10 मंत्री पदों के लिए इन नेताओं का नाम शामिल
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू और उप मुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री के शपथ लेने के बाद अब 10 मंत्रियों के नामों को लेकर चर्चा तेज हो गई है। कैबिनेट का गठन करते वक्त न सिर्फ पार्टी के सामने अलग -अलग गुटों में संतुलन स्थापित करने का दबाव होगा, बल्कि पार्टी को क्षेत्रीय और जातीय संतुलन भी साधने होंगे। जाहिर है ऐसे में बचे हुए 38 में से 10 नामों पर मुहर लगाना आसान नहीं होने वाला। दरअसल वैधानिक रूप से प्रदेश में मुख्यमंत्री सहित अधिकतम 12 मंत्री ही बनाये जा सकते है और एक उपमुख्यमंत्री होने से अब अधिकतम 10 मंत्री और बनेंगे।
कांग्रेस की 40 में से एक चौथाई सीटें जिला कांगड़ा से मिली है और जिला शिमला में कांग्रेस को आठ में से सात सीटों पर जीत मिली है। इसके अलावा ऊना, हमीरपुर और सोलन में पार्टी पांच में से चार -चार सीटें जीतने में कामयाब रही है। यानी इन पांच ज़िलों से कांग्रेस को 29 सीटें मिली है और जाहिर है इन जिलों से इसी अनुरूप दावेदारी भी है। हमीरपुर को जहाँ मुख्यमंत्री पद मिल चुका है, वहीं जिला ऊना को उपमुख्यमंत्री पद मिला है और शेष तीन विधायक पहली बार विधानसभा पहुंचे है, ऐसे में ये लगभग तय है कि ऊना से कोई और मंत्री नहीं बनेगा। वहीं जिला सोलन से कर्नल धनीराम शांडिल और राम कुमार चौधरी मंत्रिपद की दौड़ में है। यहाँ इनमें से किसी एक को मंत्री पद मिल सकता है।
सात सीटें देने वाले जिला शिमला से विक्रमादित्य सिंह, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष कुलदीप राठौर, अनिरुद्ध सिंह और रोहित ठाकुर मंत्री पद के प्रबल दावेदार है। माना जा रहा है कि पार्टी तीन को मंत्री पद दे सकती है, जबकि एक नेता को विधानसभा अध्यक्ष या उपाध्यक्ष पद पर एडजस्ट किया जा सकता है। इनमें से विक्रमादित्य सिंह का मंत्री बनना लगभग तय है। जिला कांगड़ा की बात करें तो पूर्व मंत्री सुधीर शर्मा, चौधरी चंद्र कुमार और आशीष बुटेल का नाम मंत्रिपद की दौड़ में आगे है।
किन्नौर से विधायक जगत सिंह नेगी का भी मंत्री बनना लगभग तय माना जा रहा है। इसी तरह जिला सिरमौर से हर्षवर्धन चौहान का नाम भी तय है। जिला कुल्लू से सुंदर सिंह ठाकुर, मंडी से इकलौते विधायक चंद्रशेखर, जिला चम्बा से कुलदीप पठानिया और जिला बिलासपुर से राजेश धर्माणी मंत्री पद के दावेदार है लेकिन माना जा रहा है कि किसी एक को ही मंत्री पद मिलेगा। अन्य नेताओं को विधानसभा स्पीकर, डिप्टी स्पीकर और सीपीएस के पदों पर एडजस्ट किया जा सकता है। ये भी गौर रहे कि धर्माणी हमीरपुर संसदीय क्षेत्र से आते है, जहाँ से सीएम और डिप्टी सीएम दोनों है।
राणा को मिलेगा अहम दायित्व
जिला हमीरपुर से प्रदेश को मुख्यमंत्री पद मिला है लेकिन इसी जिला से राजेंद्र राणा और इंद्रदत्त लखनपाल भी मंत्री पद के दावेदार है। स्वाभाविक है कि जिला को कोई मंत्री पद मिलना मुश्किल है, लेकिन विशेषकर राजेंद्र राणा को कोई अहम दायित्व दिया जा सकता है। इंद्रदत्त लखनपाल भी तीसरी बार विधायक बने है और उन्हें भी पार्टी किसी अहम पद पर एडजस्ट कर सकती है।
