हिमाचल: सोलन में बन्द हुए 5 दवा उद्योग, जानें कारण
हिमाचल प्रदेश के सोलन जिला में स्थित पांच दवा उद्योग बंद हो गए हैं। ये पांच दवा उद्योग किराए के मकान में चल रहे थे, जिस कारण ये नए नियमों पर खरा नहीं उतर पा रहे थे। इन उद्योगों के बंद होने से 500 से अधिक मजदूर बेरोजगार हो गए हैं।
इन उद्योगों का बंद होना 2023 में बने संशोधित अनुसूची एम के मानक पूरे न होना है। केंद्रीय दवा नियंत्रण संगठन ने इन मानकों को पूरा करने के लिए 31 दिसंबर तक का समय दिया था। 1 जनवरी से ऐसे उद्योगों के खिलाफ कार्रवाई होनी थी। ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया ने राज्य दवा नियंत्रक को इन इकाइयों की जांच शुरू करने के निर्देश दिए हैं, ताकि ये सुनिश्चित हो सके कि वो गुणवत्ता और सुरक्षा के लिए अंतरराष्ट्रीय मानकों का पालन कर रही है या नहीं। संशोधित अनुसूची एम दवा विनिर्माताओं के लिए गुणवत्ता मानकों और अच्छी विनिर्माण कार्यप्रणाली (जीएमपी) को निर्धारित करती है। इसे केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने दिसंबर 2023 में अधिसूचित किया था और यह 1 जनवरी, 2025 से अमल में आई।
एमएसएमई मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स ने रिवाइज्ड शेड्यूल एम के लिए कुछ समय मांगा था। उनके लिए नया नियम 1 जनवरी 2026 से लागू होगा। ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया ने साफ तौर पर कहा है कि ऐसी यूनिट्स की जांच शुरू की जाए और चेक करें कि वो नियमों का पालन कर रहे हैं या फिर नहीं। छोटी कंपनियों के लिए ग्रेस पीरियड खत्म हो गया है। इससे बचने के लिए ऐसे उद्योगों ने अपना कारोबार हिमाचल से समेटना शुरू कर दिया है।
1 जनवरी से देश भर में बड़े उद्योगों की तरह मध्यम और छोटे उद्योगों में नई जीएमपी (गुड मैन्युफैक्चरिंग प्रैक्टिस) से दवाओं का उत्पादन किया जाएगा। संशोधित अनुसूची एम. दवा और सौंदर्य प्रसाधन अधिनियम 1945 के तहत जीएमपी के नियमों का एक नया अपडेटेड सेट है जो फार्मा कंपनियों के लिए गुणवत्ता सुरक्षा और वैश्विक मानकों के अनुरूप उत्पादन सुनिश्चित करने के लिए लाया गया है, जिसमें अब फार्मास्यूटिकल क्वालिटी, सिस्टम क्वालिटी, रिस्क मैनेजमेंट उत्पाद, गुणवत्ता समीक्षा और कंप्यूटर कृत सिस्टम जैसे आधुनिक पहलू शामिल किए गए हैं ताकि भारतीय दवाएं विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धी और सुरक्षित बन सके।
