बुढ़ापे की लाठी बनी राज्य सरकार की यह योजना
देवभूमि हिमाचल के सभी आर्थिक रूप से कमजोर असहाय वृद्ध नागरिकों को सामाजिक सुरक्षा प्रदान करने के लिए वृद्धावस्था पेंशन योजना मील का पत्थर साबित हुई है। बेसहारा वृद्धों को सामाजिक सुरक्षा प्रदान करने के उद्देश्य से शुरू की गई इस योजना के अंतर्गत राज्य के उन सभी वृद्धजनों को पेंशन योजना का लाभ दिया जाता है, जिन्हें किसी भी तरह की पेंशन योजना का लाभ प्राप्त नहीं होता और उन्हें अपने रोजमर्रा की आवश्यकताओं के लिए सदैव दूसरों पर ही निर्भर रहना पड़ता है। हिमाचल प्रदेश ओल्ड पेंशन स्कीम के तहत राज्य के सभी 60 वर्ष या इससे अधिक आयु के बुजुर्ग व्यक्तियों और महिलाओं को जिनका नाम वृद्धावस्था पेंशन योजना लिस्ट में जारी किया जाता है, उन्हें सरकार हर महीने निर्धारित पेंशन उनके बैंक खातोंमें ट्रांसफर करवाती है। इस योजना के तहत 60 वर्ष से 69 वर्ष की आयु के पैंशनरों को 850 रूपये प्रतिमाह (आय सीमा 35,000 रूपये वार्षिक), 65 वर्ष से 69 वर्ष की आयु की महिला पैंशनरों को 1000 रुपए प्रतिमाह (कोई आय सीमा नहीं), 70 वर्ष या इससे अधिक आयु के पैंशनरों को 1500 रुपए प्रतिमाह (कोई आय सीमा नहीं) की आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है। इस योजना के अंतर्गत प्रदेश के 314184 से अधिक लाभार्थिओं को प्रतिमाह पेंशन प्रदान की जा रही है, जो अपने आप में एक बड़ा आंकड़ा है।
यह है पात्रता
ऐसे वृद्ध व्यक्ति जिनकी आयु 60 वर्ष या उससे अधिक है तथा उनकी देखरेख और पालन पोषण का उचित साधन न हो तथा जिनके अव्यस्क बच्चे हो, जिनकी वार्षिक आय समस्त स्त्रोतों से 35,000 रुपए से अधिक न हो। अथवा ऐसे वृद्ध व्यक्ति जिनके परिवार की वार्षिक आय समस्त स्त्रोतों से 35,000 रुपए से अधिक न हो। 65 वर्ष से 69 वर्ष आयु की वरिष्ठ महिलाओं तथा 70 वर्ष या इससे अधिक आयु के वृद्धजनों को बिना किसी आय सीमा के पेंशन प्रदान की जाती है।
आवेदन की यह है प्रक्रिया
पात्र व्यक्ति को अपना प्रार्थना पत्र सम्बन्धित पंचायत अथवा तहसील कल्याण अधिकारी या जिला कल्याण अधिकारी को प्रस्तुत करना होता है। पात्र व्यक्तियों की पहचान सम्बन्धित ग्राम सभा की बैठक में की जाती है तथा पहचान करके पात्र व्यक्तियों की सूची सम्बन्धित तहसील कल्याण अधिकारी को प्रस्ताव सहित भेजते है। सम्बन्धित तहसील कल्याण अधिकारी द्वारा पात्र व्यक्तियों के प्रार्थना पत्र तथा उसमें औपचारिकताएं अपने स्तर पर पूर्ण करवायी जाने उपरान्त प्रार्थना पत्रों को स्वीकृति हेतू सम्बन्धित जिला कल्याण अधिकारी को भेजा जाता है। 70 वर्ष से अधिक आयु के प्रार्थी अपने प्रार्थना पत्र सीधे तहसील कल्याण अधिकारी कार्यालय को दे सकते है।
