कांगड़ा शहरी निकाय चुनावों ने बढ़ाई भाजपा की चिंता, 31 मई पर टिकी सबकी नजर
हिमाचल प्रदेश के सबसे अहम राजनीतिक जिला कांगड़ा में शहरी निकाय चुनावों के नतीजों ने प्रदेश की सियासत का पारा बढ़ा दिया है। सत्ता की दिशा तय करने वाले कांगड़ा में कांग्रेस का प्रदर्शन भाजपा के लिए चिंता का कारण बनता दिख रहा है। पांच नगर परिषदों में से चार पर कांग्रेस ने मजबूत पकड़ बनाई है, जबकि भाजपा केवल नगरोटा बगवां में बढ़त बनाए रखने में सफल रही है।
सबसे ज्यादा चर्चा कांगड़ा नगर परिषद को लेकर हो रही है, जहां भाजपा बड़ी मुश्किल से क्लीन स्वीप होने से बच पाई है। वहीं सांसद राजीव भारद्वाज के गृह क्षेत्र नूरपुर में भी पार्टी का प्रदर्शन उम्मीदों पर खरा नहीं उतर सका। इसी तरह देहरा और ज्वालामुखी में भी भाजपा को खास सफलता नहीं मिली। इन नतीजों ने भाजपा संगठन के भीतर मंथन की जरूरत को और बढ़ा दिया है। राजनीतिक जानकार मान रहे हैं कि अगर कांगड़ा जैसे निर्णायक जिले में पार्टी का प्रदर्शन कमजोर रहता है तो 2027 का विधानसभा चुनाव भाजपा के लिए आसान नहीं होगा।
अब सबकी निगाहें 31 मई को आने वाले नगर निगम चुनाव परिणामों पर टिकी हुई हैं। चार नगर निगमों में से दो पालमपुर और धर्मशाला कांगड़ा जिले में आते हैं। ऐसे में भाजपा को उम्मीद है कि यहां बेहतर प्रदर्शन कर पार्टी राजनीतिक संदेश देने में कामयाब होगी। ये चुनाव पार्टी सिंबल पर लड़े गए हैं, इसलिए इन्हें 2027 विधानसभा चुनाव का सेमीफाइनल माना जा रहा है। यदि नगर निगम चुनावों में भी भाजपा के नतीजे उम्मीद के मुताबिक नहीं आते, तो प्रदेश नेतृत्व पर सवाल उठना तय माना जा रहा है। पार्टी के भीतर भी नेतृत्व को लेकर तीखे सवाल खड़े हो सकते हैं। हालांकि फिलहाल भाजपा के वरिष्ठ नेता जीत का दावा कर रहे हैं। अब इंतजार 31 मई का है, जब यह साफ होगा कि किसे राहत मिलेगी और किसे बड़ा राजनीतिक झटका लगेगा।
