स्व-रोजगार को बढ़ावा दे रही मुख्यमंत्री स्वावलंबन योजना
देश में महंगाई और बेरोजगारी ये वो दो समस्याएं है जो घटने के बजाए निरंतर बढ़ती हुई नजर आती है। अथाह प्रयासों के बावजूद देश और प्रदेश के युवा रोजगार के लिए भटक रहे है। चाहे सरकारी क्षेत्र हो या प्राइवेट, इन दोनों ही क्षेत्रों में पर्याप्त रोजगार का अभाव हैं। ऐसी स्थिति में स्व-रोजगार ही इकलौता विकल्प दिखाई देता है। हिमाचल प्रदेश सरकार द्वारा इस दिशा में कदम उठाते हुए राज्य के युवाओं के लिए मुख्यमंत्री स्वावलंबन योजना की शुरुआत की गई है। ये प्रोजेक्ट न केवल स्व-रोजगार की संभावनाओं को तलाशने में युवाओं की मदद कर रहा है बल्कि इससे सम्बन्धित सभी लोगों को प्रोत्साहन भी दे रहा है।
इस योजना का आरंभ हिमाचल प्रदेश सरकार द्वारा बेरोजगार युवाओं को स्वरोजगार के लिए प्रोत्साहित करने के लिए किया गया है। रोजगार की तलाश में भटकते युवाओं को अपनी योग्यता के अनुसार रोजगार नही मिल पाता या कई बार तो सम्भावना ही नहीं बनती, लेकिन स्व-रोजगार अपनाकर युवा खुद तो सक्षम बन ही सकते है और साथ में अन्य लोगों को रोज़गार के अवसर भी प्रदान कर सकते है। इस योजना से राज्य के युवाओं को अपना बिजनेस सेट करने में सहायता मिल रही है। इस योजना के अंतर्गत वह सभी नागरिक जो उद्योग, सर्विस सेक्टर, व्यापार स्थापित करना चाहते हैं, उन्हें ऋण पर सब्सिडी हिमाचल प्रदेश सरकार द्वारा प्रदान की जाती है। यह सब्सिडी राशि 25 प्रतिशत से लेकर 35 प्रतिशत रहती है।
योजना में पुरुष लाभार्थियों को 25 प्रतिशत तथा महिलाओं को 30 प्रतिशत की दर से अनुदान देने का प्रावधान है जबकि विधवा महिलाओं के लिए अनुदान राशि 35 प्रतिशत निर्धारित की गई है। इस योजना के अंतर्गत 40 लाख रुपए तक के ऋण पर सरकार द्वारा 3 वर्ष तक ब्याज में 5 प्रतिशत की दर से ब्याज पर अनुदान के साथ-साथ क्रेडिट गारंटी योजना के अन्तर्गत बैंक द्वारा लिया जाने वाले शुल्क को भी माफ किया जाता है। मुख्यमंत्री स्वावलंबन योजना में एक परिवार से एक व्यक्ति को ही लाभ मिलता है। 18 से 45 वर्ष की आयु के लोग योजना के तहत ऋण लेने के लिए पात्र हैं। प्रदेश सरकार ने मुख्यमंत्री स्वावलंबन योजना 2019 के तहत आवेदन करने वाली महिलाओं के लिए ऊपरी आयु सीमा में पांच वर्ष की छूट देने का भी निर्णय लिया है। कैपिटल सब्सिडी की अधिकतम सीमा पुरुषों के लिए 15 लाख तथा महिलाओं के लिए 18 लाख की गई है।
ये आते है योजना के दायरे में :
योजना के अन्तर्गत औद्योगिक इकाइयां, दुकान, सूचना प्रौद्योगिकी कार्य, सर्विस स्टेशन, जेसीबी, छोटे गुड्स कैरियर, होटल, रेस्टोरेंट, ब्यूटी पार्लर, इको पर्यटन इकाइयां, धर्मकांटा, जिम, बैंक्वेट हॉल, मेडिकल लैब, मोबाइल फूड वैन, साइबर कैफे, फोटोकॉपी मशीन, भण्डारण यूनिट, डेयरी उत्पादन युनिट, कृषि उत्पाद वितरण दुकान, नर्सरी, टिशू कल्चर लैब, अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी आधारित खेती, पेट्रोल पंप, बोरवेल, ड्रिलिंग रिंग मशीन इत्यादि के लिए ऋण प्रदान किया जाता है। पिछले वर्ष प्रदेश सरकार ने मुख्यमंत्री स्वावलंबन योजना 2019 में संशोधन कर इसमें 18 नई गतिविधियां शामिल की हैं। अब इस योजना के तहत गतिविधियों की संख्या बढ़कर 103 हो गई है। योजना के तहत लघु सेवा व व्यावसायिक उद्योग की सूची में परिरक्षित चारा इकाइयों की स्थापना, उन्नत डेयरी विकास परियोजना (10 गाय या भैंस की एक इकाई), दूध और दुग्ध उत्पादों के लिए कोल्ड स्टोरेज सुविधाओं की स्थापना, फार्म स्टे/एग्रो पर्यटन व फार्म पर्यटन, कृषि के लिए खुदरा दुकानों का निर्माण, कृषि उपकरणों व औजारों का निर्माण, सब्जी नर्सरी तैयार करना, कृषि उत्पादों का भंडारण और परिवहन, इंटरनेट ऑफ थिंग्ज आधारित वर्टिकल फार्मिंग, पेट्रोल पंप, ईवी चार्जिंग स्टेशन, एंबुलेंस, रेशम प्रसंस्करण इकाई, रेशम रीलिंग इकाइयां, ऑक्सीजन क्रायोजेनिक टैंकर सेवाएं, सर्वर यूनिट और ड्रिलिंग यूनिट शामिल की गई हैं।
ऐसे करें आवेदन :
इस योजना के लिए वेबसाइट पर ऑनलाइन आवेदन किया जा सकता है जिसके लिए आधार कार्ड, हिमाचली बोनाफाइड, जन्म तिथि प्रमाण पत्र, भूमि के दस्तावेज व रेंट डीड अपलोड करना अनिवार्य है। इसके अलावा महाप्रबंधक जिला उद्योग केन्द्र से भी सम्पर्क किया जा सकता है।
सफल साबित हुई है योजना
हिमाचल प्रदेश मुख्यमंत्री स्वावलंबन योजना के माध्यम से पिछले तीन सालों में 2021 तक प्रदेश में 1452 नए उद्योग स्थापित किए गए है। इन उद्योगों में 1228.12 करोड़ रुपये का निवेश हुआ है। इन उद्योगों में 10 हजार 455 लोगों को रोजगार प्रत्यक्ष रूप से मिला है। सबसे अधिक 282 उद्योग सोलन जिले में स्थापित किए गए, जिनमें 5,561 लोगों को रोजगार मिला।
-राकेश प्रजापति, उद्योग निदेशक, हिमाचल प्रदेश
मुख्यमंत्री स्वावलंबन योजना का उद्देश्य :
स्वावलंबन योजना को शुरू करने का मुख्य उद्देश्य यह है कि देश में बेरोजगारी को ख़त्म करके सभी नागरिकों को रोजगार प्रदान कर उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार लाया जा सके। योजना के माध्यम से जो नागरिक खुद का व्यापार शुरू करना चाहते है, परन्तु जिनके पास पैसे नहीं है और आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है उन नागरिको को सरकार लोन प्रदान करती है और लोन पर निर्धारित सब्सिडी भी प्रदान करती है। यदि सरकार या फिर वित्तीय संस्थान द्वारा यह पता लगता है कि योजना के अंतर्गत लाभार्थी ने सब्सिडी गलत जानकारी देकर प्राप्त की है तो इस स्थिति में सरकार तथा वित्तीय संस्थान के पास यह अधिकार है कि वह सब्सिडी की राशि लाभार्थी से वापस ले सकती है।
योजना के तहत इस तरह कर सकते हैं आवेदन :
आवेदक हिमाचल प्रदेश का स्थाई निवासी होना अनिवार्य है। आवेदक की आयु 18 वर्ष से लेकर 45 वर्ष के बीच होनी चाहिए और उद्योग विभाग व ऑनलाइन माध्यम से भी योजना का लाभ पाने के लिए आवेदन किया जा सकता है। आवेदक को इसके लिए अपना आधार कार्ड, निवास प्रमाण पत्र, पैन कार्ड, पासपोर्ट साइज फोटोग्राफ, बैंक पासबुक, मोबाइल नंबर दर्ज करवाना होगा।
