टाफ की भी कमी है, जो शिक्षा व्यवस्था के लिए चिंताजनक विषय है। सूचना एवं प्रौद्योगिकी के वर्तमान युग में पुस्तकालयों का डिजिटल एवं वर्चुअल स्वरूप अत्यंत आवश्यक हो गया है। ई-पुस्तकालय एवं नेशनल डिजिटल लाइब्रेरी इस दिशा में महत्वपूर्ण पहल हैं। डॉ. जसयाल का शोध यह भी दर्शाता है कि पुस्तकालय समाज को जागरूक एवं सूचनायुक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। यदि प्रत्येक पंचायत स्तर पर पुस्तकालय स्थापित किए जाएँ, तो युवाओं को रचनात्मक गतिविधियों से जुड़ने का अवसर मिलेगा और नशे जैसी सामाजिक बुराइयों पर भी अंकुश लगाया जा सकता है।
डॉ. अनूप सिंह जसयाल एक भूतपूर्व सैनिक हैं और वर्तमान में केंद्रीय विद्यालय संगठन में सेवाएँ दे रहे हैं। उन्होंने सेना में रहते हुए भी अपनी शिक्षा जारी रखी और एम.ए. (अंग्रेज़ी एवं राजनीति विज्ञान), बी.एड., मास्टर इन लाइब्रेरी एंड इंफॉर्मेशन साइंस, एम.फिल., पीएच.डी. तथा यूजीसी नेट उत्तीर्ण किया है। 09 अक्टूबर 1970 को जन्मे डॉ. जसयाल सामाजिक कार्यों में भी सक्रिय हैं। वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से लंबे समय से जुड़े हुए हैं और वर्तमान में देहरा जिले में बौद्धिक शिक्षण प्रमुख का दायित्व निभा रहे हैं। इसके अतिरिक्त वे मुचकुंद महादेव ग्राम सुधार सभा नंगल एवं मुचकुंद महादेव गौशाला नंगल से भी जुड़े हैं तथा प्राकृतिक खेती एवं देशी गौवंश पालन को बढ़ावा दे रहे हैं।
