शिमला : पहले कोरोना ने सताया, अब पानी की किल्लत से डरे होटल कारोबारी
पानी की राशनिंग के चलते इसका सीधा असर पड़ सकता है। यही कारण है कि होटल कारोबारियों को समर सीजन का डर सताने लगा है। यह बात प्रैस को जारी बयान में टूरिज्म इंडस्ट्री स्टेक होल्डर एसो. के अध्यक्ष मोहिंद्र सेठ ने कही। होटल व्यवसाय पर कोरोना ने पहले से ही कहर ढहाया है।
हालांकि शिमला जल निगम 24 घंटे पानी आपूर्ति की बात कह रहा था। मगर हालात ये हैं कि निगम नियमित सप्लाई में भी विफल हो रहा है। पानी की सप्लाई चार-चार दिन बाद दी जा रही है। गनीमत है कि अभी टूरिस्ट सीजन शुरू नहीं हुआ है। अभी तो टूरिस्ट सीजन शुरू भी नहीं हुआ है। होटलों में 30 से 40 फीसदी तक आक्यूपेंसीचल रही है। आलम यह है कि अभी से होटलों को टैंकरों से पानी लेना पड़ रहा है। शिमला जल प्रबंधन निगम पानी की सप्लाई को लेकर गंभीर नजर नहीं आ रहा है। सरकार ने अलग से जल प्रबंधन निगम इसीलिए बनाया था ताकि शिमला शहर को सचारू रूप से पानी की सप्लाई हो सके, लेकिन अब कई बहानों का सहारा लिया जा रहा है। वहीं लोगों के मन में गलत धारणा है कि विभाग की ओर होटलों के लिए अलग से पानी सप्लाई की व्यवस्था है। हकीकत यह है कि होटलों को भी तभी पानी की सप्लाई होती है जब शहर के अन्य इलाकों में पानी की सप्लाई होती है। इसके लिए कारोबारियों से छह सौ से सात सौ गुना रेट वसूला जाता है। 2019 में आई पानी की किल्लत से भी कोई सीख नहीं ली। तब भी होटल व्यवसाय बुरी तरह से प्रभावित हुआ था। निगम द्वारा न तो पंपों को बदलने तथा स्टैंड बाय पंपों का इंतजाम किया गया और न ही बिजली सप्लाई फेल होने की सथिति में जनरेटर द्वारा बिजली की आपूर्ति करने के लिये कोई कदम नहीं उठाया गया। हाल ही में शहरी विकास मंत्री ने तुरंत पंप तथा जेनरेटर खरीदने के आदेश भी जल निगम को दिए थे ताकि व्यवस्था सुचारू हो सके। शिमला जल निगम को सुचारू करने के लिए तुरंत कदम उठाने चाहिए ताकि अप्रैल मध्य से शुरू होने वाले समर सीजन में पानी की किल्लत न झेलनी पड़े।
