पालमपुर के CSIR-IHBT में हिमालयी सुगन्धित तेलों पर एक दिवसीय कार्यशाला आयोजित
सीएसआईआर हिमालय जैवसंपदा प्रौद्योगिकी संस्थान (CSIR-IHBT), पालमपुर ने अक्तूबर 28 को हिमालयन फाइटोकेमिकल्स एंड ग्रोअर्स एसोसिएशन (HIMPA), के साथ मिलकर “हिमालयी सुगन्धित तेलों का मूल्य संवर्धन और उनका विपणन विनियमन” विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया। इस कार्यक्रम में हिमाचल प्रदेश और जम्मू एवं कश्मीर के लगभग 50 प्रतिभागियों ने भाग लिया, जिनमें किसान, उद्योगपति, हिम्पा के सदस्य और वैज्ञानिक शामिल थे। कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र में निदेशक, सीएसआईआर-आईएचबीटी, डॉ. सुदेश
कुमार यादव ने संस्थान की प्रतिबद्धता पर बल देते हुए कहा कि आईएचबीटी उत्तर-पश्चिम हिमालयी क्षेत्र में सुगन्धित एवं उच्च मूल्य वाली फसलों की खेती को बढ़ावा देने के लिए निरंतर प्रयासरत है। उन्होंने किसानों को वैज्ञानिक एवं तकनीकी सहयोग का आश्वासन दिया ताकि वे इन फसलों की खेती और मूल्य संवर्धन के माध्यम से आजीविका के अवसर बढ़ा सकें। डॉ. यादव ने इस अवसर पर सीएसआईआर अरोमा मिशन टीम को वर्ष 2025 के लिए “राष्ट्रीय विज्ञान पुरस्कार” प्राप्त करने पर बधाई भी दी। मुख्य वैज्ञानिक एवं कार्यक्रम समन्वयक, डॉ. राकेश कुमार ने उत्तर-
पश्चिम हिमालयी क्षेत्र के लिए उपयुक्त सुगन्धित फसलों का एक विस्तृत अवलोकन प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि ये फसलें वर्षा-आश्रित परिस्थितियों में भी अच्छा प्रदर्शन करती हैं, कीट एवं रोगों के प्रति अपेक्षाकृत प्रतिरोधी होती हैं और खेती में प्रतिस्पर्धा भी कम होती है। इन फसलों की आर्थिक संभावनाओं पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि दमस्क गुलाब, लेमनग्रास, तुलसी, पुदीना, सुगन्धित गेंदे, कैमोमाइल और पामारोसा जैसी कम मात्रा में अधिक मूल्य वाली फसलों की मांग अरोमाथेरेपी, कॉस्मेटिक्स, खाद्य, औषधि, टॉयलेटरीज़ और सुगंध उद्योगों में लगातार बढ़ रही है। उन्होंने किसानों को अनुपयोगी और बंजर भूमि को सुगन्धित फसलों की खेती के लिए उपयोग करने के लिए प्रोत्साहित किया। वैश्विक सुगन्धित तेल बाजार 2025-2033 तक 9.0% सीएजीआर से बढ़ रहा है। सुगन्धित तेल बाजार, जो 2016 में 6.63 बिलियन अमरीकी डालर था, 2024 में 25.86 बिलियन अमरीकी डालर तक पहुंच गया और 2033 तक 56.25 बिलियन अमरीकी डालर तक पहुंचने का अनुमान है। हिम्पा के अध्यक्ष सुरेंद्र मोहन ने हिमाचल प्रदेश में सगंधित तेल उद्योग की वर्तमान स्थिति और भविष्य की संभावनाओं पर चर्चा की। प्रतिभागियों को देवदार (सीडरवुड) सहित अन्य सुगन्धित फसलों के लिए उन्नत प्रसंस्करण तकनीकों, सुगन्धित तेलों के विपणन विनियमों और मूल्य संवर्धन विधियों के बारे में भी जानकारी दी गई। जम्मू-कश्मीर के उधमियों ने जम्मू-कश्मीर में सुगन्धित तेल उद्योग की संभावनाओं और चुनौतियों पर अपने विचार साझा किए। कार्यशाला का समापन एक इंटरैक्टिव सत्र के साथ हुआ, जिसमें किसानों और उद्योगपतियों ने मूल्य संवर्धन पर हुई ज्ञानवर्धक चर्चाओं की सराहना की और सुगन्धित तेल क्षेत्र में नवाचारपूर्ण प्रथाओं को अपनाने के प्रति अपनी उत्सुकता व्यक्त की।
