गतिरोध दूर करना पीठासीन सम्मेलन का रहा मुख्य मुद्दा
लोकसभा और विधानसभा लोकतंत्र के वो मंदिर है जहां देश की जनता का भविष्य तय होता। यदि ये दोनों उचित तरीके से न चले तो इसमें जनता का ही नुक्सान है। पिछले कुछ समय से संसद और विधानसभा दोनों में ही काम की मात्रा कम और शोर ज़्यादा होने लगा है। देश के सांसद और विधायक अधिकतर समय अपनी बात आगे रखते हुए विरोध का सामना करते है। संसद और विधानसभा में लगातार बढ़ रहा इस तरह का गतिरोध लोकतंत्र के लिए एक बहुत बड़ी समस्या है। इस तरह के गतिरोध को दूर करना ही इस बार के अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारियों के सम्मेलन मुख्य मुद्दा रहा। बता दें की 82वें अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारियों के सम्मेलन का आयोजन इस दफे हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में किया गया। इस बार का ये सम्मेलन इसलिए भी खास था क्यों कि 100 वर्ष पहले 1921 में शिमला में ही प्रथम अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारियों का सम्मेलन हुआ था। शिमला में हुए इस सम्मेलन में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला बतौर मुख्य अतिथि शामिल हुए। उनके अलावा देश भर के इस पीठासीन अधिकारियों के सम्मेलन में विभिन्न विधान मंडलोंPage 8 के अध्यक्षों ने हिस्सा लिया। इनमें 24 राज्यों की विधानसभाओं के स्पीकर, 23 के सचिव और पांच राज्यों के विधानसभा उपाध्यक्ष पहुंचे। लोकसभा तथा राज्यसभा सचिवालय के लगभग 70 अधिकारी व कर्मचारी भी शिमला आए। प्रदेश के राज्यपाल, मुख्यमंत्री और मंत्रिमंडल के सदस्य भी सम्मेलन में मौजूद रहें।
82वें अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारियों के सम्मेलन के शताब्दी वर्ष समारोह के दौरान कई प्रस्तावों पर एक राय बनी। इनमें राष्ट्रपति और राज्यपाल के अभिभाषण के दौरान शांति बनाए रखने और उद्बोधन के दौरान किसी तरह का व्यवधान पैदा न करने पर सम्मेलन में शिरकत कर रहे पीठासीन अधिकारियों ने सहमति जताई। सम्मेलन में संकल्प लिया गया कि राष्ट्रपति और राज्यपाल के अभिभाषण एवं प्रश्नकाल के दौरान सदन में कोई व्यवधान नहीं होना चाहिए। इसके लिए सभी दलों से फिर चर्चा की जाएगी। सम्मेलन में इसको लेकर प्रस्ताव पारित किया गया है, जिसमें कहा गया है कि राष्ट्रपति या राज्यपाल के अभिभाषण, बजट प्रस्तुतियों और विधानसभाओं में प्रश्नकाल के दौरान कोई व्यवधान नहीं होना चाहिए। विभिन्न राज्यों के अध्यक्षों और उपाध्यक्षों से भी अनुरोध किया गया कि वे अपने राज्यों के राजनीतिक दलों के साथ इस मुद्दे पर सहमति लेने के लिए इस मामले को उठाएं। इसके अतिरिक्त सभी राज्यों की विधानसभाओं में शून्यकाल की परंपरा को शुरू करने पर भी सहमति जताई गई है। देश के सभी विधानमंडलों की कार्य प्रणाली में समरूपता आए, इसके लिए आदर्श नियमावली बनेगी। इस नियमावली को संसद में चर्चा के बाद बनाया जाएगा। इसके बाद आदर्श नियमावली को देश की विधानसभाओं को भेजा जाएगा, जिसके लिए संबंधित राज्य सरकारें, पंचायती राज और स्थानीय निकाय संस्थाएं अपने हिसाब से नियम बना सकती हैं।
दलबदल विरोधी कानून में बदलाव पर असहमति
82वें अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारियों के सम्मेलन के दौरान दलबदल विरोधी कानून में उपयुक्त बदलाव करने पर 36 विधानसभाओं और विधान परिषदों के अध्यक्षों के बीच आम सहमति नहीं बन पाई। तीन दिवसीय सम्मेलन की अध्यक्षता करने वाले ओम बिरला ने स्वीकार किया, "हालांकि दलबदल विरोधी कानून पर सीपी जोशी समिति की रिपोर्ट सौंप दी गई थी, लेकिन इस मुद्दे पर कोई सहमति नहीं थी।"
2022 तक पेपरलेस करने का लक्ष्य
अधिकारियों के 82वें सम्मेलन के समापन अवसर पर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा है कि सभी विधानसभाओं और विधान परिषदों को 2022 तक पेपरलेस करने का लक्ष्य रखा गया है। अगले साल तक इन्हें ई-विधान से जोड़ा जाएगा। उन्होंने कहा कि संसद की तर्ज पर सभी विधानसभाओं में शून्यकाल होगा। श्रेष्ठ कार्य करने वाले विधानमंडल पुरस्कृत किए जाएंगे। पुरस्कार तय करने के लिए एक कमेटी बनेगी। लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि विधानमंडलों के लिए नई मॉडल नियमावली बनेगी, जिसमें एकरूपता लाई जाएगी। आदर्श नियम बनाने और इनमें एकरूपता लाने के लिए भी एक कमेटी बनेगी, जो सभी विधानमंडलों से सुझाव भी लेगी। अभी तक अलग-अलग विधानमंडलों के अलग-अलग नियम हैं। उन्होंने विभिन्न विधानसभा अध्यक्षों से आए सुझाव भी सामने रखे। लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि विधानसभाओं की कार्यवाही आम जनता को ऑनलाइन भी दिखाई जाएगी। इसके बाद उन्होंने राज्य अतिथि गृह पीटरहॉफ शिमला में प्रेस वार्ता कर सारी बातें स्पष्ट की। इस अवसर पर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि सभी विधान मंडलों की कार्यवाहियों को एक सार्वजनिक ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर लाया जाएगा। इससे इन्हें आमजन एक ही मंच पर देख सकेंगे। बिरला ने कहा कि राष्ट्रपति और राज्यपाल के अभिभाषण के समय व्यवधान नहीं होगा और इसके बारे में सभी दलों से बात की जाएगी।
संसद में होगा धर्मशाला में ई-एकेडमी बनाने पर फैसला
ओम बिरला ने कहा कि धर्मशाला में ई-एकेडमी बनाने का फैसला संसद में होगा। बिरला ने कहा कि इस संबंध में फैसला संसद ही ले सकती है। ई-अकादमी बनाई जानी प्रस्तावित है। हिमाचल प्रदेश से आए प्रस्ताव को संसद में रखा जाएगा। यह मालूम रहे कि ई-एकेडमी बनाने की यह मांग सम्मेलन के दौरान मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर और प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष विपिन परमार ने रखी है।
सदन में आचरण भारतीय मूल्यों के अनुसार हो : पीएम
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 82 वें अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारियों के सम्मेलन के उद्घाटन समारोह को वीडियो कांफ्रेंस के माध्यम से संबोधित किया। प्रधानमंत्री ने इस दौरान कहा कि लोकतंत्र केवल भारत के लिए एक प्रणाली ही नहीं है बल्कि यह हमारे स्वभाव और जीवन के हिस्से में निहित है। हमें देश को नई ऊंचाइयों पर ले जाना है और आने वाले वर्षों में असाधारण लक्ष्य हासिल करने हैं तथा ये संकल्प सबके प्रयासों से पूरे होंगे। भारत के लोकतंत्र और संघीय व्यवस्था में जब हम ‘सबका प्रयास’ की बात करते हैं, तो सभी राज्यों की भूमिका इसके लिए एक बड़ा आधार है। ‘सबका प्रयास’ के महत्व को उल्लेखित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि चाहे पूर्वाेत्तर की दशकों पुरानी समस्याओं का समाधान हो या दशकों से अटकी विकास की सभी बड़ी परियोजनाओं को पूरा करने की बात हो, देश में पिछले वर्षों में ऐसे बहुत से कार्य हुए हैं जिनमें सभी के प्रयास शामिल हैं। उन्होंने कोरोना महामारी के खिलाफ लड़ाई को ‘सबका प्रयास’ का एक बेहतरीन उदाहरण बताया। प्रधानमंत्री ने कहा कि हमारी विधानसभाओं के सदनों की परम्पराएं और प्रणालियां स्वाभाविक रूप से भारतीय होनी चाहिए। उन्होंने ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ की भारतीय भावना को मजबूत करने के लिए सरकार से नीतियों और कानूनों पर विशेष बल देने का आह्वान किया। उन्होंने कहा यह हम सभी की जिम्मेदारी है कि सदन में हमारा अपना आचरण भारतीय मूल्यों के अनुसार होना चाहिए। नरेंद्र मोदी ने कहा कि हमारा देश विविधताओं से भरा है। हजारों वर्षों के विकास में हमने यह महसूस किया है कि विविधता के बीच एकता की भव्य, दिव्य और अखंड धारा बहती है। एकता की यह अटूट धारा हमारी विविधता को संजोती है, उसकी रक्षा करती है।
कागज़ फाड़कर सदन को शर्मसार नहीं किया जा सकता : अनुराग
केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर भी हिमाचल प्रदेश विधानसभा में हो रहे 82वें अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारियों के सम्मेलन में पहुंचे। अपने संबोधन के दौरान केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री अनुराग ठाकुर ने सदन की कार्यवाही में व्यवधान डालने पर चिंता भी जताई। उन्होंने कहा कि सदन चर्चा के लिए होता है, इसे कागज फाड़कर शर्मसार नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि कागज तो सड़कों पर भी फाड़े जा सकते हैं, सदन तो चर्चा के लिए होता है। उन्होंने कहा कि सदन व विधान मंडलों में कमेटियों की प्रणाली को मजबूत करने की आवश्यकता है। इसके अलावा शोध कार्य पर भी ध्यान दिए जाने की आवश्यकता है। उन्होंने पीठासीन अधिकारियों से देश में हर साल विधायिका सप्ताह आयोजित करने की सलाह दी। अनुराग ठाकुर ने सदन में सार्थक बहस के लिए पीठासीन अधिकारियों को निर्वाचित प्रतिनिधि को संरक्षण प्रदान करने की बात की।
