चुनाव विश्लेषण : सभी सांसदों के क्षेत्रों में उनके दल पिछड़े
हिमाचल प्रदेश विधानसभा चुनाव 2022 में न सिर्फ सत्ता परिवर्तन हुआ बल्कि हिमाचल में एक नए राजनीतिक युग की शुरुआत भी हुई। इस चुनाव ने प्रदेश की सियासत की तस्वीर भी बदली और कई दिग्गजों को आईना भी दिखा दिया। हिमाचल प्रदेश में चार लोकसभा क्षेत्र है, और दिलचस्प बात ये है कि इन चार के चार लोकसभा क्षेत्रों के सांसद अपने-अपने क्षेत्रों में अपनी पार्टी को लीड नहीं दिला पाए है। चारो सांसदों के क्षेत्रों में उनकी पार्टी पिछड़ी है। हमीरपुर लोकसभा क्षेत्र के सांसद अनुराग ठाकुर, कांगड़ा संसदीय क्षेत्र के सांसद किशन कपूर और शिमला संसदीय क्षेत्र के सांसद सुरेश कश्यप अपने क्षेत्रों में भारतीय जनता पार्टी को बढ़त नहीं दिला पाए और सांसद प्रतिभा सिंह के मंडी संसदीय क्षेत्र में कांग्रेस पिछड़ गई। इस चुनाव में सांसदों की परफॉर्मेंस के बाद चुनाव में इनका प्रभाव विश्लेषण का विषय बन गया है।
अनुराग के संसदीय क्षेत्र में भाजपा को सिर्फ 5 सीटें
हमीरपुर लोकसभा क्षेत्र सांसद अनुराग ठाकुर का गढ़ है। अनुराग ठाकुर सिर्फ सांसद ही नहीं केंद्रीय मंत्री भी है। हिमाचल प्रदेश के साथ साथ अनुराग ठाकुर पूरे देश में खासा प्रभाव रखते है। चुनाव से पहले उनके समर्थक लगातार उन्हें बतौर मुख्यमंत्री चेहरा भी प्रोजेक्ट कर रहे थे। अनुराग की लोकप्रियता पर कोई सवाल नहीं उठाया जा सकता। परन्तु इस सबके बावजूद भी अपनी लोकसभा क्षेत्र में अनुराग ठाकुर अपनी साख नहीं बचा पाए। हमीरपुर लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले 17 में से 10 विधानसभा क्षेत्रों में कांग्रेस की जीत हुई है जबकि 5 पर भाजपा और 2 पर निर्दलीय जीत कर आए है। खुद हमीरपुर जिले की पांच सीटों में से भाजपा एक सीट भी नहीं जीत पाई। हमीरपुर जिले की, भोरंज, नादौन, सुजानपुर, और बड़सर में कांग्रेस तो हमीरपुर में निर्दलीय की जीत हुई है। सुजानपुर में तो अनुराग और पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल अपने चुनाव की तरह डटे रहे, परन्तु फिर भी भाजपा प्रत्याशी कैप्टन रंजीत सिंह राणा को जीत नहीं दिलवा पाए। इस संसदीय क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली ऊना की पांच सीटों में से सिर्फ एक ऊना सदर सीट पर भाजपा को जीत मिली, जबकि हरोली, गगरेट, चिंतपूर्णी और कुटलैहड़ में कांग्रेस ने बाजी मारी है। कुटलैहड़ में कांग्रेस ने 32 सालों बाद वापसी की है। यहाँ कांग्रेस प्रत्याशी दविंदर सिंह भुट्टो ने मंत्री वीरेंद्र कंवर को पटकनी दी। हमीरपुर लोकसभा क्षेत्र के तहत आने वाली जसवां परागपुर, बिलासपुर, झंडूता, नैना देवी और ऊना सीट पर ही भाजपा जीत दर्ज कर पाई है।
किशन कपूर के संसदीय क्षेत्र में भाजपा 13 से 5 पर गिरी
कांगड़ा संसदीय क्षेत्र से सांसद किशन कपूर के गढ़ में भी भाजपा की परफॉर्मन्स खराब रही है। यहाँ की 17 विधानसभा क्षेत्रों में से 12 पर कांग्रेस तो पांच पर भाजपा की जीत हुई है। भाजपा सिर्फ नूरपुर, डलहौज़ी, सुलह, चुराह और कांगड़ा में अपनी साख बचाने में कामयाब हुई है। इसके अतिरिक्त इंदौरा, फतेहपुर, ज्वाली, ज्वालामुखी, नगरोटा बगवां, शाहपुर, धर्मशाला, पालमपुर, बैजनाथ, जयसिंहपुर, चम्बा और भटियात में भारतीय जनता पार्टी को हार का मुँह देखना पड़ा है। कांगड़ा संसदीय क्षेत्र में भाजपा के दो मंत्रियों को भी हार का मुँह देखना पड़ा है। फतेहपुर से पूर्व मंत्री राकेश पठानिया तो शाहपुर से मंत्री सरवीण चौधरी की हार हुई है। साल 2017 के चुनाव में कांगड़ा संसदीय क्षेत्र की 13 सीटें भाजपा की झोली में गई थी जबकि चार पर कांग्रेस को जीत मिली थी परन्तु इस बार स्थिति पूरी तरह बदल गई।
सुरेश कश्यप के संसदीय क्षेत्र में भाजपा सबसे कमजोर
शिमला संसदीय क्षेत्र से सुरेश कश्यप सांसद है। सुरेश कश्यप सिर्फ सांसद ही नहीं भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष भी है, मगर खुद प्रदेश अध्यक्ष के संसदीय क्षेत्र में भाजपा की दुर्गति सबसे अधिक हुई है। शिमला की 13 सीटों पर कांग्रेस की जीत हुई तो भाजपा को सिर्फ तीन सीटें मिल पाई है जबकि एक निर्दलीय विधायक जीत कर विधानसभा पहुंचे है। प्रदेश के चारों संसदीय क्षेत्रों में से शिमला संसदीय क्षेत्र में पार्टी सबसे कमजोर रही। शिमला संसदीय क्षेत्र में जिला सोलन की पांच सीटें आती है और ये सभी पांच सीटें भाजपा हारी है। इनमें से कसौली और दून सीट पर 2017 में भाजपा जीती थी, लेकिन ये दो सीटें भी भाजपा हार गई। इनमें कसौली सीट से मंत्री राजीव सैजल को शिकस्त मिली है। वहीं सोलन सीट पर भाजपा लगातार तीसरी बार हारी है। अर्की और नालागढ़ में तो भाजपा तीसरे स्थान पर रही है। नालागढ़ में भाजपा के बागी केएल ठाकुर ने जीत दर्ज की है। इस तरह संसदीय क्षेत्र के तहत जिला सिरमौर की सभी पांच सीटें आती है। यहाँ भी भाजपा को सिर्फ दो सीटें मिली है, जबकि तीन पर कांग्रेस का कब्जा रहा। ये सुरेश कश्यप का गृह जिला है। 2017 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने नाहन, पच्छाद और पांवटा साहिब सीट जीती थी और कांग्रेस को शिलाई और रेणुका जी में विजय मिली थी। इस बार भाजपा पच्छाद और पांवटा साहिब सीट पर कब्जा रखने में तो कामयाब यही लेकिन नाहन सीट हार गई। नाहन से पार्टी के दिग्गज नेता और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष डॉ राजीव बिंदल को शिकस्त मिली है। वहीं रेणुका जी और शिलाई सीट पर कांग्रेस का कब्जा बरकरार रहा। संसदीय क्षेत्र शिमला के तहत जिला शिमला की सात सीटें आती है। जिला की रामपुर के अतिरिक्त सभी सीटें शिमला संसदीय क्षेत्र में ही आती है। इनमें से 6 पर कांग्रेस को जीत मिली है और सिर्फ एक सीट भाजपा के खाते में गई है। वहीं 2017 की बात करें तो भाजपा शिमला शहरी, जुब्बल कोटखाई और चौपाल में जीती थी, पर इस बार सिर्फ चौपाल सीट ही भाजपा के खाते में आई। वहीं शिमला ग्रामीण. कसुम्पटी, और रोहड़ू सीट पर कांग्रेस का कब्ज़ा बरकरार रहा। ठियोग सीट सीपीआईएम के कब्जे में थी, जिस पर इस बार कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष कुलदीप राठौर जीते है। शिमला संसदीय क्षेत्र से जयराम कैबिनेट में तीन मंत्री थे, सुरेश भारद्वाज, डॉ राजीव सैजल और सुखराम चौधरी। इनमें से सिर्फ सुखराम चौधरी को ही जीत मिली है। भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और पूर्व विधानसभा अध्यक्ष डॉ राजीव बिंदल भी नाहन से चुनाव हार गए। वहीं हाटी फैक्टर का लाभ भी भाजपा को ज्यादा मिलता नहीं दिखा। हाटी बाहुल शिलाई और रेणुका जी सीट पर कांग्रेस को ही जीत मिली।
प्रतिभा सिंह के संसदीय क्षेत्र में भाजपा भारी
हिमाचल के तीन संसदीय क्षेत्रों में भाजपा का कब्जा है और सिर्फ मंडी संसदीय क्षेत्र में कांग्रेस की सांसद है और 2022 के विधानसभा चुनाव में मंडी ही एक मात्र ऐसा संसदीय क्षेत्र है जहाँ कांग्रेस पिछड़ी है। मंडी से सांसद प्रतिभा सिंह प्रदेश कांग्रेस की अध्यक्ष भी है मगर उनके अपने विधानसभा क्षेत्र में ही कांग्रेस पिछड़ गई है। मंडी में भारतीय जनता पार्टी को 12 तो कांग्रेस को पांच सीटों पर जीत मिली है। इस संसदीय क्षेत्र के अंतर्गत मंडी जिला की कुल 9 सीटें आती है और 9 की 9 सीटों पर भारतीय जनता पार्टी को जीत मिली है। माना जा रहा है कि मंडी के लोगों ने मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर के चेहरे पर वोट डाले है। मंडी की जनता को उम्मीद थी कि अगर भाजपा की सरकार बनती है तो मुख्यमंत्री एक बार फिर से मंडी जिला से ही होगा। मंडी जिला के लोगों ने मंडी में तो भाजपा को जीता दिया परन्तु यहाँ से बाहर भाजपा कुछ ख़ास परफॉर्म नहीं कर पाई। इसके अतिरिक्त बंजार, आनी और भरमौर विधानसभा क्षेत्र में भी भाजपा को जीत और कांग्रेस को हार मिली है। कांग्रेस पार्टी मंडी संसदीय क्षेत्र की सिर्फ कुल्लू , मनाली, लाहौल स्पीति, रामपुर और किन्नौर में ही कांग्रेस को जीत मिली है। यहाँ ये भी ध्यान रखना होगा की प्रतिभा सिंह को मंडी संसदीय उपचुनाव के दौरान 9 विधानसभा क्षेत्रों से लीड मिली थी, जबकि इस बार सिर्फ पांच में ही कांग्रेस हावी रही। हालांकि 2017 के नतीजों से तुलना करें तो तब संसदीय क्षेत्र में कांग्रेस को चार सीटें मिली थी, जो अब बढ़कर पांच हो गई है।
