हिमाचल के 11 हज़ार बागवानों व 1 लाख किसानों ने शुरु की सुभाष पालेकर प्राकृतिक खेती
हिमाचल की आर्थिकी में अहम भूमिका निभाने वाली सेब बागवानी की बढ़ती लागत को कम करने के लिए प्रदेश के बागवानों ने प्राकृतिक खेती विधि से सेब बागवानी शुरू कर दी है। सेब बागवानी में प्रयोग होने वाले मंहगे खादों, कीटनाशकों और फफूंदनाशकों के बजाय अब प्रदेश के 11 हजार सेब बागवानों ने प्राकृतिक खेती खुशहाल किसान याेजना के तहत शुरू की गई सुभाष पालेकर प्राकृतिक खेती विधि के तहत बागवानी शुरू की है। पिछले अढाई साल पहले प्रदेश में शुरू की गई इस योजना के तहत सेब बागवानी के लिए प्रसिद्ध शिमला, कुल्लू, मंडी, चंबा और सिरमौर जिला के किसानों ने अपने एक से 55 बीघा के बागिचों में बागवानी शुरू कर दी है। बागवानी विभाग से मिली जानकारी के मुताबिक कि सुभाष पालेकर प्राकृतिक खेती विधि के सफल परिणाम सभी तरह की अनाज फसलों, सब्जियों और फलों में देखे गए हैं। अभी तक इस खेती विधि से 11 हजार बागवान और 1 लाख किसान जुड़ चुके हैं और बड़ी तेजी से यह विधि खासकर बागवानों में ख्याति पा रही है। इस विधि के तहत विश्वविद्यालयों और विभाग स्तर पर शोध किए गए हैं। जिनके सफल परिणाम देखने को मिले हैं। विभाग के मुताबिक इस साल प्राकृतिक खेती कर रहे बागवानों का पंजीकरण कर उन्हें उचित बाजार मुहैया करवाया जाएगा। इसके अलावा एचपीएमसी की मंडियों में प्राकृतिक खेती के उत्पादों के लिए अलग से दुकान का प्रावधान भी किया जाएगा।
लागत में 43 फीसदी की कमी, 27 प्रतिशत अधिक मिले दाम
सुभाष पालेकर प्राकृतिक खेती योजना के कार्यकारी निदेशक प्रो. राजेश्वर सिंह चंदेल ने बताया इस खेती विधि को लेकर अभी तक किए गए शोध में इसमें बागवानों की लागत में 43 फीसदी की कमी आई है। इसके अलावा किसी विशेष मार्केट के बागवानों को 27 फीसदी अधिक दाम मिले हैं। उनका कहना है कि इस खेती विधि में किसानों को बाजार से कुछ भी लाने की जरूरत नहीं है और किसान अपने घर के आस-पास मौजूद वनस्पतियों से ही सभी प्रकार की दवाईयां तैयार कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि एसपीएनएफ विधि में सेब बागवानों के बागिचों में मारसोनिना और स्कैब का प्रकोप भी कम आंका गया है। इसके अलावा नौणी विश्वविद्यालय के क्षेत्रीय अनुसंधान केंद्र मशोबरा के वैज्ञानिकों ने भी बागवानों की इस िवधि की जमकर तारीफ की गई।
