इंदौरा : चुनाव से पहले का चुनाव भाजपा के लिए असल चुनौती
बीते दिनों मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर इंदौरा निर्वाचन क्षेत्र में पहुंचे। जाहिर है चुनावी फिजा है तो खुद मुख्यमंत्री मोर्चे पर है और हर निर्वाचन क्षेत्र में पहुंच कर नब्ज टटोल रहे है। जैसे भाजपा के कार्यक्रमों में होता है इंदौरा में भी रंग खूब जमा, हर तरफ भगवा और खचाखच भरे पंडाल। तस्वीर तो कुछ ऐसी ही थी। मंच संचालन में हुई छोटी मोटी चूक और कुछ नेताओं के फीके भाषणों को छोड़ दिया जाएं, तो आयोजन अच्छा था। स्थानीय नेताओं के फीके भाषणों की कमी भी मुख्यमंत्री ने अपने सम्बोधन में विकास कार्यों की चाशनी डालकर पूरी कर दी। करीब 160 करोड़ के लोकार्पण और शिलान्यास का मुख्यमंत्री ने बखूबी जिक्र किया। पर सियासी नजर से देखे तो भाजपा की राह इस बार इंदौरा में मुश्किल ही दिख रही है। वर्तमान विधायक रीता धीमान और पूर्व विधायक रहे मनोहर धीमान में से किसी एक को चुनना भाजपा के मुश्किल होने वाला है। विधानसभा चुनाव से पहले का ये चुनाव पार्टी के लिए असल परीक्षा होगा। पिछली मर्तबा मनोहर धीमान भाजपा से टिकट की मांग कर रहे थे, पर तब पार्टी के कई बड़े नेताओं ने उन्हें मना कर जैसे तैसे भगवां लहराया। अब मनोहर धीमान फिर टिकट की कतार में है और पार्टी का एक तबका भी उनके साथ दिख रहा है। ऐसे में रीता धीमान की मुश्किलें बढ़ सकती है। यदि भाजपा फिर रीता धीमान को टिकट देती है तो मनोहर धीमान का क्या रुख होता है, ये देखना रोचक होगा। वैसे टिकट आवंटन में जरूर महिला फैक्टर का कुछ लाभ रीता को मिल सकता है। पर जानकार मानते है कि मनोहर भी इस बार चुनाव लड़ने के मूड में है, ये अलग बात है कि अब तक इस विषय पर खुलकर नहीं बोल रहे है।
2012 में मनोहर धीमान निर्दलीय जीतकर विधानसभा पहुंचे थे और कांग्रेस के एसोसिएट विधायक थे। पर चुनाव से कुछ माह पहले मनोहर भाजपा में शामिल हो गए। जब टिकट वितरण की बारी आई तो भाजपा ने मनोहर धीमान की जगह पर रीता धीमान को वरीयता दी। तब आलम ये था की मनोहर के साथ समर्थकों का हुजूम दिख रहा था, पर भाजपा के शीर्ष नेताओं के मनाने पर मनोहर मान गए। अब पांच साल बाद फिर मनोहर एक्शन में है। क्या भाजपा उन्हें इस बार टिकट देती है या नहीं, ये देखना दिलचस्प होने वाला है। यदि मनोहर इस बार भी टिकट न ले पाए तो उनके राजनीतिक भविष्य को लेकर भी प्रश्न उठना लाजमी होगा।
