हिमाचल: चिट्टा तस्करी में संलिप्त लोग नहीं लड़ सकेंगे पंचायत चुनाव
हिमाचल प्रदेश में अब चिट्टा तस्करी में शामिल लोग अब पंचायत चुनाव नहीं लड़ सकेंगे। विधानसभा ने गुरुवार को हिमाचल प्रदेश पंचायती राज (संशोधन) विधेयक, 2026 को बिना चर्चा के पारित कर दिया। अब यह विधेयक राज्यपाल की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा, जिसके बाद इसके प्रावधान लागू हो जाएंगे। पंचायती राज मंत्री अनिरुद्ध सिंह ने इस विधेयक को बुधवार को सदन में प्रस्तुत किया था। नए नियमों के तहत यदि कोई निर्वाचित प्रधान, उपप्रधान, वार्ड सदस्य, बीडीसी या जिला परिषद सदस्य बाद में चिट्टा तस्करी में लिप्त पाया जाता है और उसके खिलाफ आरोप तय हो जाते हैं, तो उसकी सदस्यता रद्द कर दी जाएगी।
संशोधन में सहकारी बैंकों और सोसाइटियों के डिफॉल्टरों को भी चुनाव लड़ने से अयोग्य घोषित किया गया है। साथ ही जिन लोगों पर पंचायत ऑडिट में रिकवरी लंबित है, वे भी चुनाव नहीं लड़ सकेंगे। सरकार का मकसद पंचायतों में पारदर्शिता और वित्तीय अनुशासन सुनिश्चित करना है। प्रदेश की करीब 3600 पंचायतों में 31 मई से पहले चुनाव प्रस्तावित हैं, जबकि 7 अप्रैल तक आरक्षण रोस्टर तय किया जाना है। हर बार 60 हजार से अधिक उम्मीदवार चुनाव मैदान में होते हैं, ऐसे में यह बदलाव बड़ी संख्या में संभावित प्रत्याशियों को प्रभावित कर सकता है और चुनावी परिदृश्य में बदलाव ला सकता है।
