नए जिलों की जिम्मेदारी जस्टिस धर्मचंद चौधरी को, जानिए कौन हैं
हिमाचल प्रदेश में नए जिलों और प्रशासनिक इकाइयों के गठन की प्रक्रिया तेज हो गई है। प्रदेश सरकार ने प्रशासनिक पुनर्गठन के लिए चार सदस्यीय आयोग का गठन किया है। इसकी अध्यक्षता हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के पूर्व न्यायाधीश रिटायर्ड जस्टिस धर्मचंद चौधरी करेंगे। आयोग को छह महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपनी होगी।
आयोग मौजूदा जिलों, उपमंडलों, तहसीलों और विकास खंडों की समीक्षा करेगा। इसके बाद नए जिले या अन्य प्रशासनिक इकाइयां बनाने, मौजूदा इकाइयों को विभाजित करने या जरूरत के अनुसार विलय करने को लेकर सिफारिशें दी जाएंगी। इसमें आबादी, भौगोलिक परिस्थितियां, लोगों की प्रशासन तक पहुंच और सरकार पर पड़ने वाले वित्तीय बोझ जैसे पहलुओं को ध्यान में रखा जाएगा।
कौन हैं जस्टिस धर्मचंद चौधरी?
जस्टिस धर्मचंद चौधरी का संबंध मंडी जिले के लोहरा गांव से है। उनका जन्म 12 मार्च 1958 को हुआ। उन्होंने शुरुआती शिक्षा लोहरा में, मैट्रिक हटगढ़ से, स्नातक की पढ़ाई कुल्लू से और एलएलबी हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय से 1983 में की। इसके बाद उन्होंने हिमाचल हाईकोर्ट में वकालत की और 1995 में अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश बने। वर्ष 2012 में उन्हें हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट का अतिरिक्त न्यायाधीश और 2014 में स्थायी न्यायाधीश नियुक्त किया गया।
धर्मचंद चौधरी का सीजेआई सूर्यकांत से भी खास पेशेवर कनेक्शन रहा है। जब सूर्यकांत हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश से सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश बने, तब जस्टिस धर्मचंद चौधरी ने 2019 में हिमाचल हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश का दायित्व संभाला था।
हिमाचल में फिलहाल 12 जिले हैं। देहरा-गोपीपुर, नूरपुर, सुंदरनगर, पालमपुर, रोहड़ू और आनी समेत कई क्षेत्रों से लंबे समय से नए जिले बनाने की मांग उठती रही है। अब आयोग की रिपोर्ट के बाद इस दिशा में सरकार आगे फैसला लेगी।
