धर्मशाला : हिमाचल पर 86 हजार 589 करोड़ का कर्ज
-विधानसभा के शीतकालीन सत्र के आखिरी दिन कैग ने रखी रिपोर्ट
धर्मशाला के तपोवन में हिमाचल विधानसभा के पांच दिवसीय शीतकालीन सत्र के आखिरी दिन कैग की रिपोर्ट रखी गई। इसमें प्रदेश सरकार पर कर्ज और चुकाई जाने वाली ब्याज की राशि का ब्योरा पेश किया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक वर्तमान में हिमाचल पर 86 हजार 589 करोड़ का कर्ज है। बीते साल में सरकार ने 13 हजार 55 करोड़ रुपये कर्ज उठाया। वहीं, राजस्व घाटा 6 हजार 335 करोड़ बताया गया है, जो 2021-22 के 7 हजार 962 करोड़ से कुछ कम है। वित्तीय वर्ष 2022-23 की इस रिपोर्ट के मुताबिक 2021-22 और 2022-23 में सरकार ने करीब 4 हजार 242 करोड़ की राशि खर्च की, लेकिन विभिन्न एजेंसियों से यूसी सर्टिफिकेट नहीं लिए। कैग ने इस पर सवाल उठाते हुए सरकार से इस बारे में आवश्यक कदम उठाने की बात कही है।
छठा वेतन आयोग लागू होने से वेतन व पेंशन पर खर्च बढ़ा
रिपोर्ट के मुताबिक जहां साल 2021-22 में वेतन पर 11 हजार 641 करोड़ रुपये सालाना खर्च हो रहा था, वहीं छठे वेतन आयोग की सिफारिशों को लागू करने के बाद इसमें चार हजार करोड़ रुपये की बढ़ोतरी के साथ हर साल वेतन पर खर्च 15 हजार 669 करोड़ पहुंच गया है। वहीं, पेंशन के भुगतान पर भी खर्च की राशि 2021-22 के 6 हजार 88 करोड़ से बढ़कर 2022-23 में 9 हजार 283 करोड़ से अधिक हो गई। लगातार कर्ज लेने से सरकार को ब्याज पर भी 2021-22 के 4 हजार 472 करोड़ के मुकाबले 2022-23 के 4 हजार 828 करोड़ रुपये खर्च करना पड़ा। इसी तरह लोक लुभावन घोषणाओं को पूरा करने के लिए सरकार द्वारा उपदानों पर खर्च की जा रही राशि भी 2021-22 के 1240 करोड़ से बढ़कर 2022-23 में 1973 करोड़ तक पहुंच गई है।
