हिमाचल प्रदेश राज्य विद्युत बोर्ड कर्मचारी यूनियन में पदोन्नति प्रक्रिया पर उठे सवाल
हिमाचल प्रदेश राज्य विद्युत बोर्ड लिमिटेड में टी-मेट, हेल्पर्स और सहायक लाइनमैन की पदोन्नति प्रक्रिया को लेकर कर्मचारी यूनियन ने गंभीर सवाल उठाए हैं। यूनियन का आरोप है कि निर्धारित नियमों के बावजूद पिछले 7-8 महीनों से पदोन्नतियों में अनावश्यक देरी की जा रही है, जिससे कर्मचारियों की वरिष्ठता प्रभावित हो रही है। बोर्ड द्वारा जारी आदेशों के अनुसार प्रदेश भर में रिक्त पदों पर संबंधित अधिशासी एवं अधीक्षण अभियंता प्रत्येक माह की 10 तारीख को पात्र कर्मचारियों की डीपीसी कर पदोन्नति आदेश जारी करेंगे, ताकि उनकी अगली पदोन्नति पर कोई प्रतिकूल प्रभाव न पड़े।
हालांकि यूनियन का कहना है कि पिछले कुछ महीनों से कैडर कंट्रोलिंग अथॉरिटी द्वारा प्रक्रिया पूरी करने के बजाय डीपीसी के बाद पदोन्नति फाइलें मुख्यमंत्री की स्वीकृति के नाम पर शिमला मंगवाई जा रही हैं और लंबे समय तक लंबित रखी जा रही हैं। इसके बाद कथित रूप से अनियमित तरीके से “पिक एंड चूज़” के आधार पर फाइलें वापस भेजी जा रही हैं, जिससे पदोन्नति में विसंगतियां उत्पन्न हो रही हैं। विद्युत बोर्ड कर्मचारी यूनियन के प्रदेशाध्यक्ष नितिश भारद्वाज और महामंत्री प्रशांत शर्मा ने संयुक्त प्रेस बयान में कहा कि इस प्रक्रिया के चलते जूनियर कर्मचारी वरिष्ठ और वरिष्ठ कर्मचारी जूनियर हो रहे हैं, जो न केवल नियमों के विरुद्ध है बल्कि कर्मचारियों के साथ अन्याय भी है।
यूनियन नेताओं ने प्रदेश के मुख्यमंत्री तथा बोर्ड के चेयरमैन प्रबोध सक्सेना से मामले में हस्तक्षेप कर पदोन्नति प्रक्रिया को पुनः कैडर कंट्रोलिंग अथॉरिटी को अधिकृत करने की मांग की है, ताकि अनावश्यक देरी और कथित अनियमितताओं पर रोक लग सके। इसके अलावा यूनियन ने मिनिस्ट्रियल स्टाफ के रिक्त पदों पर शीघ्र डीपीसी कर पदोन्नति देने तथा कंप्यूटर ऑपरेटर के लिए अलग पदोन्नति नियम बनाए जाने की मांग भी की है।
नितिश भारद्वाज ने कहा कि स्टाफ की भारी कमी के कारण विद्युत आपूर्ति को सुचारू बनाए रखना कठिन होता जा रहा है। कई स्थानों पर एक या दो कर्मचारियों पर 35-40 ट्रांसफॉर्मर और कई किलोमीटर लंबी एलटी व एचटी लाइनों का दायित्व है, जिससे कर्मचारी अत्यधिक कार्यभार और तनावपूर्ण माहौल में काम कर रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि इसी कारण आए दिन दुर्घटनाएं भी हो रही हैं। यूनियन ने यह भी कहा कि मुख्यमंत्री द्वारा कई बार भर्ती की घोषणा किए जाने के बावजूद प्रक्रिया शुरू नहीं होना चिंताजनक है। बोर्ड प्रबंधन और प्रदेश सरकार से शीघ्र भर्ती प्रक्रिया आरंभ करने तथा यूनियन प्रतिनिधियों के साथ नियमित बैठक कर कर्मचारियों से संबंधित सभी मुद्दों पर विस्तृत चर्चा करने की मांग की गई है।
