शीतकालीन सत्र : खूब तपा तपोवन, कुछ मांगें पूरी तो कुछ अब भी अधूरी
हिमाचल प्रदेश विधानसभा का शीत सत्र इस दफे भी खूब हंगामों से भरा रहा, विधानसभा के अंदर और बाहर हर तरफ हंगामा ही हंगामा बरपा। विपक्ष ने तो सरकार को घेरा ही मगर अपनी मांगों को लेकर हर दिन आगे आए संगठनों ने भी कोई कसर नहीं छोड़ी। कुछ का प्रदर्शन शांतिपूर्वक संपन्न हो गया तो कुछ ने जबरन अपनी बातें मनवाई। कहीं सरकार को झुकना पड़ा तो कहीं आश्वासन से काम चल गया । इस सत्र के दौरान विपक्ष ने समांतर विधानसभा चला कर विरोध का एक नया तरीका भी निकाला। कई एहम मुद्दों पर चर्चा हुई और कई मुद्दों को बस टाल दिया गया। 13वीं विधानसभा के 13वें सत्र के दौरान कुल 5 बैठकें हुईं है । इस बार सत्र की कार्यवाही 27 घंटे 30 मिनट चली जिसमें कुल 281 तारांकित और 138 अतारांकित प्रश्न पूछे गए है। नियम-61 के तहत 1 विषय, नियम-62 के तहत 5 विषयों और नियम 130 के अंतर्गत 7 प्रस्तावों पर चर्चा हुई। इसके अलावा नियम-101 के तहत 3 गैर-सरकारी संकल्प प्रस्तुत हुए। इसके अतिरिक्त 5 सरकारी विधेयक भी सभा में फिर से स्थापित किए गए और उन पर चर्चा हुई। इनमें से 3 विधेयक पर संशोधन प्रस्ताव दिए गए, उसके बाद विधेयक सदन द्वारा पारित किया गया।
कैग की रिपोर्ट ने स्पष्ट की प्रदेश की माली हालत
इस शीत सत्र के दौरान प्रदेश सरकार को सबसे बड़ा झटका तो कैग की रिपोर्ट ने दिया है। विधानसभा के शीत सत्र के अंतिम दिन मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने सदन के पटल पर भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) की रिपोर्ट रखी। भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक की रिपोर्ट ने हिमाचल प्रदेश सरकार के विकास के दावों की पोल खोल दी है। रिपोर्ट से स्पष्ट होता है की हिमाचल सरकार ने राजकोषीय घाटा सीमित रखने का कोई प्रयास नहीं किया है। कैग के अनुसार 2019-20 में सरकार के लोक ऋण दायित्व और इसके ब्याज के भुगतान की रकम 62234 करोड़ हो गई है । इसमें 40572 करोड़ के मूलधन और 21662 करोड़ की ब्याज राशि शामिल है। इसके अलावा रिपोर्ट के मुताबिक 2019-20 में प्रदेश का राजकोषीय घाटा 5597 करोड़ दर्ज किया गया है। 14वें वित्तायोग तथा एफआरबीएम अधिनियम के मुताबिक राजकोषीय घाटा राज्य के सकल घरेलू उत्पाद का 3 फीसदी से अधिक नहीं होना चाहिए। परन्तु यह प्रदेश की जीडीपी का 3.38 फीसदी दर्ज किया गया। 2019-20 में सरकार की राजकोषीय देनदारियों में 14.57 फीसदी का इजाफा हुआ। उस वर्ष सरकार की देनदारियां 62,212 करोड़ थीं। राजकोषीय देनदारियां सकल घरेलू उत्पाद के मुकाबले अधिक होने पर कैग ने सवाल खड़े किए हैं। इससे पता चलता है कि सरकार की माली हालत क्या है और कर्ज के सहारे प्रदेश की गाड़ी चल रही है।
सत्र के दौरान तो विपक्ष ने सरकार को विभिन्न मुद्दों पर घेरा ही मगर सत्र के बाद इस रिपोर्ट ने विपक्ष को एक और मुद्दा दे दिया है। नेता प्रतिपक्ष मुकेश अग्निहोत्री का कहना है कि सरकार कर्ज की बैसाखी पर चल रही है। उनके अनुसार सरकार हर क्षेत्र में फेल हुई है। सत्र में उठ रही मांगों को देखते हुए नेता प्रतिपक्ष ने ये एलान भी किया कि कांग्रेस सरकार बनने पर कर्मचारियों की सभी मांगे पूरी की जाएंगी, कांग्रेस सरकार बनने के बाद ओल्ड पेंशन स्कीम लागू की जाएगी। ऑउटसोर्स कर्मचारियों के लिए नीति बनाकर उन्हें अनुंबध में लाया जाएगा। उन्होंने कहा कि पीरियड बेस्ड एसएमसी शिक्षकों के लिए नीति बनाई जाएगी और पुलिस अधिकारियों की पदोन्नति के मसले भी सुलाझाएंगे।
