सुक्खू बोले- कोर्ट नए नियम नहीं बना सकता, खेल मैदानों पर भी उठाया सवाल
हिमाचल प्रदेश राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय (HPNLU) शिमला के तीसरे दीक्षांत समारोह में मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने न्यायपालिका और सरकार के अधिकार क्षेत्र से जुड़े मुद्दों पर अपनी बात रखी। मुख्यमंत्री ने कहा कि न्यायिक फैसलों से कई बार सरकार के सामने व्यावहारिक और वित्तीय चुनौतियां खड़ी हो जाती हैं।
सीएम सुक्खू ने सरकारी कर्मचारियों से जुड़े मामलों का उदाहरण देते हुए कहा कि कोर्ट को भर्ती एवं सेवा नियमों के दायरे में रहना चाहिए। उन्होंने वर्ष 2003 की उस नीति का जिक्र किया, जिसमें अनुबंध कर्मचारियों को वरिष्ठता और वेतन वृद्धि का लाभ नहीं दिया गया था। मुख्यमंत्री के अनुसार, करीब दो दशक बाद अदालत के आदेश से ऐसे वित्तीय लाभ देने की स्थिति बनी, जबकि उस समय के भर्ती नियमों में इसका स्पष्ट प्रावधान नहीं था।
मुख्यमंत्री ने कहा कि कोई भी चुनी हुई सरकार अपने कर्मचारियों को उनके जायज वित्तीय लाभों से वंचित नहीं करना चाहती, लेकिन सरकार को राजकोष और प्रदेश की वित्तीय स्थिति का भी ध्यान रखना पड़ता है। उन्होंने कहा कि जनहित, नियमों और वित्तीय संसाधनों के बीच संतुलन जरूरी है।
स्कूलों के खेल मैदानों पर भी बोले सीएम
सुक्खू ने हिमाचल की भौगोलिक परिस्थितियों का हवाला देते हुए कहा कि पहाड़ी राज्य में पर्याप्त समतल भूमि उपलब्ध नहीं है। ऐसे में स्कूलों और सामुदायिक खेल मैदानों का बेहतर और साझा उपयोग किया जाना चाहिए।
उन्होंने बताया कि स्वतंत्रता दिवस समारोह के लिए एक सरकारी स्कूल के खेल मैदान के इस्तेमाल की अनुमति लेने के लिए सरकार को 5 लाख रुपये की राशि का भुगतान करना पड़ा। हाईकोर्ट ने हमीरपुर के बरसर स्थित सरकारी स्कूल के मैदान में राज्यस्तरीय स्वतंत्रता दिवस समारोह की अनुमति देते हुए छात्रों के वेलफेयर फंड में 5 लाख रुपये जमा कराने की शर्त रखी थी।
समारोह में सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश न्यायमूर्ति एमएम सुंदरेश और हिमाचल हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति गुरमीत सिंह संधावालिया समेत कई न्यायिक हस्तियां मौजूद रहीं। न्यायमूर्ति सुंदरेश ने कानून के विद्यार्थियों को सामाजिक बदलाव का वाहक बनने और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसी नई तकनीकों के लिए तैयार रहने का संदेश दिया।
