कैप्टन को अब भी मनाना चाहती है साेनिया, खुद हुईं सक्रिय
कांग्रेस पार्टी से नाराज चल रहे कैप्टन अमरिंदर सिंह को मनाने का प्रयास अब सोनिया गांधी की तरफ से किया जा रहा है। 2022 के विधानसभा चुनाव सर पर है और ऐसे में नाराज कैप्टन अमरिंदर सिंह कि नई पार्टी कि वजह से कांग्रेस को पंजाब में काफी नुकसान का सामना करना पड़ सकता है। वहीं, कैप्टन के पार्टी बनाने की घोषणा के साथ दिल्ली में कांग्रेस खेमे में भी खासी हलचल देखी जा रही है। कैप्टन ने 27 अक्टूबर को अपनी प्रेस कांफ्रेंस में अपने अगले सियासी कदम के बारे में साफ कर दिया था। अपने खिलाफ बगावत की चर्चा करते हुुए कैप्टन ने कहा था, जब पार्टी हाईकमान ने ही उन्हें बदलने का मन बना लिया तो बाकि तब तो बहाना था। दो बार मुख्यमंत्री और तीन बार प्रदेश प्रधान रहे 79 वर्षीय कैप्टन 27 अक्टूबर को ही अपनी पार्टी का गठन करने की तैयारी में थे, लेकिन अंतिम समय में इस योजना को बदल दिया गया। कैप्टन ने 28 अक्टूबर को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात करने की बात की थी। यह बैठक भी नहीं हो पाई है। बताया जाता है कि अमित शाह की व्यस्तता के कारण यह टल गई और दोनों नेताओं की मुलाकात जल्द होने की संभावना है। इस बीच कांग्रेस सूत्रों का कहना है कि पार्टी अब भी नहीं चाहती है कि कैप्टन किसी भी सूरत में पार्टी छोड़ें। क्योंकि, पार्टी को यह फीडबैक है कि इससे 2022 के पंजाब विधानसभा चुनाव में उसकी राह मुश्किल हो जाएगी। माना जा रहा है कि कैप्टन अमरिंदर सिंह के पार्टी छोड़ने से पंजाब का हिंदू वोटबैंक कांग्रेस से हिल जाएगा। कांग्रेस के पास फिलहाल हिंदू वोट बैंक को रोकने का कोई विकल्प नहीं है। वहीं, अगर कैप्टन अमरिंदर सिंह के रूप में भाजपा को बैठे-बिठाए एक बड़ा सिख चेहरा मिल जाएगा, जिसकी राष्ट्रीय स्तर पर पहचान है। कैप्टन अमरिंदर सिंह जिस प्रकार से नवजोत सिंह सिद्धू से खिन्न है ऐसे में पार्टी को दोनों में से किसी एक को ही चुनना होगा, क्योंकि एक म्यान में दो तलवार नहीं रह सकती है। जिस प्रकार से सिद्धू ने कैप्टन के मुख्यमंत्री रहते हुए इंटरनेट मीडिया पर उनके खिलाफ अभियान छेड़ा था और कांग्रेस हाईकमान ने कभी भी इस पर कोई एतराज नहीं जताया, इसके बाद से ही सिद्धू और कैप्टन की लड़ाई राजनीति से ऊपर उठ कर निजी हो गई है।
