जंगलों में लगने वाली आग पर काबू पाने के लिए मास्टर प्लान तैयार
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देशभर में जलवायु परिवर्तन और अन्य मानव जनित कारणों से वनों में आग लगने की घटनाएं सामने आती है लेकिन अब वन विभाग की नई पहल से जंगलों में लगने वाली आग पर काबू पाया जा सकेगा। वन विभाग ने आग पर काबू पाने के लिए मास्टर प्लान तैयार किया है। ग्रामीण क्षेत्रों में स्वयंसेवी तैनात किए जाएंगे, जिन्हें विभाग पंजीकृत करेगा। सेटेलाइट के माध्यम से जंगल में आग लगने पर मोबाइल फोन पर मैसेज आएगा। स्वयंसेवी आग पर काबू पाने में वन विभाग के कर्मचारियों का सहयोग करेंगे।
रैपिड रिस्पांस टीम का किया है गठन :
अप्रैल माह से वन विभाग ने फायर सीजन घोषित किया है। विभाग ने जंगलों में लगने वाली आग पर काबू पाने के लिए अभी से कसरत शुरू कर दी है। प्रत्येक वन रेंज में एक रैपिड रिस्पांस टीम का गठन किया गया है। प्रत्येक टीम में पांच कर्मचारी, एक वाटर टैैंकर व एक विशेष वाहन होगा। आग की सूचना मिलते ही यह टीम कुछ ही मिनट में घटनास्थल पर पहुंच जाएगी। सभी वन रेंज में दो से तीन फायर वाचर भी तैनात किए जा रहे हैं। मौसम के तेवर बदलते ही विभाग ने पंचायत प्रधानों, उपप्रधानों व ग्रामीणों को जागरूक करना शुरू कर दिया है।
इस तरह पाया जायेगा आग पर काबू :
इस मास्टर प्लान के तहत प्रत्येक गांव से विभाग स्वयंसेवी पंजीकृत करेगा, जो जंगल में आग लगने पर विभाग को तुरंत सूचना देंगे और काबू पाने में भी सहयोग करेंगे। फारेस्ट सर्वे आफ इंडिया के माध्यम से सभी पंचायत प्रतिनिधियों व स्वयंसेवियों को आग लगने पर मैसेज आ जाएगा। वन विभाग ने पहली अप्रैल से कर्मचारियों की छुट्टिïयों पर रोक लगा दी है। बड़ोग, चायल, कसौली, जाबली, अर्की, कुनिहार व आसपास के जंगल में सबसे अधिक आग की घटनाएं होती हैं। कोविड के कारण जिले में दो साल से पर्यटकों की संख्या कम रही। इस कारण आग की घटनाएं न के बराबर हुई है। इस वर्ष गर्मियों में पर्यटकों की संख्या अधिक रहने की संभावना है। इस कारण आग की घटनाएं अधिक होने की संभावना है।
पक्ष :
डीएफओ वन विभाग सोलन श्रेष्ठानंद शर्मा का कहना है कि जंगलों में लगने वाली आग से निपटने के लिए तैयारियां शुरू कर दी हैं। विभाग की ओर से पंचायत प्रतिनिधियों व ग्रामीणों को जागरूक भी किया जा रहा है।
