खजाना ठन - ठन गोपाल और जयराम सब पर मेहरबान
-जयराम लाएं चुनावी वर्ष में 51 हजार करोड़ का शगुनी बजट
खजाना ठन - ठन गोपाल और सरकार सब पर मेहरबान। ये ही जयराम ठाकुर के पांचवें बजट का सार है। बहरहाल बीते शुक्रवार को मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर अपना पांचवा बजट पेश कर चुके है और इसके विश्लेषण का सिलसिला जारी है। जैसा अपेक्षित था विपक्ष को बजट कोरी घोषणाओं का पुलिंदा लगा, तो सत्ता पक्ष ने इसको 'सबके विकास' का बजट बताया। सियासत से इतर अगर मोटे तौर पर बजट का आंकलन किया जाए तो मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने चुनावी वर्ष में एक संतुलित बजट देने का प्रयास किया है। कोशिश की गई है कि हर वर्ग को बजट से कुछ राहत जरूर मिले। हालांकि आर्थिक सुधारों को लेकर बजट में सरकार की कोई दिशा नहीं दिखी, जो इस बजट की मुख्य खामी है। जयराम ठाकुर ने 51365 करोड़ रुपये का बजट प्रस्तुत किया है। 51 हज़ार करोड़ से अधिक के इस बजट में जयराम ठाकुर ने कोशिश की है कि हर वर्ग को राहतों का शगुन दिया जा सकें। जाहिर है उनकी निगाहें मिशन रिपीट पर टिकी है और इस बजट के जरिये चुनावी बिसात बिछाई गई है। पर प्रदेश पर बढ़ते कर्ज का बोझ निसंदेह सरकार की राह में सबसे बड़ा रोड़ा है। बजट में सरकार ने कई बड़ी घोषणाएं तो कर दी, पर उनको अमल में लाने के लिए रोकड़ा कहाँ से और कैसे आएगा, इस पर स्पष्टता नहीं है। या यूँ कहे, स्पष्ट है कि जयराम सरकार के जहन में केंद्र की मदद और नया कर्ज ही एकमात्र विकल्प है। प्रदेश की आय बढ़ाने के लिहाज से कोई स्पष्ट कदम इस बजट में नहीं दिखता।
सरकारी खजाने की बात करें तो खजाना खाली है और घाटे के बजट में भी सरकार ने हर वर्ग को साधने की कोशिश की है। कोई नया कर नहीं लगाया गया है। कुल अनुमानित राजस्व घाटा 3903 करोड़ है, जबकि सकल घरेलु उत्पाद ( GDP ) का 4 .98 प्रतिशत राजकोषीय घाटा ( Fiscal Deficit ) है। किसी भी अर्थव्यवस्था के लिए 3 प्रतिशत से अधिक राजकोषीय घाटा अच्छा संकेत नहीं माना जाता। वित्त वर्ष 2022 -23 के लिए जो 'सबके विकास' का बजट मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने पेश किया है उसे लागू करने के लिए करीब 9600 करोड़ का नया कर्ज लेना होगा। अगर मौजूदा करीब 63 हजार करोड़ के कर्ज में इसे जोड़ा जाएं तो वित्त वर्ष खत्म होते -होते हिमाचल पर करीब 72 हजार करोड़ से अधिक का कर्ज होगा। अगर हिमाचल की मौजूदा आबादी को करीब 70 लाख माना जाएं तो प्रत्येक हिमाचली पर करीब एक लाख रुपये का कर्ज होगा।
वर्ष कर्ज
2018-19 50773 करोड़
2019-20 56107 करोड़
2020-21 60993 करोड़
चालु वित्त वर्ष लगभग 63 हजार करोड़
कोशिश : कर राजस्व में 15 प्रतिशत वृद्धि का लक्ष्य
आम तौर पर बजट में टैक्स से लेकर अन्य संसाधनों से कर राजस्व में 10 फीसद बढ़ोतरी करने का लक्ष्य रखा जाता है, किन्तु प्रदेश में इस बार नई पहल की है। सरकार के प्रयास से प्रदेश के कर राजस्व में कुछ बढ़ोतरी हुई है। इसे जारी रखते हुए सरकार ने 15 फीसद वृद्धि करने का फैसला लिया है। ऐसे में 2022-23 में नौ हजार 282 करोड़ रुपये कर राजस्व के रूप में प्राप्त होने की संभावना है। कर राजस्व में 15 प्रतिशत वृद्धि अनुमानित है। हालांकि बजट में सरकार ने कर का बोझ नहीं बढ़ाया है।
100 में से 41 रुपये वेतन -पेंशन पर, 21 रुपये ऋण -ब्याज पर होंगे व्यय :
बजट अनुमान के अनुसार 100 रुपये में से सरकार का 41 रुपये वेतन और पेंशन पर व्यय होगा। जबकि 21 रुपये ऋण और ब्याज अदायगी पर खर्च होंगे। सरकार का पूंजीगत व्यय ( Capital Expenditure ) और अन्य गतिविधियों पर खर्च शेष 29 रुपये में से होंगे।
वेतन 26 रुपये
पेंशन 15 रुपये
ब्याज अदायगी 10 रुपये
ऋण अदायगी 11 रुपये
स्वायत्त संस्थानों के लिए ग्रांट 9 रुपये
अन्य 29 रुपये
डेढ़ लाख लोगों क बढ़ा मानदेय, जन प्रतिनिधियों पर भी कृपा :
इस बजट में सरकार ने करीब डेढ़ लाख लोगों का मानदेय बढ़ाया है। यानी प्रदेश की कुल आबादी के लिहाज से देखा जाएं तो करीब दो प्रतिशत लोगों का मानदेय में इजाफा किया गया है। जिनका मानदेय बढ़ाया गया है उनमें करीब चालीस हजार जनप्रतिनिधि भी शामिल है। जन प्रतिनिधियों पर सरकार की मेहरबानी कोई नई बात नहीं है। राज्य सरकार पूर्व विधायकों पर मेहरबान दिख रही है और उन्हें चार प्रतिशत ब्याज पर वाहन व भवन निर्माण के लिए 30 लाख कर्ज देने की व्यवस्था की जा रही है। जबकि पहले 15 लाख ही कर्ज मिलता था। अब अगर विधायक रहते इन्होंने 65 लाख से कम कर्ज लिया होगा तो 15 लाख और मिल सकेंगे। यानी कुल 30 लाख मिलेंगे। इस समय प्रदेश में करीब 130 पूर्व विधायक हैं। वहीं, इससे पहले सरकार द्वारा विधानसभा अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, मंत्रियों और विधायकों को एक करोड़ देने की व्यवस्था की गई थी। अजीब है लेकिन खुद कर्ज में डूबती जा रही सरकार यह कर्ज देगी और इसमें सालाना सिर्फ चार प्रतिशत ब्याज देना होगा।
अब इतना होगा जन प्रतिनिधियों का मानदेय :
पद बढ़ोतरी प्रतिमाह मानदेय (रुपये में)
नगर निगम महापौर 3000 15000
उपमहापौर 1500 10000
पार्षद 1000 6500
नगर परिषद अध्यक्ष 1500 8000
उपाध्यक्ष 1000 6500
पार्षद 500 3000
नगर पंचायत अध्यक्ष 1000 6500
उपाध्यक्ष 1000 5000
पार्षद 500 3000
पद बढ़ोतरी प्रतिमाह मानदेय (रुपये में)
जिला परिषद अध्यक्ष 3000 15000
उपाध्यक्ष 2000 10000
सदस्य 1000 6000
पंचायत समिति अध्यक्ष 2000 9000
उपाध्यक्ष 1500 6500
सदस्य 1000 5500
पंचायत प्रधान 1000 5500
उपप्रधान 500 3500
सदस्य (प्रति बैठक ) 50 300
बजट : वित्तीय वर्ष 2022 -23
कुल बजट : 51,365 करोड़
राजस्व प्राप्तियां : 36, 375 करोड़
राजस्व व्यय : 40, 278 करोड़
राजकोषीय घाटा : 9, 602 करोड़
विकासात्मक परिव्यय : 12, 921 करोड़
राजस्व घाटा : 3, 903 करोड़
10 नई योजनाओं की सौगात :
- मुख्यमंत्री बाल सुपोषण योजना
- मुख्यमंत्री असहाय बाल पुनर्वास योजना
- मुख्यमंत्री महिला सशक्तिकरण योजना
- श्रेष्ठ शिक्षा गुणवत्ता योजना
- मुख्यमंत्री विद्यार्थी कल्याण योजना
- बाल प्रतिभा छात्रवृति योजना
- मुख्यमंत्री शोध प्रोत्साहन योजना
- कौशल आपके द्वार
- मुख्यमंत्री मोबाइल क्लीनिक योजना
- गरुड़ योजना
इसके लिए जयराम को जय श्री राम :
बढ़ाया सामाजिक सुरक्षा कवच का दायरा :
बजट में मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने सामाजिक सुरक्षा पेंशन की राशि बढ़ाकर दिव्यांग, एकल नारी, वृद्ध, विधवाओं को बड़ा तोहफा दिया है। निसंदेह यह ऐसा वर्ग है, जिन्हें इस आर्थिक सहायता से आवश्यक राहत मिलेगी। साथ ही अब प्रदेश में 60 वर्ष से अधिक के सभी लोगों को बिना आय सीमा के ओल्ड आगे पेंशन मिलेगी। माना जा रहा है कि प्रदेश में 2022-23 के दौरान करीब सात लाख जरूरतमंदों को सामाजिक सुरक्षा पेंशन का लाभ मिलेगा। इस पर 1300 करोड़ रुपये खर्च होंगे, जबकि कांग्रेस के शासन में सामाजिक सुरक्षा पेंशन पर 500 करोड़ से कम राशि खर्च होती थी।
SC-ST हेतु ऋण सेटलमेंट पॉलिसी का ऐलान :
बजट में मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति लोगों द्वारा फाइनेंशियल कॉरपोरेशन से लिए गए ऋण की वन टाइम सेटलमेंट के लिए पॉलिसी का ऐलान किया है। इसके लिए 12 करोड़ का प्रावधान किया गया है।
खिलाड़ियों की डाइट-मनी में बढ़ोतरी :
बजट में खिलाड़ियों की डाइट-मनी 120 रुपए से बढ़ाकर 240 रुपए करने तथा प्रदेश से बाहर डाइट मनी 200 से बढ़ाकर 400 रुपए करने का ऐलान किया गया है।
25 और 50 रुपये वाली छात्रवृत्ति योजनाएं बंद :
जयराम सरकार ने अच्छा कदम उठाते हुए करीब तीन दशक बाद छात्रवृत्ति के तौर पर विद्यार्थियों को दी जा रही 25 से 50 रुपये की नाममात्र राशि वाली योजनाओं को बंद कर दिया है। इन योजनाओं को मर्ज कर मुख्यमंत्री विद्यार्थी कल्याण योजना नाम से प्रदेश सरकार ने नई योजना शुरू की है। इसके तहत स्कूलों में 1500 से 2000 रुपये सालाना तक अब नई योजना में छात्रवृत्ति दी जाएगी। जबकि कॉलेजों में 100 से 200 रुपये की छात्रवृत्ति योजना को पांच से छह हजार रुपये तक बढ़ा दिया है।
डॉक्टरों के 500 पद सृजित करने का ऐलान :
बजट में मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने चिकित्सा अधिकारियों के 500 नए पद सृजित करने का ऐलान किया है। इन पदों के सृजित होने के बाद प्रदेश में चिकित्सा अधिकारियों का कॉडर 2400 से बढ़कर लगभग 2900 हो जाएंगा।
30 हजार नई नौकरियां, कई वर्गों का बढ़ा मानदेय :
प्रदेश सरकार 30 हजार नौकरियां देगी। विभिन्न श्रेणियों के पद भरे जायेंगे। शिक्षा, स्वास्थ्य, विद्युत,जल शक्ति विभाग सहित अन्य में हजारों कर्मचारियों के पद भरे जाएंगे। इसके अलावा बजट में कई वर्गों का मानदेय बढ़ाने का ऐलान किया गया है। आंगनबाड़ी वर्कर्स का मानदेय 1700, आशा कार्यकर्ता 1825 रुपये तक बढ़ाया गया है। एसएमसी व आईटी शिक्षकों के एक हजार रुपये बढ़े है। सिलाई अध्यापिका, जल रक्षक व मिड डे मील वर्कर्स, पंचायत व राजस्व चौकीदार और नंबरदार के मानदेय में भी बढ़ोतरी की गई है।
अब मिलेंगे तीन निशुल्क सिलेंडर :
‘उज्जवला योजना’ और ‘गृहिणी सुविधा योजना’ को 2022-23 में भी जारी रखा जाएगा तथा इनका और विस्तार किया जाएगा। दोनों योजनाओं के लाभार्थियों को कनेक्शन के समय उपलब्ध करवाए गए मुफ्त सिलेंडर सहित तीन निशुल्क सिलेंडर उपलब्ध कराये जाएंगे। इसके लिए 70 करोड़ रुपये व्यय किये जाएंगे जो कि पिछले वर्ष की तुलना में 50 करोड़ रुपये अधिक हैं।
इन्हें मिलेगा GI TAG :
ज्योग्राफिकल इंडिकेशन एक्ट 1999 के अंतर्गत राज्यों के उत्पादों जैसे मंडी की सेपु बड़ी, किन्नौरी सेब, लाल चावल, हिमाचली टोपी, सिरमौरी लोहिया, हिमाचली धाम, मंडी के धातु शिल्प, हिमाचली वाद्य यंत्र तथा किन्नौरी आभूषण के पंजीकरण की प्रक्रिया आरम्भ की जाएगी।
