फूड प्रोसेसिंग यूनिट: सीएम से पीएम तक सबने किया वादा
शिमला संसदीय क्षेत्र में किसान लम्बे समय से टमाटर आधारित फूड प्रोसेसिंग प्लांट की मांग करते आ रहे है। अमूमन हर चुनाव में सियासी दल फूड प्रोसेसिंग प्लांट का वादा करते है और ऐसा दशकों से होता आ रहा है, किन्तु अब तक क्षेत्र को फूड प्रोसेसिंग प्लांट नहीं मिला। टमाटर का समर्थन मूल्य तय करने और कोल्ड स्टोर की मांग भी किसान संगठन लम्बे वक्त से करते आ रहे है पर इस दिशा में भी किसानों को आश्वासन के सिवाय कुछ नहीं मिला। शिमला संसदीय क्षेत्र के तहत आने वाले जिला सोलन और सिरमौर में टमाटर की अच्छी पैदावार होती है, विशेषकर जिला सोलन में। ये ही कारण है कि सोलन को सिटी ऑफ रेड गोल्ड भी कहा जाता है। यहाँ टमाटर हजारों किसान परिवारों के लिए जीव यापन का जरिया है, पर शायद अन्य तंत्र के लिए महज राजनीति की वस्तु भर है। सोलन में टमाटर आधारित फूड प्रोसेसिंग यूनिट करीब ढ़ाई दशक से चुनावी मुद्दा है। अमुमन हर चुनाव में किसान वोट हतियाने के लिए नेता फूड प्रोसेसिंग यूनिट का ख्वाब दिखाते है, वोट बटोरते है और फिर भूल जाते है। खासतौर से लोकसभा पहुंचने के लिए टमाटर फैक्टर का भरपूर इस्तेमाल होता आया है। वर्तमान मुख्यमंत्री से लेकर प्रधानमंत्री तक इस दिशा में पहल करने की बात कह चुके है। लंबी समय से विभिन्न किसान संगठन भी इसकी मांग करते आ रहे है, लेकिन बात कभी कागजों से आगे नहीं बढ़ी।
बहरहाल बात करते है वर्तमान स्थिति की। 2017 के विधानसभा चुनाव के बाद प्रदेश में भाजपा की सरकार बनी और जयराम ठाकुर मुख्यमंत्री बने। जयराम कैबिनेट में कृषि मंत्रालय का भार दिया गया डॉ रामलाल मार्कंडेय को। मंत्री बनने के बाद वर्ष 2018 की शुरुआत में डॉ रामलाल मार्कंडेय सोलन आएं और इस दौरान उन्होंने टमाटर प्रोसेसिंग यूनिट लगाने की घोषणा की। इसके बाद जुनती गांव में यूनिट लगाने के लिए कृषि विभाग व एपीएमसी सोलन के अधिकारियों ने भूमि का निरीक्षण किया, लेकिन ग्रामीणों ने यूनिट लगाने का विरोध किया। इसके बाद करीब एक साल तक सरकार को प्लांट लगाने के लिए जमीन नहीं मिली। वर्ष 2020 में सरकार को कालका-शिमला हाईवे पर धर्मपुर से एक किमी की दूरी पर दोसड़का में वन विभाग की भूमि मिली और इसका निरीक्षण भी किया गया। निरीक्षण किये एक साल से अधिक का समय बीत चुका है, पर टोमेटो प्रोसेसिंग यूनिट कब स्थापित होगा इसको लेकर अभी भी संशय बरकरार है।
पीएम बनने के बाद मोदी ने जिक्र भी नहीं किया
देश के वर्तमान रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह वर्ष 2007 में सोलन में प्रचार करने पहुंचे थे। तब उन्होंने शहर के पुराने बस अड्डे पर अपनी चुनावी जनसभा में कहा था कि भाजपा को जिला की पांचों सीटें मिली तो सोलन में फूड प्रोसेसिंग यूनिट की स्थापना की जाएगी। पांचों विस सीटों पर भाजपा को भारी मतों से जीत मिली और प्रदेश में भाजपा की सरकार भी बनी, लेकिन नहीं बना तो बस फूड प्रोसेसिंग यूनिट। ऐसे ही कई बार टमाटर किसानों को झूठे वादों से छला गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी वर्ष 2014 में सोलन रैली में किसानों से टमाटर के समर्थन मूल्य व फूड प्रोसेसिंग प्लांट लगाने की बात कह चुके है। तब वे प्रधानमंत्री नहीं थे, प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार थे। खेर, नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद उम्मीद जगी कि शायद सरकार टमाटर किसानों की सुध लेगी। परंतु कुछ नहीं बदला। दिलचस्प बात ये है कि 2019 में जब नरेंद्र मोदी बतौर प्रधानमंत्री सोलन आये तो उन्होंने न फूड प्रोसेसिंग प्लांट का जिक्र किया और न ही टमाटर के समर्थन मूल्य का।
मवेशियों को खिलाने पड़ते है टमाटर
उल्लेखनीय है कि संसदीय क्षेत्र शिमला का प्रदेश के कुल टमाटर उत्पादन का करीब 70 फीसदी योगदान है। यहां के हजारों परिवार जीवन यापन के लिए टमाटर खेती पर आश्रित है। विडंबना ये है कि अधिक उत्पादन की स्थिति में किसानों को टमाटर का उचित मूल्य नहीं मिल पाता। टमाटर को लम्बे वक्त तक संभाल कर नहीं रखा जा सकता और ऐसे में इसके जल्द खराब होने की अधिक सम्भावना रहती है। कई मर्तबा तो तैयार फसल को खेतों से मंडी तक पहुंचाने की लागत भी कीमत से कम होती है। ऐसी स्तिथि में किसानों को टमाटर मवेशियों को खिलाने पड़ते है। इसी के चलते किसान लम्बे समय से टमाटर के समर्थन मूल्य और फूड प्रोसेसिंग यूनिट की मांग कर रहे है। फूड प्रोसेसिंग यूनिट लगने से टमाटर की मांग हमेशा बरकरार रहेगी और किसानों को उचित मूल्य मिल पायेगा।
बॉर्डर पर तनाव, किसानों का नुकसान
गौर हो कि सोलन से टमाटर आमतौर पर पाकिस्तान एक्सपोर्ट किया जाता है। इसी के चलते किसानों को अधिक उत्पादन होने पर राहत मिलती है। साथ ही उन्हें उचित मूल्य भी मिलता है। किन्तु अगर बॉर्डर पर तनाव हो तो व्यापारी एक्सपोर्ट से परहेज करते है या एक्सपोर्ट पर रोक लगा दी जाती है, जिसका खामियाजा किसानों को भी भुगतना पड़ता है। ऐसे में स्थानीय फूड प्रोसेसिंग यूनिट होने से किसानो का आर्थिक नुक्सान कम किया जा सकता है।
सोलन - सिरमौर से होता है 70 फीसदी उत्पादन
बता दें कि सोलन में बड़े पैमाने पर टमाटर का उत्पादन होता है। जिला सोलन में करीब पैंतालीस सौ हेक्टेयर भूमि पर टमाटर की खेती की जाती है। सोलन की हैप्पी वैली यानी कायलर, घट्टी, कोठी, बैरटी, जगातखाना और देवठी के अलावा जौणाजी, नौणी, सलोगड़ा, मनसार, कंडाघाट, चायल, वाकनाघाट, छावशा, प्राथा, बनासर के अलावा गंभरपुल, हरिपुर, कुठाड़, कंडा, हुड़ंग, कैंथड़ी, डगशाई क्षेत्र में बहुतायात में टमाटर का उत्पादन होता है। यहां टमाटर जून में मंडी तक पहुंचना शुरू हो जाता है और बरसात के बाद तक इसका सीजन बरकरार रहता है। बरसात के दिनों में जब देश के अन्य राज्यों में जल भराव से फसल बर्बाद होती है तो हिमाचल के टमाटर की मांग देश भर में बढ़ जाती है। प्रदेश के कुल टमाटर उत्पादन का करीब 40 फीसदी से अधिक अकेले सोलन शहर से आता है। वहीं संसदीय क्षेत्र के एक अन्य जिला सिरमौर का योगदान कुल उत्पादन का करीब 30 फीसदी है।
प्लांट लगा तो बढ़ेगी मार्केट कमेटी की आय
सोलन सब्जी मंडी में हर वर्ष औसतन पांच से सात लाख क्रेट टमाटर पहुंचता है। इसमें 80 फीसद टमाटर बी व सी ग्रेड का होता है। साइज छोटा होने की वजह से किसानों को यह तीन से चार रुपये प्रति किलो तक बेचना पड़ता है। प्रत्येक वर्ष मंडी में करीब 50 करोड़ रुपये से अधिक का टमाटर का कारोबार होता है। टमाटर प्रोसेसिंग यूनिट लगने के बाद मार्केट कमेटी की आय में भी वृद्धि होगी।
अब यहाँ फंसा है पेंच
मार्केट कमेटी सोलन की ओर से धर्मपुर में पांच बीघा भूमि का चयन कर लिया है। पर इस भूमि को अभी तक मार्केट कमेटी को स्थानांतरित नहीं किया गया है। दरअसल टोमेटो प्रोसेसिंग प्लांट के लिए जिस भूमि का चयन किया गया है वो वन विभाग की है। हालांकि प्लांट स्थापित करने के लिए निरीक्षण भी किया जा चुका है। वर्तमान में यह मामला फारेस्ट क्लीयरेंस अप्रूवल के लिए अटका है, जहाँ से अप्रूवल मिलने के बाद टेंडर की प्रक्रिया होगी, लेकिन इसमें अभी भी काफी समय लग सकता है।
सत्ता में रहते कांग्रेस ने भी कुछ नहीं किया
भले ही वर्तमान में केंद्र और प्रदेश दोनों जगह भाजपा की सरकार हो लेकिन कांग्रेस भी लम्बे समय तक सत्ता में रही है। हकीकत ये है की आज भाजपा पर सवाल उठा रही कांग्रेस ने भी सत्ता में रहते इस दिशा में कुछ नहीं किया। वर्तमान में सोलन विधायक कर्नल धनी राम शांडिल दो बार शिमल संसदीय क्षेत्र से सांसद रहे है और लगातार दूसरी बार सोलन से विधायक बने है। शांडिल प्रदेश की पिछली सरकार में मंत्री भी थे। इसी तरह वर्तमान में शिमला से सांसद सुरेश कश्यप ने भी फ़ूड प्रोसेसिंग प्लांट का वाद किया था लेकिन अब तक कुछ नहीं हुआ। भाजपा नेता और पूर्व सांसद रहे वीरेंद्र कश्यप को अर्से तक चुनाव में इस मुद्दे को भुनाते रहे लेकिन सांसद रहते कभी उनके प्रयास नहीं दिखे।
किसानों को लाभ देने में असफल रही भाजपा : शांडिल
सोलन के विधायक कर्नल धनी राम शांडिल का कहना है कि टमाटर प्रोसेसिंग यूनिट शुरू करवाने में भाजपा फेल रही है। सरकार को बने चार साल बीत चुका है। केंद्र में भी भाजपा की ही सरकार है, इसके बावजूद अभी तक यूनिट शुरू नहीं हो पाया। किसानों को लेकर भाजपा ने सत्ता में आने से पूर्व बड़ी-बड़ी बातें की थी लेकिन उन्हें पूरा नहीं किया। सोलन - सिरमौर के किसानों को इससे भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। निश्चित तौर पर यह किसानों के साथ एक बड़ा छल भाजपा ने किया है।
प्रदेश सरकार कर रही काम
टमाटर आधारित फ़ूड प्रोसेसिंग यूनिट सोलन -सिरमौर के किसानों की आर्थिकी सुधारने में बड़ा कदम होगा और प्रदेश की सरकार इस दिशा में कदम उठा रही है। केंद्र की मोदी सरकार किसान हितेषी है और किसान हित में हरसंभव कदम उठाये जा रहे है। जल्द नतीजा सामने होगा।
- सुरेश कश्यप, सांसद शिमला संसदीय क्षेत्र।
आदतन तुम ने कर दिए वादे, आदतन हम ने ए'तिबार किया
सोलन व आसपास के क्षेत्रों में टमाटर को लाल सोना कहा जाता है। ऐसा इसलिए है क्यूंकि टमाटर ने हज़ारों परिवारों की आर्थिकी बदली है। 1940 के दशक में स्थानीय किसान डीसी मेहता ने सोलन में टमाटर की खेती शुरू की थी और उनकी ये पहल एक क्रांतिकारी कदम साबित हुई। आज सोलन को सिटी ऑफ़ रेड गोल्ड भी कहा जाता है। प्रदेश के कुल टमाटर उत्पादन का करीब 40 फीसदी से अधिक हिस्सा सोलन से आता है, वहीँ जिला सिरमौर का योगदान करीब 30 फीसदी है। शायद ये ही कारण है कि चाहे चुनाव विधानसभा का हो या लोकसभा का, नेता टमाटर किसानों को साधने का कोई प्रयास नहीं छोड़ते। पर विडम्बना ये है कि चुनाव के बाद ये वादे पूरे नहीं होते।
4 निर्वाचन क्षेत्रों में चलेगा टमाटर फैक्टर
टमाटर का मुद्दा किसी एक निर्वाचन क्षेत्र तक सीमित नहीं है। सोलन निर्वाचन क्षेत्र के साथ-साथ मुख्य तौर पर अर्की, कसौली और पच्छाद निर्वाचन क्षेत्रों में टमाटर की अच्छी पैदावार होती है। ऐसे में कम से कम इन चार विधानसभा क्षेत्रों में ये एक महत्वपूर्ण मुद्दा होगा।
- टमाटर आधारित फूड प्रोसेसिंग यूनिट की मांग
- टमाटर का समर्थन मूल्य तय करने की मांग
- कोल्ड स्टोरेज की मांग
