हिमाचल: आज-कल शुष्क रहेगा मौसम, इस दिन होगी भारी बारिश-बर्फबारी, जानें अपडेट
प्रदेश में पिछले कई दिनों से मौसम शुष्क बना हुआ है। लेकिन मौसम विज्ञान केंद्र शिमला के अनुसार, आज से एक नया पश्चिमी विक्षोभ राज्य को प्रभावित करेगा, जिससे बारिश और बर्फबारी का सिलसिला फिर शुरू होने की संभावना है। विशेष रूप से 10 फरवरी को मध्य और उच्च पर्वतीय क्षेत्रों में हल्की से मध्यम बारिश व बर्फबारी का पूर्वानुमान है। मौसम विभाग के मुताबिक, 8 और 9 फरवरी को प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में मौसम शुष्क रहेगा, लेकिन बादल छाए रहेंगे। 10 फरवरी को कुछ स्थानों पर गरज-चमक के साथ तेज हवाएं चल सकती हैं, जिनकी रफ्तार 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंच सकती है। चंबा, कांगड़ा, कुल्लू, मंडी, शिमला और किन्नौर जैसे जिलों में खराब मौसम की चेतावनी जारी की गई है।
वहीं मौसम विभाग के अनुसार बीते दिनों मौसम के साफ रहने के बाद प्रदेश भर में दिन के तापमान में भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है बीते 24 घंटे में राजधानी शिमला में अधिकतम तापमान 15.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ, जो सामान्य से 2.6 डिग्री अधिक है। सुंदरनगर में पारा 23.2 डिग्री रहा और यहां तापमान सामान्य से 4.4 डिग्री ऊपर चला गया। भुंतर में 21.4 डिग्री तापमान दर्ज किया गया, जो औसत से 4.1 डिग्री ज्यादा रहा। ठंडे इलाकों में भी गर्मी का असर दिखा। कल्पा में अधिकतम तापमान 11.6 डिग्री सेल्सियस रहा, जो सामान्य से 5.6 डिग्री अधिक है। धर्मशाला में 21 डिग्री तापमान दर्ज हुआ और यह सामान्य से 3.6 डिग्री ऊपर रहा। ऊपरी शिमला क्षेत्र के साथ-साथ मध्य पर्वतीय क्षेत्रों में भी तापमान में बढ़ोतरी देखने को मिली। नाहन में अधिकतम तापमान 22.6 डिग्री दर्ज किया गया, जो सामान्य से 3.7 डिग्री अधिक रहा। सोलन में तापमान 19.4 डिग्री सेल्सियस रहा, हालांकि यहां बढ़ोतरी मामूली रही और यह केवल 0.3 डिग्री ज्यादा दर्ज हुआ। पर्यटन नगरी मनाली में अधिकतम तापमान 12.2 डिग्री रहा, जो सामान्य से 1.2 डिग्री ऊपर है। कांगड़ा में भी पारा 22.7 डिग्री तक पहुंच गया, जो औसत से 4.5 डिग्री ज्यादा रहा।बर्फ से ढकीं पहाडि़यां
मौसम विभाग के अनुसार पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने के बाद अगले दो से तीन दिनों में अधिकतम और न्यूनतम तापमान में 2 से 3 डिग्री सेल्सियस तक की गिरावट आ सकती है। इससे प्रदेश में एक बार फिर ठंड का असर बढ़ेगा। यह बारिश और बर्फबारी रबी फसलों तथा सेब बागानों के लिए फायदेमंद साबित हो सकती है, वहीं जल स्रोतों को भी इससे राहत मिलने की उम्मीद है।
