टाइडमैन अर्ली वर्सेसटर नाम की सेब की वैरायटी ने बाजार में दी दस्तक बागवानों को मिल रहे हैं अच्छे दाम
बदलते हुए परिवेश और विकास की वृद्धि दर के साथ हिमाचल प्रदेश सेब राज्य के नाम से जाना जाता है। विकास की अनेक मंजिलें तय करने के बाद आज हम देखते हैं कि हिमाचल के सुदूरवर्ती क्षेत्र सेब की विभिन्न प्रजातियों से भरे पड़े हैं तथा लोगों की आमदनी के अच्छे स्रोत बने हैं। करसोग क्षेत्र के प्रगतिशील बागवान डॉक्टर जगदीश शर्मा, सुमित गुप्ता, हेमराज गुप्ता, हीरालाल महाजन, नरेश गुप्ता, मनोज शर्मा, नानकचंद का कहना है कि इन नवीन सेब प्रजातियों के कारण सेब जून जुलाई महीने में ही प्रदेश व देशभर के उपभोक्ताओं तक पहुंच जाता है। सेब बागवानी के कारण सर्द वायु वाले गांव-गांव के लोग इतने बुरे पहाड़ो के निवासी न रह कर हर दिशा में समृद्धि की ओर अग्रसर है। सेब बागवानी के कारण गरीब वर्ग से लेकर हर आयु वर्ग के लोगों को रोजगार मिलने से सेब उत्पादक क्षेत्र व गर्म वायु क्षेत्र में आम व अन्य प्रकार के फल उत्पादन के कारण हिमाचल प्रदेश के निवासी एक गौरवशाली पहाड़ी राज्य के निवासी हैं। हिमाचल प्रदेश बागवानी निदेशालय में सेवारत बागवानी विशेषज्ञ डॉक्टर शरद गुप्ता का कहना है कि उद्यान विभाग लोगों को बागों का विकास करने के लिए हर प्रकार की सहायता प्रदान करता है।टाइडमैन अर्ली वर्सेसटर नाम की सेब की वैरायटी बाजार में दस्तक दे चुकी है। थोड़ा चपटा सा दिखने वाला यह सेब रैड जून वैरायटी के बाद सबसे पहले भारी मात्रा में मंडियों में दस्तक दे देता है। इसे एक अच्छी परागकण किस्म के रूप में भी इस्तेमाल किया जाता रहा है । जिसके चलते इस वैरायटी के पेड़ में अधिक मात्रा में फल लगते हैं और बागवान अच्छा मुनाफा अर्जित कर लेते हैं ।हिमाचल प्रदेश बागबानी निदेशालय में सेवारत बागबानी विशेषज्ञ डाक्टर शरद गुप्ता का कहना है कि इस वैरायटी को एच एम टाइडमैन नामक वैज्ञानिक द्वारा वर्ष 1929 में इंग्लैंड में तैयार किया गया था। यह "वरसेस्टर पियरमैन तथा मैकिंटोश" की संकर किस्म है। लाल छिलका, खुशबूदार स्वादिष्ट गुदे वाला यह फल 90 दिनों में पक कर तैयार हो जाता है।
