गलघोंटू बीमारी की दादागिरी खत्म करेगा टीडी वैक्सीन
केंद्रीय अनुसंधान संस्थान (सीआरआई)) कसौली ने वैक्सीन डीटी को और बेहतरीन शोध प्रक्रियाओं में शामिल कर तैयार किया है। यह टीडी वैक्सीन टेटनस कम एडल्ट डिप्थीरिया वैक्सीन होगी। यह वैक्सीन टीटी और डीटी के मिश्रण से तैयार की है। खास बात यह हैं कि इस टीके का सफल ट्रायल भी हो गया है। अब बस इंतज़ार हैं तो इसे मार्किट में उतारनेकी । इसके लिए ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया ने भी मंजूरी देकर प्रमाण पत्र जारी कर दिया है। जानकारी के अनुसार अनुसंधान संस्थान पहले भी इस तरह की वैक्सीन डीटी नाम से बना चुका है लेकिन टीका छोटे बच्चों और गर्भवती महिलाओं को लगाया जाता था। अब इसे और बेहतरीन शोध प्रक्रियाओं में शामिल कर तैयार किया गया है। यह टीडी वैक्सीन टेटनस कम एडल्ट डिप्थीरिया वैक्सीन होगी। यानि की मात्र एक ही टीका लगाने से कटने-फटने सहित गलघोंटू जानलेवा बीमारी का उपचार होगा। गलघोंटू जो अति तीव्र गति से फैलने वाला जीवाणु है, इसके उपचार में भी यह टीका संजीवनी का काम करेगा। अनुसंधान की ओर से विभिन्न निरीक्षण के बाद करीब दो वर्ष में इस वैक्सीन को तैयार करने में सफलता हासिल की है।
इन बीमारियों पर लगेगी वैक्सीन
डिप्थीरिया संक्रामक रोग है, जो दो वर्ष से लेकर दस वर्ष तक की आयु के बच्चों को अधिक होता है। अब यह रोग बच्चों सहित हर आयु वर्ग के लोगों को भी हो रहा है। यह रोग अधिकतर गले में होता है, और इससे टांसिल भी होते हैं। इसके बैक्टीरिया टॉन्सिल और श्वास नली को सबसे ज्यादा संक्रमित करते हैं। सांस लेने में दिक्कत, गर्दन में सूजन, बुखार, खांसी आदि डिप्थीरिया बीमारी के लक्षण हैं।
सीआरआई के सहायक निदेशक डॉ. यशवंत कुमार ने बताया कि संस्थान ने टेटनस कम एडल्ट डिप्थीरिया वैक्सीन तैयार कर ली है। इसे बाजार में उतारने की मंजूरी भी मिल गई है। संस्थान पहले भी इस तरह की वैक्सीन डीटी के रूप में निकाल चुका है। जल्द वैक्सीन के कमर्शियल बैच मार्केट में उतारे जाएंगे।
