प्रागपुर: पशु चिकित्सालय की स्वीकृत राशि स्थानांतरित होने पर भड़के ग्रामीण, कोर्ट जाने की दी चेतावनी
भाजपा प्रागपुर मंडल अध्यक्ष विनोद शर्मा ने प्रदेश सरकार पर जुबानी हमला करते हुए कहा कि प्रदेश सरकार खुद कोई नई योजना नहीं दे रही है और भाजपा सरकार के कार्यकाल में स्वीकृत की गई योजनाओं को भी बंद कर रही है।
विनोद शर्मा ने कहा कि भाजपा सरकार के समय पंचायत दोदूँ राजपूता (तत्कालीन पंचायत कोलापुर) के दुर्गम क्षेत्र के लिए ग्रामीणों ने विधायक विक्रम सिंह ठाकुर से पशु चिकित्सालय की मांग की थी। उस समय उद्योग मंत्री रहे विक्रम सिंह ठाकुर ने पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर की सरकार से इस पशु चिकित्सालय को स्वीकृत करवाया था।
इसके पश्चात विभाग द्वारा जनता से संपर्क कर भूमि उपलब्ध करवाने का आग्रह किया गया, ताकि पशु चिकित्सालय के लिए बजट जारी किया जा सके। इस पर स्वर्गीय मोहिंदर सिंह एवं उनके परिजनों ने मुख्य मार्ग पर लगभग सवा कनाल भूमि विभाग के नाम रजिस्ट्री करवाई। लेकिन विभाग के बड़े अधिकारियों की लापरवाही के कारण भूमि का इंतकाल नहीं हो पाया। इसी बीच स्वर्गीय मोहिंदर सिंह एवं उनके पुत्र का देहांत हो गया, जिससे उक्त स्थान पर भवन निर्माण को लेकर समस्या उत्पन्न हो गई।
इस स्थिति को देखते हुए ग्रामीणों ने एक बार फिर विभाग के नाम अपनी 10 मरले निजी भूमि दान कर दी। हालांकि, टेंडर प्रक्रिया के दौरान लोक निर्माण विभाग ने अधिक खर्च का हवाला देकर इसे खारिज कर दिया।
इसके बाद तीसरी बार ग्रामीणों ने पशु चिकित्सालय के लिए शांतला तथा लोक निर्माण विभाग कोटला बेहड़ के अधिकारियों को सड़क किनारे एक अन्य स्थान दिखाकर 10 मरले भूमि विभाग के नाम करवाई, ताकि भवन निर्माण कार्य शुरू हो सके। लेकिन दुर्भाग्यवश, इसी बीच पूर्व में स्वीकृत धनराशि को विभाग द्वारा धर्मशाला स्थानांतरित कर दिया गया।
इस बीच प्रधान मुकेश कुमार, उप-प्रधान विनोद मेहता, वार्ड पंच रामकृष्ण, बाल कृष्ण, रवि कांत, रमेश कुमार, सकिंदर देवी, चमन लाल, वीरेंद्र कुमार, किशोरी लाल, बिपिन कुमार, शिव पाल, नवीन राणा, पारी, आशा राणा, शिव कुमार, राम स्वरूप, रत्तन चंद, अश्वनी कुमार, जोगिंदर कुमार एवं अनिल कुमार ने प्रदेश सरकार और संबंधित अधिकारियों को सख्त चेतावनी दी है कि यदि आगामी बजट में इस पशु चिकित्सालय के लिए बजट का प्रावधान नहीं किया गया, तो पंचायतवासी मजबूर होकर न्यायालय का दरवाजा खटखटाएंगे। साथ ही उन्होंने कहा कि जिन अधिकारियों की लापरवाही के कारण ग्रामीणों को यह परेशानी झेलनी पड़ी है, उन्हें नाम सहित न्यायालय में पेश किया जाएगा।
