सवर्ण आयोग गठन : सब कुछ नाम में ही रखा है !
- अधिसूचना जारी होने के बाद भी असंतुष्ट, अधिनियम बनाने की मांग
विलियम शेक्स्पीयर ने कहा था कि 'नाम में क्या रखा है'। पर देवभूमि क्षत्रिय संगठन का मानना है कि 'सब कुछ नाम में ही रखा है', शायद इसीलिए प्रदेश सरकार द्वारा सामान्य वर्ग आयोग के गठन के बावजूद प्रदेश का सवर्ण समाज संतुष्ट नज़र नहीं आ रहा। हिमाचल प्रदेश में सामान्य वर्ग आयोग के गठन के बाद अब उसका संविधान और पूरी कार्यप्रणाली निर्धारित कर दी गई है। इस संबंध में सामान्य प्रशासन विभाग ने अधिसूचना जारी कर दी है। सामान्य वर्ग आयोग के गठन की अधिसूचना के बावजूद क्षत्रिय संगठनों का गुस्सा शांत होता नहीं दिखाई दे रहा। देवभूमि क्षत्रिय संगठन एवं देवभूमि सवर्ण मोर्चा के पदाधिकारियों का मानना है कि सरकार ने ये अधिसूचना जारी कर प्रदेश के सबसे बड़े समाज को धोखा दिया है। सवर्ण आयोग के नाम पर सामान्य वर्ग आयोग गठित किया गया है। उनका कहना है कि सवर्ण आयोग गठित किया जाना चाहिए था लेकिन सरकार ने सामान्य वर्ग आयोग गठित किया है, जिसका सवर्ण वर्ग विरोध करता है।
विरोध कर रहे संगठनों को नाम के अलावा एक अन्य आपत्ति भी है। देवभूमि क्षत्रिय संगठन के अध्यक्ष रुमीत सिंह ठाकुर का मानना है कि सरकार द्वारा सामान्य वर्ग आयोग के गठन की अधिसूचना जारी की गई है जबकि प्रदेश भर के लोग इसे अधिनियम बनाने की मांग कर रहे हैं। रुमीत ने कहा की शीतकालीन सत्र के दौरान मुख्यमंत्री ने तपोवन में इस बात की घोषणा की थी। इसमें सामान्य वर्ग आयोग को अधिनियम के दायरे में लाने का आश्वासन दिया गया था। इसके लिए सरकार ने तीन माह की मोहलत मांगी थी और अब तीन माह का समय पूरा होने वाला है तो सरकार ने इस बारे में अधिसूचना जारी कर दी है। इस अधिसूचना में एक अध्यक्ष और दो सदस्यों की बात कही गई है। अध्यक्ष की मर्जी से आयोग की बैठक होगी। आयोग का अध्यक्ष यदि पूरा साल बैठक नहीं करता है तो प्रदेश भर के सामान्य वर्ग के लोगों को इस आयोग का कोई लाभ नहीं होगा। उनका मानना है की प्रदेश सरकार ने यह अधिसूचना 16 मार्च से प्रस्तावित आंदोलन को टालने के लिए की है। पर मांग अब भी बरकरार है और चेतावनी भी दी गई है कि यदि सरकार सामान्य वर्ग आयोग ( सवर्ण आयोग ) को अधिनियम के दायरे में नहीं लाती है तो 16 मार्च को उग्र प्रदर्शन होगा।
