हिमाचल: बिना HPV वैक्सीनेशन विदेश नहीं जा पाएगी बेटियां, सर्टिफिकेट दिखाना हुआ अनिवार्य
हिमाचल प्रदेश में किशोरियों के लिए एचपीवी (ह्यूमन पैपिलोमा वायरस) वैक्सीनेशन को लेकर बड़ा कदम उठाया गया है। अब निर्धारित आयु वर्ग की बेटियों को विदेश जाने के लिए एचपीवी वैक्सीन का सर्टिफिकेट दिखाना अनिवार्य होगा। प्रदेश में सर्वाइकल कैंसर से बचाव के उद्देश्य से एचपीवी टीकाकरण अभियान चलाया जा रहा है। यह टीका न केवल कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से सुरक्षा प्रदान करता है, बल्कि अब विदेश यात्रा के लिए भी जरूरी शर्त बन गया है।
निर्धारित आयु की किशोरियों को विदेश जाने से पहले टीकाकरण का प्रमाण पत्र प्रस्तुत करना होगा। यह सर्टिफिकेट टीका लगने के समय ही स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी किया जा रहा है और विदेश यात्रा से संबंधित फॉर्म भरते समय इसे दिखाना अनिवार्य किया गया है। प्रदेशभर में 14-15 वर्ष आयु वर्ग की करीब 65 हजार किशोरियों को 90 दिनों के भीतर एचपीवी वैक्सीन लगाने का लक्ष्य रखा गया है। यह अभियान 21 जून तक चलेगा, हालांकि इसकी शुरुआत फिलहाल धीमी बताई जा रही है। चिकित्सकों के अनुसार इस टीके का प्रभाव लगभग 26 वर्षों तक रहता है।
किशोरियों को गार्डासिल-4 नामक एचपीवी वैक्सीन लगाई जा रही है, जिसका निर्माण मर्क एंड कंपनी द्वारा किया गया है। यह वैक्सीन वर्ष 2006 में बाजार में आई थी और भारत में एमएसडी फार्मास्यूटिकल्स द्वारा वितरित की जाती है। निजी क्लीनिकों में इस टीके की कीमत लगभग 12 से 15 हजार रुपये तक है, लेकिन हिमाचल प्रदेश में इसे निःशुल्क उपलब्ध कराया जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, गार्डासिल-4 वैक्सीन की अब तक 160 देशों में 500 मिलियन से अधिक डोज दी जा चुकी हैं। एचपीवी वायरस कम से कम छह प्रकार के कैंसर का कारण बन सकता है, जिससे बचाव के लिए यह टीका महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
डॉ. परविंद्र सिंह, बीएमओ धर्मपुर ने अभिभावकों से अपील की है कि वे अपनी बेटियों का समय पर टीकाकरण सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि यह टीका न केवल विदेश यात्रा के लिए आवश्यक है, बल्कि गंभीर बीमारियों से बचाव के लिए भी बेहद जरूरी है।
