जयराम के 'फाल्गुनी' बजट पर टिकी कई निगाहें
फाल्गुन उम्मीद, उल्लास और उत्साह का माह है। चार मार्च को हिमाचल प्रदेश का बजट आना है, चार उपचुनाव हारने के बाद प्रदेश सरकार उल्लास की स्थिति में तो नहीं दिख रही किन्तु निसंदेह जयराम सरकार इस बजट को उत्साह का जरिया जरूर बनाना चाहेगी। योजना एक ऐसा सबरंग और फाल्गुनी बजट पेश करने की होगी, जिससे हर वर्ग, हर तबके को साधा जा सके। ये इस सरकार के कार्यकाल का अंतिम बजट है सो लाजमी है कि चुनावी वर्ष में सरकार किसी भी वर्ग की अनदेखी का जोखिम नहीं उठायें। पर कर्ज के बोझ से झुकते कंधे अपेक्षाओं का बोझ कहाँ तक संभाल पाएंगे, ये देखना दिलचस्प होगा।
इस बजट में जल, परिवहन, एडवेंचर पर्यटन, प्राकृतिक खेती और रोपवे को विशेष तरजीह मिल सकती है। उम्मीद है कि भाजपा के स्वर्णिम दृष्टिपत्र में बची कई घोषणाएं भी इस बजट के माध्यम से साधी जाएं। पर्यटन कारोबारी, किसान, बागवान, उद्यमी, कर्मचारी और आम आदमी भी सरकार की तरफ टुकटुकी लगाएं बैठे है, मानों कह रहे हो कि कर्मचारी ही नहीं हमारा साथ भी जरूरी है सरकार। उधर, कर्मचारी भी आशावान है। आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए नीति का प्रावधान हो, ओल्ड पेंशन स्कीम की मांग, एसएमसी शिक्षकों की नीति में बदलाव का मसला, या पंचायत तकनीकी सहायकों, मिड-डे मील, आशा वर्कर्स, आंगनबाड़ी वर्कर्स, सिलाई-कढ़ाई अध्यापकों के मानदेय में बढ़ोतरी का मामला, सब जयराम ठाकुर की तरफ देख रहे है। मसले और भी है, उम्मीदें बेतहाशा है, सिमित संसाधनों के साथ जयराम ठाकुर के फाल्गुनी बजट पर कई निगाहें टिकी है।
