राष्ट्रपति पद के लिए द्रौपदी मुर्मू और यशवंत सिन्हा आमने -सामने
राष्ट्रपति चुनाव के लिए मैदान में अब सिर्फ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन प्रत्याशी द्रौपदी मुर्मू और विपक्ष के प्रत्याशी यशवंत सिन्हा ही रह गए हैं। चुनाव के लिए कुल 96 लोगों का नॉमिनेशन अलग-अलग कारणों से रद्द कर दिया गया है। द्रौपदी मुर्मू और यशवंत सिन्हा के नॉमिनेशन को ही वैध माना गया है। राष्ट्रपति के लिए 18 जुलाई को चुनाव होना है। 21 जुलाई को इसके नतीजे आएंगे। दरअसल भारत के राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद का कार्यकाल 24 जुलाई को ख़त्म हो रहा है और संविधान के मुताबिक़ नए राष्ट्रपति का चुनाव उससे पहले पूरा हो जाना चाहिए। राष्ट्रपति को चुनने वाले इलेक्टोरल कॉलेज में संसद के दोनों सदनों के अलावा विधानसभा और केंद्र शासित प्रदेशों के सदस्य होते हैं। सत्ताधारी एनडीए की तरफ से द्रौपदी मुर्मू और विपक्ष की तरफ से यशवंत सिन्हा उम्मीदवार हैं। दोनों ने अपने पक्ष में समर्थन जुटाने की कोशिशें तेज कर दी हैं। इसी कड़ी में बीते दिनों द्रोपदी मुर्मू ने हिमाचल प्रदेश का दौरा किया। बद्दी के किशनपुरा स्थित एक निजी होटल में उन्हें अपना समर्थन देने के लिए प्रदेश भाजपा विधायक दल ने बैठक आयोजित की थी। इस बैठक में मुर्मू विशेष रूप से पहुंची थीं। यहां उन्हें प्रदेश के मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर, पार्टी विधायकों, लोकसभा और राज्यसभा सांसदों ने अपना समर्थन दिया।
अब तक अधिकतम पार्टियों ने अपनी स्थिति साफ कर दी है। अकाली दल ने भी द्रौपदी मुर्मू को समर्थन देने का ऐलान कर दिया। अब तक भाजपा के अलावा बीजेडी, वाईएसआर कांग्रेस, जनता दल सेक्युलर, शिरोमणि अकाली दल, जेडीयू, एआईएडीएमके, लोक जन शक्ति पार्टी, अपना दल (सोनेलाल), निषाद पार्टी, बहुजन समाज पार्टी, रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (अठावले), एनपीपी, एनपीएफ, एमएनएफ, एनडीपीपी, एसकेएम, एजीपी, पीएमके, एआईएनआर कांग्रेस, जननायक जनता पार्टी, यूडीपी, आईपीएफटी, यूपीपीएल जैसी पार्टियों ने समर्थन दे दिया है। विपक्ष में होने के बाद भी बीजेडी, वाईएसआर कांग्रेस, जनता दल सेक्युलर, अकाली दल और बहुजन समाज पार्टी ने एनडीए की उम्मीदवार द्रौपदी मुर्मू को समर्थन दिया है। इन सभी के पास 6 लाख वैल्यू से ज्यादा के वोट हैं।
मुर्मू के साथ संख्या बल ज़रूर दिख रहा है मगर यशवंत सिन्हा के आत्मविश्वास में भी कमी नज़र नहीं आ रही। उन्हें अब भी उम्मीद है कि अंत तक उनके समर्थन में और लोग भी आगे आएंगे। यूँ तो राष्ट्रपति चुनाव के लिए ज्यादातर बड़ी पार्टियों ने अपनी स्थिति स्पष्ट कर दी है, लेकिन अभी भी कुछ दलों की स्थिति स्पष्ट नहीं है। पंजाब और दिल्ली में सरकार बनाने वाली आम आदमी पार्टी ने अब तक स्पष्ट नहीं किया है कि उनका समर्थन किसे मिलेगा। आप के 10 राज्यसभा सांसद भी हैं। इसके अलावा टीडीपी, झामुमो ने भी अब तक कुछ साफ नहीं किया है। शिवसेना में भी आंतरिक कलह के चलते अब तक किसी भी उम्मीदवार के समर्थन का ऐलान नहीं हुआ है। हालांकि, भाजपा के साथ सरकार बनाने वाले विधायक और ज्यादातर सांसद एनडीए के उम्मीदवार को सपोर्ट कर सकते हैं। ऐसे में यशवंत सिन्हा को आम आदमी पार्टी, टीडीपी और झामुमो से बड़ी उम्मीदें हैं। अगर ये दल सिन्हा को समर्थन दे देते हैं तो वह द्रौपदी मुर्मू के कुछ हद तक करीब पहुंच सकते हैं।
