घर लौटने के लिए बेताब प्रवासी मजदूर, अपना रहे खतरनाक तरीके
स्पेशल ट्रेन और बसों के चलने के बाद भी प्रवासी मजदूर अपने घरों को जाने के लिए जोखिम भरे कदम उठा रहे हैं। हरियाणा से उत्तर प्रदेश जाने के लिए पिछले दो हफ्तों में करीब 2000 मजदूर, जिसमें महिलाएं व बच्चे भी शामिल है, ने रात के अंधेरे में यमुना को पार किया है। यह मजदूर यमुना पार करने के लिए एक रबड़ ट्यूब का इस्तेमाल कर रहे हैं।
उत्तर प्रदेश के पुलिस अधिकारी के मुताबिक जिस टूटी फूटी ट्यूब में बैठकर यह लोग नदी पार करते हैं वह इतनी खस्ता हालत में है कि कभी भी फट सकती है। यह लोग अपनी और अपने परिवार की जान जोखिम में डालकर नदी पार कर रहे हैं।
उनका कहना है कि रोज़ाना बाहर से आने वाले प्रवासी मजदूरों की संख्या 12000 से 15000 है जिनमें से 70 फ़ीसदी लोग अधिकारिक माध्यमों से बसों में से आते हैं। हरियाणा से इन मजदूरों को लाने के लिए 150 से 200 बसें रोज़ाना भेजी जा रही हैं। तो वहीं अन्य बचे लोग नदियों व जंगल के रास्ते से सहारनपुर की ओर आ रहे हैं। गैरकानूनी तरीकों से नदी पार करवाने वालों को पुलिस गिरफ्तार कर रही है।
अधिकारियों का कहना है कि सहारनपुर मैं बस उन्हीं प्रवासी मजदूरों को प्रवेश मिल रहा है जिन्हें हरियाणा सरकार की ओर से जांच कर बैठाया जा रहा है। उन्होंने ने बताया कि हजारों लोग ऐसे हैं जो जरूरी प्रक्रिया से वंचित हैं और किसी भी माध्यम से सीमा पार कर सहारनपुर आ रहे हैं। सहारनपुर तीन राज्य, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की सीमाओं से सटा है। लॉकडाउन के बाद से सहारनपुर में सबसे ज्यादा प्रवासी मजदूर आ रहे हैं।
