हेलीकॉप्टर क्रैश में जीवित बचे ग्रुप कैप्टन वरुण सिंह का हुआ निधन
8 दिसंबर को तमिलनाडु में वायुसेना हेलिकॉप्टर क्रैश हादसे में एकमात्र जीवित बचे ग्रुप कैप्टन वरुण सिंह का आज निधन हो गया। उनका बेंगलुरु के कमांड अस्पताल में इलाज चल रहा था। ग्रुप कैप्टन वरुण सिंह अस्पताल में 7 दिन जिंदगी और मौत के बीच जंग रहे थे। इस बात की जानकारी भारतीय वायु सेना ने ट्वीट के दी। भारतीय वायुसेना ने ट्वीट कर कहा ,'भारतीय वायुसेना को बहादुर ग्रुप कैप्टन वरुण सिंह के निधन की सूचना देते हुए गहरा दुख हुआ है, जिनकी आज सुबह 8 दिसंबर को हेलिकॉप्टर दुर्घटना में हुई चोटों के कारण मृत्यु हो गई। भारतीय वायुसेना गहरी संवेदना व्यक्त करता है और शोक संतप्त परिवार के साथ मजबूती से खड़ा है।'' गौरतलब है कि तमिलनाडु के कुन्नूर के पास 8 दिसंबर को वायुसेना का एक हेलीकॉप्टर दुर्घटनाग्रस्त हो गया था, जिसमें चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल बिपिन रावत, उनकी पत्नी मधुलिका और हिमाचल प्रदेश के विवेक समेत 13 लोगों की मौत हो गई थी। दुर्घटना में ग्रुप कैप्टन अकेले जीवित व्यक्ति बचे थे। वे गंभीर रूप से घायल थे और अस्पताल में जिंदगी और मौत के बीच झूल रहे थे लेकिन अफसोस वे बच नहीं सके।
कौन है ग्रुप कैप्टन वरुण सिंह
कैप्टन वरुण उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले के रुद्रपुर तहसील के कन्हौली गांव के रहने वाले थे। पिता कृष्ण प्रताप सिंह सेना में कर्नल पद से रिटायर्ड हुए थे। वरुण सिंह का जन्म दिल्ली में हुआ था। उनकी उम्र 42 साल थी। उनके पिता सेना में तैनात थे इसलिए वो जहाँ-जहाँ तैनात थे, उनकी शिक्षा वहाँ-वहाँ हुई।वर्तमान में कैप्टन वरुण के माता-पिता भोपाल में रह रहे हैं वरुण के छोटे भाई तनुज सिंह मुम्बई में नेवी में पोस्ट में हैं। कैप्टन वरुण की वर्तमान तैनाती वेलिंगटन, तमिलनाडु में थी, जहाँ वो अपनी पत्नी गीतांजली, बेटे रिद रमन और बेटी आराध्या के साथ रह रहे थे। ग्रुप कैप्टन वरुण सिंह ग्रुप कैप्टन अभिनंदन वर्धमान के बैचमैट रहे हैं। अभिनंदन वर्धमान ने ही 27 फरवरी 2019 को भारत की सीमा में घुसे पाकिस्तानी विमानों को खदेड़ा था। साल 2020 में एक उड़ान के दौरान बड़े टेक्निकल फॉल्ट की चपेट में आने के बाद अपने विमान को हैंडल करने के अदम्य साहस के लिए उन्हें 15 अगस्त 2021 को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने शौर्य चक्र से सम्मानित किया था। उन्होंने अपने तेजस फाइटर को मिड-एयर इमरजेंसी के बावजूद 10 हजार फीट की ऊंचाई से सुरक्षित उतारा था।
