चेरी में इन्फेक्शन रोकने के लिए बना प्लान, बनेंगे 3 जोन, बागीचों से उखाड़े जाएंगे संक्रमित पौधे
शिमला के कोटखाई के तहत आने वाले बाघी व आसपास के क्षेत्रों में चेरी की फसल में फैले संक्रमण को रोकने के लिए प्लान तैयार कर लिया गया हैं। बुधवार को बागवानी निदेशालय में बागवानी विभाग के कार्यकारी निदेश सुदेश मोक्टा की अध्यक्षता में एक बैठक हुई हैं। इस बैठक में नौणी यूनिवर्सिटी के विशेषज्ञ बागवानी विभाग के एचडीओ और बागवान भी मौजूद रहे। बैठक में निर्णय लिया गया हैं कि चेरी की फसल में इन्फेक्शन रोकने के लिए संक्रमित पौधों का उखाड़ा जाएगा। ताकि बागीचों में यह संक्रमण ज्यादा न फैले। इसके अलावा बागवानों को पर्चे बांटकर फाइटोप्लाजमा बीमारी के बारे में लोगों को जागरूक किया जाएगा। चेरी से संक्रमित पौधों को बचाने के लिए बनाई गई योजना के लिए यूनिवर्सिटी सरकार व विभाग को फंड के उपलब्धता के लिए भी लिखेगा, क्योकि बैठक में नौणी यूनिवसिर्टी के प्रतिनिधियों ने फंड की कमी का जिक्र भी किया हैं।
वहीं अप्रैल के महीने सेब के बागीचों को 3 जोन में बांटा जाएगा। इसमें रेड जोन, ओरेंज जोन और ग्रीन जोन होंगे। रेड जोन में पूरी तरह से संक्रमित क्षेत्र होंगे, ओरेंज जोन मेें कम संक्रमित जोन और ग्रीन जोन संक्रमित रहित क्षेत्र हैं। इस दौरान भी नौणी यूनिवर्सिटी की टीमें बागीचों का निरीक्षण करेगी। गौरतलब है कि बाघी क्षेत्र में चेरी के बगीचों में इसी साल सितंबर माह में अज्ञात बीमारी से 90 फीसदी पौधे सूख गए थे। इसके बाद बागवानी विभाग ने नौणी यूनिवर्सिटी के विशेषज्ञों की एक कमेटी गठित की और बीमारी का पता लगाने के निर्देश दिए थे। कमेटी ने कई दिन तक बाघी क्षेत्र में डेरा डाले रखा। कमेटी की कई दिनों की जांच में पता चला कि बाघी व आसपास के क्षेत्रों में फाइटोप्लाज्मा वायरस से चेरी के बगीचे सूख रहे हैं। इसके बाद नौणी यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने बागवानों को कुछ छिड़काव का सुझाव दिया।
कोटगढ़ के बागवान दीपक सिंघा का कहना है कि फाइटोप्लाजमा के कारण चेरी के 80 से 90 प्रतिशत पौधे सूख गए हैं। इससे अगले साल फसल लगने की संभावनाएं खत्म हो गई है। यदि इस बीमारी को कंट्रोल नहीं किया गया तो यह साथ लगते नारकंडा, थानाधार, कंडियाली, कुमारसैन आदि क्षेत्रों में भी फैल जाएगी। इससे क्षेत्र के बागवान चिंतित है। पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह का भी नारकंडा के साथ लगते क्षेत्र में चेरी का बगीचा है। यहां आसपास के क्षेत्रों में बड़ी संख्या में बागवानों की रोजी-रोटी चेरी पर निर्भर है। दीपक सिंघा ने इस बीमारी को रोकथाम के लिए उचित कदम उठाने की अपील की है।
