देहरा: “पोषण भी पढ़ाई भी” विषय पर 3 दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का हुआ शुभारम्भ
समेकित बाल विकास सेवा (ICDS) के अंतर्गत बाल विकास परियोजना अधिकारी कार्यालय देहरा, जिला कांगड़ा के तत्वावधान में बुधवार को देहरा स्थित टाउन हॉल कॉम्प्लेक्स में 100 आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के लिए “पोषण भी पढ़ाई भी” विषय पर तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। कार्यक्रम के उद्घाटन अवसर पर बाल विकास परियोजना अधिकारी राजेंद्र कुमार ने आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए “पोषण भी पढ़ाई भी” की अवधारणा, आवश्यकता एवं महत्व पर विस्तृत प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि यह कार्यक्रम प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल एवं शिक्षा (ECCE) को सुदृढ़ करने की एक महत्वपूर्ण पहल है, जिसका उद्देश्य बच्चों के शारीरिक, मानसिक, सामाजिक एवं संज्ञानात्मक विकास को सुनिश्चित करना है।
उन्होंने “पोषण भी पढ़ाई भी” के विभिन्न आयामों की जानकारी देते हुए बताया कि इसके अंतर्गत संतुलित आहार एवं पोषण, आयु के अनुरूप खेल-आधारित एवं गतिविधि-आधारित शिक्षण, भाषा विकास, संज्ञानात्मक कौशल का विकास, सामाजिक-भावनात्मक विकास, स्वच्छता एवं स्वास्थ्य व्यवहार, स्थानीय संसाधनों का उपयोग तथा बच्चों के अनुकूल सीखने का वातावरण तैयार करना प्रमुख रूप से शामिल है। साथ ही नवचेतना एवं आधारशिला पाठ्यक्रम के माध्यम से बच्चों में सीखने की मजबूत नींव रखने पर विशेष बल दिया गया। राजेंद्र कुमार ने आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं का आह्वान किया कि प्रशिक्षण के दौरान अर्जित ज्ञान एवं कौशल को वे अपने-अपने आंगनवाड़ी केंद्रों में दैनिक गतिविधियों का हिस्सा बनाएं, ताकि बच्चों को पोषण के साथ-साथ गुणवत्तापूर्ण प्रारंभिक शिक्षा उपलब्ध कराई जा सके और आंगनवाड़ी केंद्रों को उत्कृष्ट प्रारंभिक बाल्यावस्था शिक्षा केंद्र के रूप में विकसित किया जा सके।
प्रशिक्षण के प्रथम दिवस कार्यालय के सांख्यिकी सहायक सुशील कुमार शर्मा द्वारा पोषण, विकास निगरानी, प्रारंभिक शिक्षा तथा विभागीय दिशा-निर्देशों से संबंधित विभिन्न विषयों पर मार्गदर्शन प्रदान किया गया। वहीं परियोजना के पर्यवेक्षकों द्वारा निर्धारित प्रशिक्षण अनुसूची के अनुसार सत्रों का संचालन करते हुए व्यवहारिक प्रशिक्षण दिया जा रहा है। यह तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं की दक्षता एवं कार्यक्षमता बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जिससे बच्चों के सर्वांगीण विकास, पोषण स्तर में सुधार तथा प्रारंभिक शिक्षा की गुणवत्ता को और अधिक सुदृढ़ किया जा सकेगा।
