वीरभद्र सिंह की अनदेखी पर फिर उठे सवाल, MLA रोहड़ू से जनता ने जताई नाराजगी
शिमला। हिमाचल प्रदेश की राजनीति में पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय वीरभद्र सिंह की अनदेखी का मुद्दा एक बार फिर चर्चा में है। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू के हालिया रोहड़ू दौरे के दौरान कार्यक्रम के बैनर और पोस्टरों में वीरभद्र सिंह की तस्वीर नहीं होने और भाषणों में उनका नाम नहीं लिए जाने को लेकर कांग्रेस के भीतर नाराजगी सामने आई है। इस मामले ने रोहड़ू में उनकी राजनीतिक विरासत और सम्मान को लेकर नई बहस छेड़ दी है।
रोहड़ू दौरे के बाद बढ़ी नाराजगी
मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने 2 और 3 अक्टूबर को रोहड़ू और रामपुर विधानसभा क्षेत्रों का दौरा किया था। इस दौरान कार्यक्रमों के बैनर और पोस्टरों में पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह की तस्वीर नहीं दिखाई दी। साथ ही, कार्यक्रमों में उनके योगदान का उल्लेख नहीं होने पर भी सवाल उठे।
इस मामले पर पूर्व सांसद एवं कांग्रेस की वरिष्ठ नेता प्रतिभा सिंह ने नाराजगी जताई। उन्होंने सवाल उठाया कि वीरभद्र सिंह को गुजरे अभी साढ़े चार साल ही हुए हैं, ऐसे में उन्हें इतनी जल्दी कैसे भुलाया जा सकता है।
प्रतिभा सिंह ने कहा कि वीरभद्र सिंह का हिमाचल प्रदेश के विकास में महत्वपूर्ण योगदान रहा है। ऐसे में उनके योगदान को याद करना और नई पीढ़ी को उनके बारे में बताना पार्टी की जिम्मेदारी है।
उन्होंने यह भी कहा कि यदि कार्यक्रम के आयोजकों ने वीरभद्र सिंह की तस्वीर वाले बैनर और पोस्टर नहीं लगाए थे, तो स्थानीय कांग्रेस नेता और कार्यकर्ता स्वयं ऐसा कर सकते थे। उनके अनुसार, कम से कम 20 बैनर और पोस्टर लगाकर भी पूर्व मुख्यमंत्री को सम्मान दिया जा सकता था I
वीरभद्र सिंह का रोहड़ू विधानसभा क्षेत्र से लंबे समय तक राजनीतिक जुड़ाव रहा। उन्होंने इस क्षेत्र का पांच बार प्रतिनिधित्व किया था। ऐसे में उनके राजनीतिक गढ़ माने जाने वाले रोहड़ू में उनकी तस्वीर और नाम का उल्लेख नहीं होना समर्थकों के लिए चर्चा का विषय बन गया है।
प्रतिभा सिंह ने हिमाचल के पहले मुख्यमंत्री डॉ. वाईएस परमार का उदाहरण देते हुए कहा कि जिस तरह प्रदेश में उनके योगदान को याद किया जाता है, उसी तरह वीरभद्र सिंह के योगदान को भी सम्मान मिलना चाहिए।
वीरभद्र सिंह की अनदेखी को लेकर उठे सवालों के बाद प्रदेश कांग्रेस के भीतर वरिष्ठ नेतृत्व के सम्मान और पार्टी की राजनीतिक विरासत को लेकर चर्चा तेज हो गई है। इस घटनाक्रम ने एक बार फिर वीरभद्र सिंह परिवार और वर्तमान कांग्रेस नेतृत्व के बीच संबंधों को लेकर राजनीतिक चर्चाओं को हवा दी है
