जल जनित रोगों की रोकथाम के लिए जल शक्ति विभाग ने कसी कमर
बरसात के मौसम में लोगों को जलजनित रोगों से बचाने और दूषित जलस्त्रोतों की पहचान के लिए जल शक्ति विभाग ने कमर कस ली है। पानी के स्त्रोतों से जल के नमूने एकत्रित किए जा रहे हैं और उन्हें परीक्षण में जल की गुणवत्ता सही होने के बाद ही लोगों को इसके उपयोग की अनुमति दी जा रही है। विभाग के ब्लॉक रिसोर्स को-ऑर्डिनेटर जयदेव ने सोमवार को ग्राम पंचायत देवठी और चामत-भड़ेच में पानी के नमूने एकत्रित किए।
उल्लेखनीय है कि बरसात के मौसम में दूषित जल के उपयोग से कई प्रकार के जलजनित रोगों के फैलने का खतरा बना रहता है। इस मौसम में कई जलजनित रोग हर वर्ष जिला प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग और जल शक्ति विभाग की मुश्किलों को बढ़ाते हैं, लेकिन इस वर्ष विभाग ने इसके लिए ठोस कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। पेयजल स्त्रोतों की जांच की जा रही है ताकि समय रहते दूषित पानी का पता लगाया जा सके और लोग इसके सेवन से बच सकें।
जल शक्ति विभाग के उच्चाधिकारियों के आदेशों पर बीआरसी जयदेव ने देवठी व चामत-भड़ेच पंचायतों के जलस्त्रोतों से पानी के नमूने एकत्रित किए। जयदेव ने बताया कि फील्ड टेस्ट किट(एफटीके) के माध्यम से उसी वक्त पानी की गुणवत्ता का पता लगाया जा सकता है। उन्होंने बताया कि जिन स्त्रोतों या हैंडपंपों का पानी पीने लायक नहीं होता, उन पर विभाग द्वारा चेतावनी बोर्ड स्थापित किए जाते हैं और पंचायतों व स्थानीय निकायों के संबंधित जनप्रतिनिधियों को इसकी सूचना दी जाती है ताकि वह लोगों को जागरूक कर सकें।
