भाषा एवम संस्कृति विभाग जिला शिमला द्वारा संस्कृत विद्वानों की लेखक गोष्ठी व कवि सम्मेलन का आयोजन
शिमला : भाषा एवम संस्कृति विभाग जिला शिमला द्वारा संस्कृत सप्ताह के अंतर्गत श्रावणी पूर्णिमा व संस्कृत दिवस की पूर्व संध्या पर गेयटी थियेटर के कांफ्रेंस हॉल मे संस्कृत विद्वानों की लेखक गोष्ठी व कवि सम्मेलन का आयोजन करवाया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ संस्कृत विद्वान डा मदन मोहन शर्मा ने की तथा जगत प्रसाद शास्त्री विशेष अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। डा नंद लाल भारद्वाज ने संस्कृत भाषा मे मंच संचालन कर कार्यक्रम मे खूब तालियां बटोरी। इस अवसर पर डा मस्त राम शर्मा ने हिमाचल प्रदेशे संस्कृत भाषाया: उपदेयता विषय पर अपना पत्र वाचन किया। जिस पर उपस्थित विद्वानों ने भी अपने विचार व्यक्त किए। इस अवसर पर कवि गोष्ठी का भी आयोजन किया गया। महेश्वर शर्मा ने संस्कृत भाषा की महत्ता पर सुंदर गीतिका प्रस्तुत की, आचार्य किशोरी लाल ने ज्योतिष व संस्कृत भाषा के संबध पर अपने विचार व्यक्त किए। डा नंदलाल भारद्वाज ने गौ माता विश्व माता पर मार्मिक काव्य पाठ किया। राजेश ठाकुर ने मैं कवि नहीं हूं व्यंग्यात्मक कविता प्रस्तुत की। युवा कवि नरेश कुमार ने विकास के नाम पर किए जा रहे अंधाधुंध वनों के कटान पर वृक्ष की व्यथा पर मार्मिक काव्य पाठ कर वनों को बचाने का संदेश दिया। डा मस्त राम शर्मा ने संस्कृत भाषा की महिमा में संस्कृत भाषा को वेद वाणी, देव वाणी, सभी भाषाओं की जननी, जन्म से मृत्यु तक के सभी संस्कारों की भाषा के साथ -साथ संस्कृति जैसी लिखी जाती है वैसी ही बोली भी जाती है। उन्होंने संस्कृत भाषा में शंकर की स्तुति भी प्रस्तुत की। जगत प्रसाद शास्त्री ने संस्कृत भाषा के वर्चस्व को बचाए रखने के लिए संस्कृत व हिन्दी भाषा को एक -दूसरे का पूरक मानते हुए मां बेटी का संबध बताया तथा हिन्दी को राष्ट्रभाषा के रूप में अपनाए जाने पर ही संस्कृत भाषा का वर्चस्व बनाए रखने पर बल दिया। इन्होंने समाज में व्याप्त कुरीतियों पर कुठाराघात करते हुए शानदार काव्य के माध्यम से अपने मत को रखा। डा मदन मोहन शर्मा ने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में संस्कृत भाषा के उन्नयन के लिए आयोजित किए जाने वाले ऐसे आयोजनों से इस विषय के विद्वानों, युवा लेखकों, चिंतकों को अपने विचार सांझा करने के लिए मंच मिलता है। ऐसे आयोजन संस्कृत महाविद्यालय के छात्रों की छुपी प्रतिभा मे निखार लाने में सहायक होगे। उन्होंने संस्कृत भाषा को सबसे मधुर भाषा कहा तथा विकास के नाम पर प्रकृति के साथ हो रहे अत्यधिक दोहन के कारण हो रही भूस्खलन की घटनाओं पर गहरी चिंता व्यक्त की। इस अवसर पर सभी को श्रावणी पूर्णिमा, संस्कृत दिवस व रक्षा बंधन की शुभकामनाएं दी। इस अवसर पर जिला के दर्जन भर साहित्यकारों ने भाग लिया। कार्यक्रम के अंत में जिला भाषा अधिकारी शिमला अनिल हारटा ने कार्यक्रम मे उपस्थित विद्वानों का धन्यवाद किया।
