हिमाचल मानसून सत्र: 10 दिन में 46 घंटे की कार्यवाही, आमने-सामने दिखे पक्ष-विपक्ष
हिमाचल प्रदेश विधानसभा का मानसून सत्र इस बार भी हंगामेदार रहा। इस मानसून सत्र की कार्यवाही 46 घंटे और 12 मिनट तक चली। बीते दाे से 13 अगस्त तक आयोजित इस सत्र में सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच खूब तकरार और बयानबाज़ी होती रही। इस सत्र के पहले दिन सदन में पूर्व मुख्यमंत्री स्व. वीरभद्र सिंह और पूर्व चीफ व्हिप स्व. नरेंद्र बरागटा काे याद किया गया और अगले दिन से विपक्ष का हंगामा शुरू हो गया। विपक्ष द्वारा किसी न किसी एजेंडे काे हथियार बनाने की पूरी कोशिश की गई, मगर सीएम जयराम ठाकुर के मंत्रियों और विधायकों ने मोर्चा संभाले रखा। इस बार के मानसून सत्र में 10 दिन के सत्र में 2 गैर सरकारी दिवस रखे गए। सत्र में कुल 402 तारांकित प्रश्न चर्चा के लिए लगे। इसके अलावा नियम 46 का एक प्रस्ताव, नियम 61 के 3 प्रस्ताव, नियम 62 के 13 विषयों पर, नियम 130 के 5 प्रस्तावों पर चर्चा हुई। नियम 101 के तहत 4 संकल्प भी सदन में लगे। इस दौरान 2 सरकारी विधेयक विधानसभा सदन पटल पर रखे गए जिनमें एक पारित किया गया और एक कमेटी को सौंपा गया। इसके अतिरिक्त 12 अन्य विषय भी सदन में उठाए गए।
सत्र के दूसरे दिन विपक्ष ने पूर्व सांसद पंडित रामस्वरूप शर्मा की आत्महत्या को लेकर हंगामा किया और वॉक आउट किया। अगले दिन विपक्ष बेरोजगारी और भर्तियों को लेकर काम रोको प्रस्ताव लाया और वॉक आउट किया। वॉक आउट का ये सिलसिला अंतिम दिन तक चला जब विपक्ष ने स्पीकर विपिन सिंह परमार को पद से हटाने की मांग उठाई। अंतिम दिन प्रश्नकाल शुरू होने से पहले कांग्रेस के 19 विधायकों ने इस संबंध में प्रदेश विधानसभा सचिव को नोटिस दिया। प्रश्नकाल के बाद की कार्यवाही में भी कांग्रेस विधायक दल शामिल नहीं हुआ। हालांकि कांग्रेस विधायक प्रश्नकाल की घोषणा के बाद सदन से चुपचाप बाहर चले गए और इस तरह से उन्होंने बैठक का मौन बहिष्कार किया। बाहर काले बिल्ले पहनकर कांग्रेस विधायक दल विधानसभा परिसर में मुख्य गेट पर बैठ कर अपना रोष जताने लगा और स्पीकर पर भेदभाव का आरोप लगाते हुए उन्हें पद से हटाने पर अड़ा रहा। हालांकि, इस नोटिस को सदन के चले होने से 14 दिन पहले नहीं देने और एक तिहाई सदस्यों की ओर से न दिए जाने जैसी तकनीकी खामियां बताकर अस्वीकार किया गया। नेता विपक्ष मुकेश अग्निहोत्री ने कहा कि स्पीकर विपिन सिंह परमार जानबूझकर विपक्ष के सदस्यों के अधिकारों और विशेषाधिकारों को बनाए रखने में असफल हो रहे हैं। उनकी सदन की कार्यवाही के संचालन की निष्पक्षता संदेहास्पद है। स्पीकर को न्यूट्रैलिटी रखनी होती है, उन्हें राजनीतिक विचारधारा का पक्ष नहीं लेना चाहिए।
मानसून सत्र के दौरान मेरा भरसक प्रयास रहा कि सत्र की कार्यवाही सौहार्दपूर्ण वातावरण में चले। इसके लिए मुख्यमंत्री, नेता प्रतिपक्ष, सभी सदस्यों का धन्यवाद करता हूं जिनकी वजह से इस सदन की कार्यवाही को सुचारू रूप से संचालित कर पाए।
-विपिन सिंह परमार, स्पीकर हिमाचल प्रदेश विधानसभा।
