हिमाचल के बागवानों को प्रदेश की मंडियों में प्रति किलो के हिसाब मिलेगा सेब का रेट
प्रदेश सरकार ने इस साल राज्य की विभिन्न मंडियों में सेब क्रेट में भरकर बेचने की व्यवस्था करने का मन बना लिया है। कार्टन में सेब की पैकिंग के कारण बागवानों पर पैकिंग का खर्चा भी अपेक्षाकृत अधिक बैठता है और सेब के दाम भी पूरे नहीं मिल पाते हैं। लिहाजा बागवानों को कई बार उत्पादन लागत भी पूरी नहीं मिल पाती है। सेब बागवानों को सेब को बोरियों में भरकर सरकारी एजेंसियों एचपीएमसी और हिमफेड के पास न्यूनतम समर्थन मूल्य पर बेचना पड़ता है। लेकिन इस साल बागवानों को प्रदेश की मंडियों में अब सेब के रेट प्रति किलो के हिसाब से मिल पाएंगे। हर साल बागवानों का प्रदेश की मंडियों में बिचौलिये आर्थिक शोषण करते रहे हैं। हिमाचल प्रदेश में बी और सी ग्रेड के सेब को इस साल मंडियों में अच्छे दाम मिलेंगे। अभी तक बीस किलो के कार्टन में सेब बागवान 32 किलो भरकर बेचते थे, मगर दाम बीस किलो के ही मिलते रहे हैं। बता दें कि बी और सी ग्रेड का सेब वह है, जो गुणवत्ता और आकार में ए ग्रेड से कम होता है।
