•   Tuesday Feb 27
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Rishikesh: THDCIL gifts eye care equipment to Vivekananda Nethralaya Hospital, Dehradun
In National News

ऋषिकेश: टीएचडीसीआईएल ने विवेकानंद नेत्रालय अस्पताल देहरादून को भेंट किए नेत्र देखभाल उपकरण

टीएचडीसी इंडिया लिमिटेड के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक आरके विश्नोई ने बताया कि कंपनी के कॉरपोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व के अंतर्गत सभी को गुणवत्तापूर्वक स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के दिशा में आगे बढ़ते हुए विवेकानंद नेत्रालय आई हॉस्पिटल देहरादून के नए ऑपरेशन थिएटर के लिए जीस माइक्रोस्कोप मॉडल ओपीएमआई लुमेरा 700 मशीन प्रदान की है।  जे. बेहेरा, निदेशक (वित्त) ने 24 फरवरी को मशीन का उद्घाटन किया, जो टीएचडीसी इंडिया लिमिटेड की सामाजिक जिम्मेदारी और विजन को सार्वभौमिक स्वास्थ्य सेवा तक पहुंचाने की दृढ़ संकल्पना को दर्शाता है।     विश्नोई ने जीवन में अच्छे स्वास्थ्य की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डालते हुए कहा कि एक सामाजिक रूप से जिम्मेदार संगठन के रूप में, टीएचडीसी इंडिया लिमिटेड निरंतर प्रदेश में स्वास्थ्य सेवा की चुनौतियों का सामना करने के लिए विभिन्न सीएसआर पहलुओं के माध्यम से प्रयासरत है। इसमें टिहरी जिले के दीन गांव में हंस फाउंडेशन के माध्यम से एक एलोपैथिक डिस्पेंसरी कासंचालन, सीमा डेंटल कॉलेज ऋषिकेश; एम्स, ऋषिकेश; और निर्मल आश्रम नेत्रालय, ऋषिकेश के साथ स्वास्थ्य शिविर आयोजित करना आदि शामिल है। टीएचडीसी इंडिया लिमिटेड जिला स्वास्थ्य अधिकारियों द्वारा अनुरोध किये जाने पर  समय-समय पर विभिन्न चिकित्सा वस्तुएं और उपकरण प्रदान करके राज्य सरकार के स्वास्थ्य बुनियादी ढांचे का समर्थन भी करता है।    उद्घाटन समारोह के दौरान जे. बेहेरा ने बताया कि टीएचडीसी इंडिया लिमिटेड ने अपनी सीएसआर योजना के अंतर्गत विवेकानंद अस्पताल, देहरादून के लिए ज़ीस माइक्रोस्कोप मॉडल ओपीएमआई लुमेरा 700 की खरीदारी के लिए 1.25 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान की । इसका उद्देश्य उत्तराखंड के दूरदराज क्षेत्रों में बसे समुदायों और उत्तम स्वास्थ्य सेवाओं से वंचित व्यक्तियों को सर्वोत्तम श्रेणी की नेत्र देखभाल सुविधाएं प्रदान करना है 7 उत्तराखंड के साथ-साथ इसमें उत्तर प्रदेश के कई जिले जैसे बिजनौर, शामली, मुजफ्फरनगर, और सहारनपुर आदि भी शामिल हैं। यह नई मशीन नेत्र संबंधी बीमारियों से पीड़ित लोगों के लिए एक वरदान के रूप में कार्य करेगी, जिससे मोतियाबिंद सर्जरी, ग्लूकोमा उपचार, रेटिना सर्जरी, और कॉर्निया प्रत्यारोपण जैसे उच्च गुणवत्ता के उपचार और प्रक्रियाएंभी संभव हैं।    टीएचडीसी अपने सामाजिक उत्तरदायित्व  को पूर्ण करते हुए उत्तराखंड के पहाड़ी समुदायों के लिए आंखों की बीमारियों का समाधान करने, स्वास्थ्य संबंधित सुविधाएं कम लागत में उपलब्ध कराने के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाता आया है। उद्घाटन समारोह के दौरान अमरदीप, महाप्रबंधक तथा टीएचडीसी इंडिया लिमिटेड व विवेकानंद नेत्रालय अस्पताल, देहरादून के अन्य अधिकारी भी उपस्थित रहे।

 'Dalhousie' boasts of unique history and immense beauty.
In Vishesh

अनूठा इतिहास और अथाह खूबसूरती समेटे हुए है 'डलहौजी'

देवभूमि हिमाचल प्रदेश पर्यटन की दृष्टि से तो खूबसूरत है ही, यहां का इतिहास भी शानदार है। ब्रिटिश राज के समय हिमाचल के कई शहरों को अंग्रेजों ने विकसित किया था जहां आज भी उनकी छाप दिखाई देती है। खुद में अनूठा इतिहास समेटे ऐसा ही एक खूबसूरत शहर है डलहौजी। हिमाचल का डलहौजी लोकप्रिय विश्व पर्यटन केंद्र है जो भारतीय और अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों को आकर्षित करता है। यहां स्कॉटिश और विक्टोरियन वास्तुकला की हवा की महक और परिवेश ब्रिटिश काल की याद दिलाते है। अंग्रेज यहां की प्राकृतिक सुंदरता को देखकर मंत्रमुग्ध हो उठे थे। डलहौजी हिल स्टेशन गर्मियों के समय अंग्रेजों के सबसे पसंदीदा स्थानों में से एक था, जिसकी वजह से इस क्षेत्र में राजसी विक्टोरियन शैली दिखाई देती है। डलहौजी देश के भीड़ वाले शहरों से दूर अपनी तरह का एक अद्भुत शहर है जो आपको प्रकृति की गोद में होने का अनुभव करवाता है और एक प्रदूषण मुक्त वातावरण प्रदान करता है। डलहौजी को हिमाचल प्रदेश की चम्बा घाटी का प्रवेश द्वार माना जाता है। अंग्रेजी हुकूमत के समय एक स्वास्थ्यव?र्द्धक क्षेत्र के रूप में उभरा डलहौजी आज विश्वभर में एक सुप्रसिद्ध पर्यटक स्थल के रूप में जाना जाता है। यहां पंजपूला, सुभाष बावड़ी, सतधारा व कलातोप खजियार अभयारण्य आदि पर्यटक स्थल विद्यमान हैं। लार्ड डलहौजी के नाम पर हुआ शहर का नामकरण    डलहौजी 1854 में अस्तित्व में आया था जब ब्रिटिश शासन के दौरान पांच पहाड़ियों को चंबा के राजा से प्राप्त किया गया। बैलून, कथलग, पोटरियां, टिहरी और बकरोटा इन खूबसूरत पांच पहाड़ियों पर डलहौजी बसा है। सन 1854 में ब्रिटिश सेना के कर्नल नेपियर ने डलहौजी को ब्रिटिश सेना और अधिकारियों के लिए यहां की जलवायु को देखते हुए हेल्थ रिसोर्ट के रूप में चुना था। डलहौजी पहले पंजाब के गुरदासपुर के अंतर्गत आता था, लेकिन 1966 में हिमाचल प्रदेश के पुनर्गठन के समय हिमाचल के चंबा में शामिल हो गया। डलहौजी का नाम लार्ड मैकलियोड के कहने पर 1854 में भारत के तत्कालीन वायसराय लार्ड डलहौजी के नाम पर रखा गया, जबकि लार्ड डलहौजी कभी भी डलहौजी नहीं आए। 1863 में जीपीओ जिसे गांधी चौक के नाम से भी जाना जाता है, यहां पहले चर्च सेंट जॉन का निर्माण किया गया। 1870 में डलहौजी में बुलज हेड के नाम से पहला होटल बना जिसे अब होटल माउंट व्यू के नाम से जाना जाता है। 1873 में रविंद्र नाथ टैगोर डलहौजी आए और उन्हें गीतांजलि लिखने की प्रेरणा मिली। 1884 में रुडयार्ड किपलिंग डलहौजी आए। तभी से यह प्रसिद्ध पर्यटक स्थल के रूप में जाना जाने लगा।  1954 में तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू डलहौजी के सौ वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य पर होने वाले कार्यक्रम में भाग लेने डलहौजी आए। 1959 में तिब्बती शरणार्थी डलहौजी में बसे। सन 1962 ,1988 में दलाई लामा ने भी डलहौजी का दौरा किया। 1966 में जब से डलहौजी हिमाचल प्रदेश का एक हिस्सा बना है तब से यह दुनिया के एक लोकप्रिय पर्यटन स्थल के रूप में जाना- जाने लगा है।1937 में सुभाष चंद्र बोस डलहौजी स्वास्थ्य लाभ के लिए आए थे। नेताजी का रहा है खास नाता 1937 में जब अंग्रेजों की कैद में रहते हुए नेताजी सुभाष चंद्र बोस को क्षय रोग हो गया था तब नेताजी डलहौजी आये थे। क्षय रोग होने के कारण अंग्रेजों ने उन्हें रिहा कर दिया था और रिहा होने के बाद वे डलहौजी आ गए थे। यहां रहकर उनके स्वास्थ्य में सुधार हुआ और उन्हें काफी राहत मिली। नेताजी यहां लगभग 5 महीने रुके थे और वे जिस होटल और कोठी में ठहरे थे, वह आज भी मौजूद हैं। उनके द्वारा इस्तेमाल किए गए बेड, कुर्सी, टेबल और अन्य सामान भी संभालकर रखा गया है। नेताजी जिस कमरे में ठहरे थे, वहां अब लोगों का जाना वर्जित है। नेताजी डलहौजी के सबसे पुराने गांधी चौक पर स्थित होटल मेहर के कमरा नंबर 10 में रहे थे। इसी दौरान जैन धर्मवीर को नेताजी के डलहौजी का आने का पता चल गया और उन्होंने नेताजी से गांधी चौक के पास पंजपुला मार्ग पर स्थित कोठी कायनांस में रहने का आग्रह किया, जिसे नेताजी ने मान लिया। नेताजी होटल छोड़कर कोठी में रहने चले गए। जैन धर्मवीर, नेताजी के सहपाठी रहे कांग्रेस नेता डॉ. धर्मवीर की पत्?नी थीं। कोठी जाते समय नेताजी का शहरवासियों ने भव्य स्वागत किया था। 5 महीने नेताजी डलहौजी में रहे और इस दौरान वे रोजाना करेलनू मार्ग पर सैर करते थे और बावड़ी का पानी ही पीते थे। बावड़ी के पास मौजूद जंगल में बैठकर प्रकृति से संवाद करते थे। नियमित सैर और बावड़ी का पानी पीकर नेताजी को काफी स्वास्थ्य लाभ हुआ। बावड़ी को आज भी सुभाष बावड़ी के नाम से जाना जाता है। शहर के एक चौक का नाम भी नेताजी के नाम पर सुभाष चौक रखा गया है। चौक पर नेताजी की विशाल प्रतिमा लगी हुई है। स्वस्थ होने पर नेताजी डलहौजी से लौट गए थे। सुभाष बावड़ी का जल पीकर स्वस्थ हुए थे नेताजी सुभाष बावड़ी डलहौजी में गांधी चौक से एक किमी दूर स्थित एक ऐसी जगह है जिसका नाम प्रसिद्ध स्वतंत्रता सेनानी सुभाष चंद्र बोस के नाम पर रखा गया।है। यह खूबसूरत स्थान डलहौजी में 6678 फीट की ऊंचाई पर स्थित है और बर्फ से ढके पहाड़ों का खूबसूरत नजारा पेश करता है। सुभाष बावड़ी वो जगह है जहाँ पर सुभाष चंद्र बोस 1937 में स्वास्थ्य की खराबी के चलते आये थे और वो इस जगह पर 7 महीने तक रहे थे। इस जगह पर रह कर वे बिलकुल ठीक हो गए थे। माना जाता है कि सुभाष चंद्र बोस डलहौजी की यात्रा करते थे तो वह इस स्थान पर आते थे। यहाँ पर एक खूबसूरत झरना भी है जो हिमनदी धारा में बहता है। बकरोटा हिल्स में ठहरे थे गुरुदेव रविंद्रनाथ टैगोर बकरोटा हिल्स डलहौजी के सबसे आकर्षक पर्यटन स्थलों में से एक है। बकरोटा हिल्स को अपर बकरोटा के नाम से भी जाना जाता है, यह डलहौज़ी का सबसे ऊंचा इलाका है और यह बकरोटा वॉक नाम की एक सड़क का सर्किल है, जो खजियार की ओर जाती है। पूरा क्षेत्र देवदार के पेड़ों से घिरा हुआ है। अंग्रेजों के समय बकरोटा में कई भव्य इमारतों का निर्माण हुआ था, जो करीब पौने दो सौ साल बाद भी भव्य शैली को कायम रखे हुए हैं। बकरोटा का संबंध रविंद्रनाथ टैगोर से भी रहा है। वह 1873 में 12 वर्ष की आयु में पिता महर्षि देवेंद्र नाथ टैगोर के साथ डलहौजी आए थे और स्नोडन नामक कोठी में ठहरे थे। बकरोटा हिल्स में लोग ट्रैकिंग करना पसंद करते हैं क्योंकि यह खूबसूरत नजारों से भरपूर है।     

 Anjeta-Ellora of Himachal: Where 15 temples were built by cutting a single rock
In Religious

अजंता-एलोरा ऑफ हिमाचल : जहां एक ही चट्टान को काटकर बनाए 15 मंदिर

नैसर्गिक सौंदर्य से परिपूर्ण हिमाचल प्रदेश को देवभूमि के नाम से भी जाना जाता है। यहां अनगिनत धार्मिक स्थल हैं। इस पहाड़ी राज्य के कण-कण में देवी-देवताओं का वास है। ऐसा कोई ही गांव होगा, जहां किसी देवी या देवता को पूजा न जाता हो। यहां की संस्कृति देव संस्कृति है। राज्य के कांगड़ा जिले में ऐसे कई धार्मिक स्थल हैं, जहां हर साल देश-विदेश से हजारों लोग दर्शन करने के लिए आते हैं। ऐसा ही एक घार्मिक स्थल है मसरूर का रॉक कट टैंपल, जिसे हिमाचल का अजंता-एलोरा भी कहा जाता है। यह एक ऐसा धार्मिक स्थल है, जहां एक ही चट्टान को काटकर करीब 15 मंदिर बनाए गए हैं। मंदिरों का यह समूह कांगड़ा जिले के विकास खंड नगरोटा सूरियां के तहत पड़ते गांव मसरूर में स्थित है।  कब और किसने किया निर्माण ... ऐसा माना जाता है कि इनका निर्माण पांडवों द्वारा तब किया गया था, जब वे इन पहाड़ों में यात्रा कर रहे थे। ऐतिहासिक रूप से इन्हें 7वीं और 8वीं शताब्दी का बताया जाता है। साथ ही यह भी कहा जाता है कि संभवत: इसका निर्माण कटोच राजवंश ने कराया होगा, हालांकि उपलब्ध जानकारी बहुत सीमित है। वास्तुशिल्प का अनूठा नमूना.. ये मंदिर सच्चे वास्तुशिल्प चमत्कार हैं, और इन पर बारीकी से नक्काशी की गई है। ये सूर्य, शिव, इंद्र, कार्तिकेय सहित विभिन्न देवताओं को चित्रित करने वाली अविश्वसनीय रूप से विस्तृत मूर्तियों से सुशोभित हैं, और आपको कई देवी रूप भी मिलेंगे।मंदिरों की खोज करते समय, कोई भी इन पवित्र दीवारों के भीतर होने वाले अनुष्ठानों और समारोहों की कल्पना करके समय में पीछे जाने से खुद को रोक नहीं सकता है। वातावरण शांत है, आसपास की पहाड़ियां एक सुरम्य पृष्ठभूमि प्रदान करती हैं, जो इस स्थल की आध्यात्मिक आभा को बढ़ाती है।

 Representatives from University of Canterbury, New Zealand visit Shoolini University for academic cooperation and international education
In Education

कैंटरबरी विश्वविद्यालय, न्यूजीलैंड के प्रतिनिधियों ने शैक्षणिक सहयोग और अंतर्राष्ट्रीय शिक्षा के लिए शूलिनी विश्वविद्यालय का किया दौरा

कैंटरबरी विश्वविद्यालय, न्यूजीलैंड के प्रतिनिधियों ने शैक्षणिक सहयोग और अंतर्राष्ट्रीय शिक्षा के लिए शूलिनी विश्वविद्यालय का दौरा किया। प्रोफेसर ब्रेट बर्क्विस्ट, सहायक कुलपति, एंगेजमेंट, और डॉ. ग्राहम वाइज, अंतर्राष्ट्रीय विकास निदेशक, कैंटरबरी विश्वविद्यालय, न्यूजीलैंड ने छात्रों और संकाय के लिए शैक्षणिक और अनुसंधान के अवसरों को बढ़ाने के उद्देश्य से कई पहलों पर चर्चा करने के लिए शूलिनी का दौरा किया। इस ऐतिहासिक यात्रा के एजेंडे में संयुक्त अनुसंधान सहयोग, व्यवसाय विज्ञान, खाद्य विज्ञान और इंजीनियरिंग के लिए मार्ग कार्यक्रम, साथ ही उत्पाद निर्माण, ऑनलाइन कार्यक्रम और औद्योगिक भागीदारी पर चर्चा शामिल है। अंतर्राष्ट्रीय उपनिदेशक डॉ. रोज़ी धांता ने कहा, "न्यूज़ीलैंड को अपने नए गंतव्य के रूप में देखने से हमारे छात्रों के लिए ढेर सारे अवसर खुलते हैं।" डॉ. रोज़ी ने आगे कहा कि यह पहल हमारे छात्रों के लिए उपलब्ध विकल्पों को महत्वपूर्ण रूप से बढ़ाएगी, जिससे वे सक्षम होंगे। अपनी आगे की पढ़ाई के लिए सर्वश्रेष्ठ अंतर्राष्ट्रीय विश्वविद्यालयों में से चयन करना। कैंटरबरी विश्वविद्यालय के साथ यह सहयोग उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा और अनुसंधान के अवसर प्रदान करने, एक वैश्विक शिक्षण वातावरण की सुविधा प्रदान करने के हमारे प्रयास में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है जो छात्रों को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करता है।

GNA University Secures
In Education

GNA University Secures "Best Emerging University in India Award" at 52nd ISTE National Annual Convention

Bagging yet another feather in its cap, GNA University, known for its strong industrial interface and academic prowess, has been bestowed with the prestigious "Best Emerging University in India Award" at the 52nd ISTE National Annual Convention. The ceremony took place at the esteemed Poojya Doddappa Appa College of Engineering in Kalaburagi, Karnataka. Dr. Vikrant Sharma, Dean of the School of Engineering, Design, and Automation, had the privilege of accepting the accolade on behalf of GNA University. This recognition stands as a testament to the unwavering dedication and relentless pursuit of excellence demonstrated by the university's faculty, staff, and students. Pushing the boundaries in education, research, and innovation, GNA University continues to raise the bar, solidifying its position as a trailblazer in higher education within India. The leadership team, comprising Dr. VK Rattan, Vice-Chancellor, Dr. Hemant Sharma, Pro Vice-Chancellor, and Dr. Monika Hanspal, Dean of Academics, expressed heartfelt gratitude for this esteemed recognition. Their visionary guidance has played a pivotal role in transforming GNA University into a dynamic institution renowned for its academic brilliance and industry-aligned programs. Chancellor S. Gurdeep Singh Sihra shared his sentiments, stating, "We are deeply honored to receive the Best Emerging University in India Award. This accolade underscores our steadfast commitment to academic excellence and industry relevance. We extend our gratitude for the recognition and reaffirm our dedication to nurturing future leaders and innovators." GNA University's remarkable achievement at the 52nd ISTE National Annual Convention serves as a testament to its relentless pursuit of excellence and its unwavering commitment to shaping the future of education in India.

Know what is special in the budget of Sukhu government...
In Breaking News

Himachal Budget 2024 Live: मुख्यमंत्री सुख शिक्षा योजना का ऐलान, जानिए सुक्खू सरकार के बजट में क्या है खास....

" हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू आज बजट पेश करने जा रहे हैं। मुख्यमंत्री बजट में सभी वर्गों को साधने का प्रयास करेंगे। फर्स्ट वर्डिक्ट मीडिया के साथ जानिए सुक्खू सरकार के बजट में क्या है खास "....       Live Update: विधायक ऐच्छिक निधि को 13 लाख से बढ़ाकर 15 लाख करने की घोषणा   --------------------------------------------  Live Update:आउटसोर्स कर्मचारियों को 12 हजार न्यूनतम वेतन देने का ऐलान   ** विधायक निधि 2.10 करोड़ से बढ़ाकर 2.20 करोड़ करने की घोषणा   ** आंगनबाड़ी कार्यकर्ता का मानदेय 500 रूपए बढ़ा, अब मिलेगा 10 हजार का मानदेय   ** मिनी आंगनबाड़ी कार्यकर्ता को 7000, सहायिका 5500, आशा वर्कर को 5500 मिलेंगे   --------------------------------------------  Live Update: राज्य से बाहर खेलकूद प्रतियोगिताओं में भाग लेने वाले विद्यार्थियों को एसपी फेयर और 200 किलोमीटर से अधिक की दूरी के लिए एयर फेयर दिया जाएगा --------------------------------------------    Live Update: प्रारंभिक स्कूलों के खेलों में खिलाड़ियों की डाइट मनी 250 रुपए बढ़ाई *अन्य खिलाड़ियों को 400 रुपए प्रतिदिन, इंटर यूनिवर्सिटी और नेशनल में भाग लेने वाले खिलाड़ियों को 500 रुपए रोजाना, होस्टल में रहने वाले खिलाड़ियों की डाइट मनी 250 से बढ़ाकर 400 रुपए करने की घोषणा    --------------------------------------------  Live Update: कॉमन वेल्थ गेम्स में गोल्ड जीतने पर 50 लाख की राशि बढ़ाकर 3 करोड़ **सिल्वर जीतने पर 30 लाख की राशि को बढ़ाकर 2 करोड़ ** ब्रोंज जीतने पर मिलने वाली 20 लाख की राशि बढ़ाकर एक करोड़ करने का ऐलान -------------------------------------------- Live Update: एशियन गेम्स में गोल्ड जीतने पर मिलने वाली 50 लाख की इनामी राशि को 4 करोड़ किया **सिल्वर मेडल पर 30 लाख के इनाम को बढ़ाकर ढाई करोड़, ब्रोंज मेडल जीतने पर मिलने वाली 30 लाख की राशि को बढ़ाकर डेढ़ करोड़ रुपए करने की घोषणा --------------------------------------------  Live Update: ओलिंपिक गेम्स में गोल्ड मेडल लाने वाले खिलाड़ियों को मिलने वाली 3 करोड़ की राशि बढ़ाकर 5 करोड़, **सिल्वर मेडल विनर को मिलने वाली 2 करोड़ की राशि को 3 करोड़, ब्रोंज मेडल विनर को 1 के बजाए 2 करोड़ रुपए देने का ऐलान --------------------------------------------  Live Update:  बिजली महादेव में होगा 3.2 किलोमीटर लंबाई वाले रोपवे का निर्माण **कालका-शिमला व जोगिंद्रनगर रेलवे लाइन को ब्रॉडगेज में बदलने के लिए सर्वे करेगी सरकार, 10 करोड़ किये जाएंगे खर्च --------------------------------------------    Live Update: पुलिस कर्मियों की 210 रुपए की डाइट मनी को बढ़ाकर 1000 रुपए प्रति माह किया जाएगा ** प्रदेश में HRTC की 327 डीजल बसों को इलेक्ट्रिक में बदला जाएगा, वन विभाग, HRTC और GAD के डीजल वाहनों को भी इलेक्ट्रिक में बदला जाएगा   --------------------------------------------  Live Update: नाहन, अर्की, पालमपुर में पेयजल योजनाओं का काम होगा पूरा  ** 112 करोड़ से योजनाओं का काम किया जाएगा पूरा  ** नौ शहरों में पेयजल योजनाओं का जल्द काम पूरा किया जाएगा ** पेयजल गुणवत्ता जांचने के लिए 69 टैस्टिंग लैब स्थापित की गईं -------------------------------------------- Live Update: PMGSY के तहत 825 किलोमीटर लंबी सड़कें बनेगी **3615 में से 3578 पंचायतों को सड़क सुविधा से जोड़ा गया  ** शेष बची पंचायतों को आगामी वित्त वर्ष में सड़क सुविधा से जोड़ा जाएगा ** वित्त वर्ष में 2683 किलोमीटर लंबी सड़कों का निर्माण होगा, 325 नई सड़कें बनाई जाएंगी **15 बस्तियों को सड़क सुविधा से जोड़ा जाएगा ** प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना के तहत 825 किलोमीटर लंबी सड़कों व आठ पुलों का निर्माण किया जाएगा -------------------------------------------- Live Update: सशक्त होगी हिमाचल की महिलाएं   **महिलाओं को स्टार्टअप शुरू करने के लिए 4 लाख रुपए की सहायता प्रदान करेगी सरकार  ** नई इंडस्ट्रियल पॉलिसी बनाने की घोषणा -------------------------------------------- Live Update: पंचायती राज संस्थाओं सदस्यों के मानदेय में बढ़ोतरी ** जिला परिषद अध्यक्ष को 24000, जिला परिषद उपाध्यक्ष को 18000, सदस्य को 7800 मिलेगा मानदेय ** प्रधान पंचायत को 7200, उपप्रधान को 4800, सदस्य को 750 मिलेगा मानदेय ** नगर निगम महापौर को 24000, उपमहापौर को 18000, पार्षद को 8300 मिलेगा मानदेय ** नगर परिषद अध्यक्ष को 10000 , उपाध्यक्ष को 8400, पार्षद को 4200 मिलेगा मानदेय ** प्रधान नगर परिषद को 8400, उपप्रधान को 6600, सदस्य को 4200 मिलेगा मानदेय   --------------------------------------------   Live Update:  मनरेगा कामगारों की दिहाड़ी 240 से बढ़ाकर 300 रुपए  ** मनरेगा कामगारों की दिहाड़ी में 60 रुपए का इजाफा, CM बोले यह ऐतिहासिक वृद्धि ** हिमाचल में 12 लाख से ज्यादा मनरेगा जॉब कार्डधारक हैं : सीएम सुक्खू ** जिन मनरेगा कामगारों की सालाना आय ढाई लाख से कम हो और साल में 100 दिन मनरेगा में काम किया हो, उन्हें मकान बनाने के लिए 3 लाख रुपए देगी सरकार   --------------------------------------------  Live Update : कंडाघाट में खुलेगा दिव्यांग जनों की उच्च शिक्षा के लिए सेंटर ऑफ एक्सिलेंस  ** इसमें आवासीय सुविधा और खेल मैदान जैसी तमाम सुविधाएं दी जाएंगी --------------------------------------------    Live Update : पढ़ो हिमाचल' अभियान की शुरुआत करने का ऐलान **वित्त वर्ष 2024 में राज्य के 500 शिक्षा संस्थानों में रीडिंग रूम बनाए जाएंगे ** हर पंचायत स्तर पर आधुनिक पुस्तकालय खोलें जाएंगे ** पहले चरण में 493 पुस्तकालय खोलने की योजना -------------------------------------------    Live Update : विधायक और अधिकारी कोई भी स्कूल ले सकेंगे गोद ** मेरा विद्यालय मेरा सम्मान योजना होगी शुरू  ** इसके तहत विधायक और अधिकारी कोई भी स्कूल गोद ले सकेंगे   --------------------------------------------   Himachal Budget 2024 : दूध गंगा योजना के अंतर्गत कांगड़ा के डंगवार में होगी मिल्क प्लांट की स्थापना **इस प्लांट की दूध उत्पादन क्षमता एक लाख लीटर होगी, उसे 3 लाख तक बढ़ाया जाएगा **यहां दूध से विभिन्न उत्पाद तैयार किए जाएंगे : सीएम सुक्खू   --------------------------------------------  Live Update : आगामी वित्तीय वर्ष में छह हजार प्री प्राइमरी शिक्षक होंगे भर्ती  ** इन पदों के लिए नर्सरी टीचर ट्रेनिंग (एनटीटी) करने वाले भी होंगे पात्र   ** आंगनवाड़ी कार्यकर्ता भी होंगी पात्र , ब्रिज कोर्स करवाकर इन्हें प्रशिक्षित किया जाएगा   --------------------------------------------  Live Update : हमीरपुर में स्टेट कैंसर संस्थान खोलने का ऐलान, 100 करोड़ का प्रावधान **प्रदेश के स्वास्थ्य संस्थानों में निजी क्षेत्र के सहयोग से दी जाएगी एक्स-रे की सुविधा ** 2026 के अंत तक हर जिले में इंटीग्रेटेड पब्लिक हेल्थ सेंटर खोले जाएंगे --------------------------------------------   Live Update : मुख्यमंत्री सुख शिक्षा योजना का ऐलान  **सभी विधवाओं के 27 साल तक की आयु के बच्चों की शिक्षा का पूरा खर्चा उठाएगी सरकार  ** मुख्यमंत्री सुख शिक्षा योजना की घोषणा ** इसके अंतर्गत सभी विधवाओं के 27 साल तक की आयु के बच्चे, जिनके परिवार की आय एक लाख से कम हो उनकी शिक्षा का पूरा खर्च सरकार वहन करेगी ** इन्हें विभिन्न व्यवसायिक पाठ्यक्रम कराए जाएंगे ** विधवाओं के 18 साल से कम उम्र के बच्चे के खाते में 1000 रुपए RD में जमा करवाएगी सरकार -------------------------------------------- Live Update : भेड़--बकरी पालन प्रोत्साहन योजना शुरू करेगी सरकार  ** हिमाचल में 8 लाख भेड़ें और 11 लाख बकरियां, इनके लिए FMD वैक्सीनेशन शुरू करेगी सरकार  ** इस योजना पर 10 करोड़ रुपए खर्च करेगी सरकार ---------------------------------------------   Live Update: मछुआरों की आय बढ़ाने के लिए 80 प्रतिशत सब्सिडी देगी सरकार ** मछुआरों को उपदान पर देंगे मोटरसाइकिल 3 व्हीकल : सीएम सुक्खू   ---------------------------------------------   Live Update:CM बोले- एसडीएम को माह में एक बार स्कूलों का रिवीयू करना होगा **राष्ट्रीय शिक्षा नीति के आधार पर शिक्षा नीति लागू की जाएगी **6000 नर्सरी टीचर्स नियुक्त किए जाएंगे और पात्र आंगनवाड़ी को भी मौका मिलेगा ** सभी संस्थानों की वारिष्क रैंकिंग और उनके मुताबिक ग्रांट भी दी जाएंगी।   ---------------------------------------------   Live Update: प्रति व्यक्ति आय 2,35,199 रहने का अनुमान ** सीएम ने कहा कि कृषि क्षेत्र प्रदेश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। प्राकृतिक खेती के लिए किसानों को प्रोत्साहित करने के लिए 680 करोड़ की राजीव गांधी प्राकृतिक खेती स्टार्टअप योजना की घोषणा की। इसके तहत सरकार किसानों से गेहूं और मक्की  40 रुपये प्रतिकिलो की दर से खरीदेगी।    ---------------------------------------------   Live Update: CM बोले- 2024 में 87,788 हजार करोड़ कुल देनदारियां हो गई है, जबकि 2023 में 76,651 हज़ार करोड़ पूर्व सरकार छोड़कर गई ** राजीव गांधी प्राकृतिक खेती शुरू करने की घोषणा ** प्रत्येक पंचायत के 10 किसानों को जहर मुक्त खेती के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा ** 36 हजार किसानों को इस खेती से जोड़ जाएगा ** ऐसे किसानों का 30 क्विंटल अनाज MSP पर खरीदने की घोषणा ** प्राकृतिक विधि से तैयार गेहूं 40 रुपए और मक्की को 30 रुपए किलो के हिसाब से सरकार खरीदेगी   ---------------------------------------------   Live Update : सीएम सुक्खू बोले, आबकारी पॉलिसी में बदलाव से 360 करोड़ की हुई आय **कहा, हरित ऊर्जा में निवेश व रोजगार की अपार संभावनाएं हैं **इस बजट के माध्यम से आत्मनिर्भर हिमाचल की परिकल्पना की गई है ** 2032 तक इस परिकल्पना को साकार किया जाएगा  **वर्तमान सरकार ने संसाधनों की कमी के कारण विकास को धीमा नहीं होने दिया ** राज्य आबकारी पॉलिसी में बदलाव से 360 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी अपेक्षित है  ---------------------------------------------   Live Update  : मुख्यमंत्री बोले हिमाचल को आत्मनिर्भर बनाएंगे, पिछली सरकार के कुप्रबंधन से बिगड़ी आर्थिक सेहत  **इससे कांग्रेस सरकार को झेलनी पड़ रहीं कई चुनौतियां ** कर्मचारियों के वेतन की देनदारी हमारी सरकार पर छोड़ी गई ** हिमाचल को ग्रीन स्टेट बनाने के लिए कई कदम उठाए गए हैं   --------------------------------------------- Live Update  : "2024-25 के बजट अनुमानों को प्रस्तुत करते हुए बोले मुख्यमंत्री, हमने 4 हजार से अधिक बच्चों को चिल्ड्रन ऑफ स्टेट के रूप में अपनाया" राजस्व विभाग में विशेष अदालतों का आयोजन किया गया। वन मंजूरी की प्रक्रियाओं को सरल किया गया। जाठिया देवी में एक अत्याधुनिक टाउनशिप बनाया जाएगा। 31 मार्च तक हिमाचल को ऊर्जा राज्य बनाया जाएगा।    **मुख्यमंत्री ने बजट भाषण में गिनाई सरकार की उपलब्धियां, बोले आपदा प्रभावितों को मिलने वाली राशि 1.30 लाख से बढ़ाकर सात लाख रुपए की, हम चुनावी वादे पूरे करेंगे।   **व्यवस्था परिवर्तन की प्रक्रिया न केवल जारी रहेगी बल्कि इसे और तेज किया जाएगा। **बजट की शुरुआत में ओपीएस और 680 करोड़ रुपए की स्टार्ट अप योजना की उपलब्धि बताया।   -------------------------------------   Live Update  : 2024-25 में नई मंडियों का निर्माण किया जाएगा, मंडियों को अपग्रेड करने के साथ डिजिटाइज्ड भी किया जाएगा ** वेब आधारित कृषि पोर्टल बनाया जाएगा ** उत्कृष्टता केंद्र सब्जी पौधे केंद्र खोला जाएगा ** 1 अप्रैल से गाय के दूध का न्यूनतम समर्थन मूल्य 38 से  बढ़ाकर 45 रुपये प्रति किलो, जबकि भैंस के दूध का खरीद मूल्य 55 रुपये करने की घोषणा की। सीएम ने कहा कि न्यूनतम समर्थन मूल्य पर दूध खरीद करने वाला हिमाचल देश का पहला राज्य है। यदि खुले बाजार में ज्यादा दाम मिलता है तो पशुपालक इसे बाजार में बेचने के लिए स्वतंत्र होगा। 1 अप्रैल से एपीएमसी द्वारा ली जाने वाली फीस दुग्ध सोसाइटियों के लिए माफ की जाएगी। दूध प्रसंस्करण केंद्रों पर 50 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।    ----------------------------------------   Live Update  :  मुख्यमंत्री सुक्खू का बजट भाषण शुरू ** हमने ओपीएस का लाभ कर्मचारियों को दिया ** व्यवस्था परिवर्तन की प्रक्रिया जारी रहेगी ** स्पीति की महिलाओं को 1500 रुपये मिलना शुरू हुआ ** वैश्विक स्थिति का हिमाचल पर असर पड़ा है ** हिमाचल सरकार चुनौतियों का सामना कर रही है  ** आपदा के दौरान हमने अपनी क्षमता साबित की है  ** प्रभावितों को तुरंत राहत पहुंचाई गई है

 Farmers march to Delhi: Uproar at Shambhu border, situation tense 123
In National News

किसानों का दिल्ली कूच: शंभू बॉर्डर पर हंगामा, स्थिति तनावपूर्ण

** पुलिस ने किसानों पर ड्रोन से आंसू के गोले दागे  ** दिल्ली में एक महीने के लिए धारा 144 लागू  फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य की गारंटी, स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशें लागू करने एवं अन्य मांगों को लेकर दिल्ली कूच कर रहे किसानों को पुलिस द्वारा शंभू बॉर्डर पर रोकने से यहां स्थिति तनावपूर्ण हो गई है। शंभू बॉर्डर से कुछ किमी पहले पुलिस ने उन पर ड्रोन से आंसू के गोले दागे हैं। चारों ओर धुआं ही धुआं है। पुलिस किसानों को दिल्ली जाने से रोक रहे हैं तो वहीं किसान दिल्ली जाने की मांग पर अड़े हैं।     किसानों को रोकने के लिए हरियाणा सरकार ने कई जगह तगड़ी नाकेबंदी की है। पुलिस व प्रशासन द्वारा जगह-जगह बैरिकेड लगाए गए हैं और कांटेदार तारों से फेंसिंग की गई है, ताकि किसान दिल्ली न पहुंच सकें। अंबाला का शंभू बॉर्डर किसानों को रोकने के लिए पहली दीवार है। अगर किसान इसे पार कर भी जाते हैं तो आगे भी कई ऐसी जगह हैं जहां उन्हें रोकने की तैयारी की गई है।    वहीं, दिल्ली में उक महीने के लिए धारा 144 लागू कर दी गई है।  लोकसभा चुनाव से ठीक पहले किसानों का यह आंदोलन केंद्र सरकार के लिए बड़ा सिर दर्द साबित हो सकता है।  शंभू बॉर्डर से दिल्ली 215 किमी दूर  शंभू बॉर्डर से दिल्ली 215 किमी दूर है। किसानों को रोकने के लिए सरकार ने शंभू बॉर्डर पर सड़क पर नुकीली कीले बिछाई हैं। इसके अलावा बड़ी-बड़ी कंक्रीट और सीमेंट की दीवारें उन्हें रोकने के लिए लगाई गई हंै। इसके अलावा भारी पुलिस बल बॉर्डर पर तैनात किया गया है।

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हमीरपुर: बिंदल बोले- कांग्रेस सरकार का 13 माह का कार्यकाल पूरी तरह से रहा विफल

In Politics
Hamirpur: Bindal said- 13 months tenure of Congress government was a complete failure.

कहा, 4 फरवरी तक होंगे 'गांव चलो अभियान' के तहत कार्यक्रम लोकसभा चुनावों को लेकर कार्यकर्ताओं को दिए चुनावी टिप्स प्रदेश भर के 7 हजार 990 पोलिंग बूथों पर पार्टी नेतृत्व पहुंचाने का काम करेगी बीजेपी प्रदेश में भाजपा ने लोकसभा चुनावों को लेकर तैयारियां करना शुरू कर दी हैं। इसी को लेकर पार्टी पदाधिकारियों को चुनावों के लिए टिप्स देने के लिए हमीरपुर में प्रदेश किसान मोर्चा पदाधिकारियों की बैठक का आयोजन किया गया। जिसमें भाजपा के द्वारा गांव चलो अभियान के तहत जनसंपर्क करने के लिए रणनीति बनाई गई। बैठक के दौरान प्रदेश भाजपा अध्यक्ष डॉ. राजीव बिंदल ने शिरकत की। इस अवसर पर भाजपा पार्टी के मंडल अध्यक्ष, किसान मोर्चा के पदाधिकारी, पन्ना प्रमुखों के द्वारा ठोस रणनीति बनाई जा रही है। उक्त अभियान 4 फरवरी तक पूरे प्रदेश भर में पार्टी के द्वारा चलाया जा रहा है। बिंदल ने कहा कि प्रदेश भर के सभी बूथों पर पार्टी का नेतृत्व पहुंचे। इसी के चलते भाजपा गांव चलो अभियान शुरू किया है। जिसके तहत प्रदेश भर के सात हजार 990 पोलिंग बूथों पर पार्टी नेतृत्व पहुंचने के लिए काम किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि 4 फरवरी तक प्रदेश भर में अभियान के तहत बैठकों का आयोजन किया जा रहा है। बिंदल ने कांग्रेस सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि कांग्रेस के मंत्री झूठ बोलते हैं और प्रदेश में कांग्रेस सरकार का 13 माह का कार्यकाल पूरी तरह से विफल रहा है। उन्होंने कहा कि एक भी काम प्रदेश सरकार ने जनहितैषी नहीं किया है और अपनी नालायकी की ठीकरा केंद सरकार पर फोड़ने में लगे हुए हैं। बिंदल ने कहा कि कांग्रेस सरकार झूठों की सरकार है और केंद्र से पैसों को लेने का हिसाब तक नहीं देते हैं। बिंदल ने पूछा कि आपदा के दौरान कांग्रेस पार्टी का राष्ट्रीय नेतृत्व कहां रहा है, वहीं बीजेपी के कई बड़े नेता हिमाचल आए हैं और अरबों करोड़ रुपये हिमाचल को दिए हैं।  बिंदल ने कहा कि जेडीयू भाजपा का नेचुरल एलायड है और नितीश कुमार भााजपा के साथ अटल के समय से जुड़े हुए हैं । उन्होंने कहा कि नरेंद्र मोदी ही भविष्य में देश को संभाल सकते हैं, ऐसे दृष्टिकोण से नीतीश कुमार फिर से भाजपा के साथ हैं ।   

मुख्यमंत्री नई दिल्ली एम्स में भर्ती, स्वास्थ्य स्थिति बेहतर

In Health
Chief Minister admitted in New Delhi AIIMS, health condition better

मुख्यमंत्री नई दिल्ली एम्स में भर्ती, स्वास्थ्य स्थिति बेहतर मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू को गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विभाग में कुछ परीक्षणों के लिए शुक्रवार सुबह नई दिल्ली के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान में भर्ती करवाया गया है। विभाग के डॉक्टरों की टीम ने उनके परीक्षण शुरू कर दिए हैं। इस प्रक्रिया में लगभग दो से तीन दिन लग सकते हैं। मुख्यमंत्री की सेहत पहले से बेहतर है, चिंता की कोई बात नहीं है। वह डॉक्टरों की टीम की निगरानी में हैं। मेडिकल बुलेटिन के अनुसार ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू की रिपोर्ट सामान्य हैं। मुख्यमंत्री का स्वास्थ्य स्थिर है। उन्हें उचित आराम की जरूरत है, जिससे वह और तेजी से ठीक होंगे। आईजीएमसी शिमला के डॉक्टरों की सलाह पर मुख्यमंत्री को एम्स में भर्ती करवाया गया है।  

कैंटरबरी विश्वविद्यालय, न्यूजीलैंड के प्रतिनिधियों ने शैक्षणिक सहयोग और अंतर्राष्ट्रीय शिक्षा के लिए शूलिनी विश्वविद्यालय का किया दौरा

In Education
 Representatives from University of Canterbury, New Zealand visit Shoolini University for academic cooperation and international education

कैंटरबरी विश्वविद्यालय, न्यूजीलैंड के प्रतिनिधियों ने शैक्षणिक सहयोग और अंतर्राष्ट्रीय शिक्षा के लिए शूलिनी विश्वविद्यालय का दौरा किया। प्रोफेसर ब्रेट बर्क्विस्ट, सहायक कुलपति, एंगेजमेंट, और डॉ. ग्राहम वाइज, अंतर्राष्ट्रीय विकास निदेशक, कैंटरबरी विश्वविद्यालय, न्यूजीलैंड ने छात्रों और संकाय के लिए शैक्षणिक और अनुसंधान के अवसरों को बढ़ाने के उद्देश्य से कई पहलों पर चर्चा करने के लिए शूलिनी का दौरा किया। इस ऐतिहासिक यात्रा के एजेंडे में संयुक्त अनुसंधान सहयोग, व्यवसाय विज्ञान, खाद्य विज्ञान और इंजीनियरिंग के लिए मार्ग कार्यक्रम, साथ ही उत्पाद निर्माण, ऑनलाइन कार्यक्रम और औद्योगिक भागीदारी पर चर्चा शामिल है। अंतर्राष्ट्रीय उपनिदेशक डॉ. रोज़ी धांता ने कहा, "न्यूज़ीलैंड को अपने नए गंतव्य के रूप में देखने से हमारे छात्रों के लिए ढेर सारे अवसर खुलते हैं।" डॉ. रोज़ी ने आगे कहा कि यह पहल हमारे छात्रों के लिए उपलब्ध विकल्पों को महत्वपूर्ण रूप से बढ़ाएगी, जिससे वे सक्षम होंगे। अपनी आगे की पढ़ाई के लिए सर्वश्रेष्ठ अंतर्राष्ट्रीय विश्वविद्यालयों में से चयन करना। कैंटरबरी विश्वविद्यालय के साथ यह सहयोग उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा और अनुसंधान के अवसर प्रदान करने, एक वैश्विक शिक्षण वातावरण की सुविधा प्रदान करने के हमारे प्रयास में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है जो छात्रों को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करता है।

नई दिल्ली: हिमाचल की बेटी रितु नेगी व शमी सहित 26 खिलाड़ी अर्जुन अवॉर्ड से सम्मानित

In Sports
New Delhi: 26 players including Himachal's daughter Ritu Negi and Shami honored with Arjun Award. 123

-बैडमिंटन स्टार चिराग शेट्टी और शात्विकसाईराज रंकीरेड्डी को खेल रत्न सम्मान -नई दिल्ली में आयोजित मारोह में राष्ट्रपति द्रोपती मुर्मू ने किया सम्मानित  राष्ट्रपति द्रोपती मुर्मू ने आज नई दिल्ली में खिलाड़ियों को वर्ष 2023 के खेल रत्न और अर्जुन अवॉर्ड से सम्मानित किया। सबसे बड़ा खेल का सम्मान खेल रत्न अवॉर्ड बैडमिंटन की स्टार जोड़ी चिराग शेट्टी और शात्विकसाईराज रंकीरेड्डी को मिला, जबकि क्रिकेटर मोहम्मद शमी व हिमाचल की बेटी कबड्डी स्टार रितु नेगी सहित 26 खिलाड़ियों को अर्जुन अवॉर्ड से सम्मानित किया गया। सिरमौर जिले के गिरीपार से संबंध रखने वाली रितु नेगी वर्तमान में भारतीय महिला कबड्डी टीम की कप्तान हैं।     पुरस्कार समारोह से पहले शमी ने कहा था, 'यह पुरस्कार एक सपना है, जिंदगी बीत जाती है और लोग यह पुरस्कार नहीं जीत पाते। मुझे खुशी है कि मुझे इस पुरस्कार के लिए नामांकित किया गया है।'    बता दें कि भारतीय तेज गेंदबाज मोहम्मद शमी ने बीते साल हुए क्रिकेट वर्ल्ड कप में शानदार प्रदर्शन करते हुए टूर्नामेंट में सबसे अधिक 24 विकेट झटके थे।

स्टीव जॉब्स से विराट कोहली तक, नीम करोली बाबा के आश्रम में सब नतमस्तक

In First Blessing
NEEM-KARORI-BABA

  नीम करोली बाबा के आश्रम में स्टीव जॉब्स और मार्क जुकरबर्ग को मिली आध्यात्मिक शान्ति भारत में कई ऐसे पावन तीर्थ हैं, जहां पर श्रद्धा एवं भक्ति के साथ जाने मात्र से व्यक्ति के समस्त मनोरथ पूरे हो जाते हैं। ऐसा ही एक पावन तीर्थ देवभूमि उत्तराखंड की वादियों में है, जिसे लोग 'कैंची धाम' के नाम से जानते हैं। कैंची धाम के नीब करौरी बाबा (नीम करौली) की ख्याति विश्वभर में है। नैनीताल से लगभग 65 किलोमीटर दूर कैंची धाम को लेकर मान्यता है कि यहां आने वाला व्यक्ति कभी भी खाली हाथ वापस नहीं लौटता। यहां पर हर मन्नत पूर्णतया फलदायी होती है। यही कारण है कि देश-विदेश से हज़ारों लोग यहां हनुमान जी का आशीर्वाद लेने आते हैं। बाबा के भक्तों में एक आम आदमी से लेकर अरबपति-खरबपति तक शामिल हैं। बाबा के इस पावन धाम में होने वाले नित-नये चमत्कारों को सुनकर दुनिया के कोने-कोने से लोग यहां पर खिंचे चले आते हैं। बाबा के भक्त और जाने-माने लेखक रिचर्ड अल्बर्ट ने मिरेकल आफ लव नाम से बाबा पर पुस्तक लिखी है। इस पुस्तक में बाबा नीब करौरी के चमत्कारों का विस्तार से वर्णन है। इनके अलावा हॉलीवुड अभिनेत्री जूलिया राबर्ट्स, एप्पल के फाउंडर स्टीव जाब्स और फेसबुक के संस्थापक मार्क जुकरबर्ग जैसी बड़ी विदेशी हस्तियां बाबा के भक्त हैं।  कुछ माह पूर्व स्टार क्रिकेटर विराट कोहली और उनकी पत्नी और अभिनेत्री अनुष्का शर्मा के यहां पहुंचते ही इस धाम को देखने और बाबा के दर्शन करने वालों की होड़ सी लग गई। 1964 में बाबा ने की थी आश्रम की स्थापना  नीम करोली बाबा या नीब करोली बाबा की गणना बीसवीं शताब्दी के सबसे महान संतों में की जाती है। इनका जन्म स्थान ग्राम अकबरपुर जिला फ़िरोज़ाबाद उत्तर प्रदेश में हुआ था। कैंची, नैनीताल, भुवाली से 7 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। बाबा नीब करौरी ने इस आश्रम की स्थापना 1964 में की थी। बाबा नीम करौरी 1961 में पहली बार यहां आए और उन्होंने अपने पुराने मित्र पूर्णानंद जी के साथ मिल कर यहां आश्रम बनाने का विचार किया। इस धाम को कैंची मंदिर, नीम करौली धाम और नीम करौली आश्रम के नाम से जाना जाता है। उत्तराखंड में हिमालय की तलहटी में बसा एक छोटा सा आश्रम है नीम करोली बाबा आश्रम। मंदिर के आंगन और चारों ओर से साफ सुथरे कमरों में रसीली हरियाली के साथ, आश्रम एक शांत और एकांत विश्राम के लिए एकदम सही जगह प्रस्तुत करता है। यहाँ कोई टेलीफोन लाइनें नहीं हैं, इसलिए किसी को बाहरी दुनिया से परेशान नहीं किया जा सकता है। श्री हनुमान जी के अवतार माने जाने वाले नीम करोरी बाबा के इस पावन धाम पर पूरे साल श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है, लेकिन हर साल 15 जून को यहां पर एक विशाल मेले व भंडारे का आयोजन होता है। यहां इस दिन इस पावन धाम में स्थापना दिवस मनाया जाता है। कई चमत्कारों के किस्से सुन खींचे आते है भक्त  मान्यता है कि बाबा नीम करौरी को हनुमान जी की उपासना से अनेक चामत्कारिक सिद्धियां प्राप्त थीं। लोग उन्हें हनुमान जी का अवतार भी मानते हैं। हालांकि वह आडंबरों से दूर रहते थे। न तो उनके माथे पर तिलक होता था और न ही गले में कंठी माला। एक आम आदमी की तरह जीवन जीने वाले बाबा अपना पैर किसी को नहीं छूने देते थे। यदि कोई छूने की कोशिश करता तो वह उसे श्री हनुमान जी के पैर छूने को कहते थे। बाबा नीब करौरी के इस पावन धाम को लेकर तमाम तरह के चमत्कार जुड़े हैं। जनश्रुतियों के अनुसार, एक बार भंडारे के दौरान कैंची धाम में घी की कमी पड़ गई थी। बाबा जी के आदेश पर नीचे बहती नदी से कनस्तर में जल भरकर लाया गया। उसे प्रसाद बनाने हेतु जब उपयोग में लाया गया तो वह जल घी में बदल गया। ऐसे ही एक बार बाबा नीब करौरी महाराज ने अपने भक्त को गर्मी की तपती धूप में बचाने के लिए उसे बादल की छतरी बनाकर, उसे उसकी मंजिल तक पहुंचवाया। ऐसे न जाने कितने किस्से बाबा और उनके पावन धाम से जुड़े हुए हैं, जिन्हें सुनकर लोग यहां पर खिंचे चले आते हैं। बाबा के दुनियाभर में 108 आश्रम  बाबा नीब करौरी को कैंची धाम बहुत प्रिय था। अक्सर गर्मियों में वे यहीं आकर रहते थे। बाबा के भक्तों ने इस स्थान पर हनुमान का भव्य मन्दिर बनवाया। उस मन्दिर में हनुमान की मूर्ति के साथ-साथ अन्य देवताओं की मूर्तियाँ भी हैं। यहां बाबा नीब करौरी की भी एक भव्य मूर्ति स्थापित की गयी है। बाबा नीब करौरी महाराज के देश-दुनिया में 108 आश्रम हैं। इन आश्रमों में सबसे बड़ा कैंची धाम तथा अमेरिका के न्यू मैक्सिको सिटी स्थित टाउस आश्रम है। स्टीव जॉब्स को आश्रम से मिला एप्पल के लोगो का आईडिया ! भारत की धरती सदा से ही अध्यात्म के खोजियों को अपनी ओर खींचती रही है। दुनिया की कई बड़ी हस्तियों में भारत भूमि पर ही अपना सच्चा आध्यात्मिक गुरु पाया है। एप्पल कंपनी के संस्थापक स्टीव जॉब्स 1974 से 1976 के बीच भारत भ्रमण पर निकले। वह पर्यटन के मकसद से भारत नहीं आए थे, बल्कि आध्यात्मिक खोज में यहां आए थे। उन्हें एक सच्चे गुरु की तलाश थी।स्टीव पहले हरिद्वार पहुंचे और इसके बाद वह कैंची धाम तक पहुंच गए। यहां पहुंचकर उन्हें पता लगा कि बाबा समाधि ले चुके हैं। कहते है कि स्टीव को एप्पल के लोगो का आइडिया बाबा के आश्रम से ही मिला था। नीम करौली बाबा को कथित तौर पर सेब बहुत पसंद थे और यही वजह थी कि स्टीव ने अपनी कंपनी के लोगों के लिए कटे हुए एप्पल को चुना। हालांकि इस कहानी की सत्यता के बारे में कुछ नहीं कहा जा सकता है। जुकरबर्ग को मिली आध्यात्मिक शांति, शीर्ष पर पहुंचा फेसबुक  बाबा से जुड़ा एक किस्सा फेसबुक के मालिक मार्क जुकरबर्ग ने 27 सितंबर 2015 को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को बताया था, तब पीएम मोदी फेसबुक के मुख्यालय में गए थे। इस दौरान जुकरबर्ग ने पीएम को भारत भ्रमण की बात बताई। उन्होंने कहा कि जब वे इस संशय में थे कि फेसबुक को बेचा जाए या नहीं, तब एप्पल के फाउंडर स्टीव जॉब्स ने इन्हें भारत में नीम करोली बाबा के स्थान पर  जाने की सलाह दी थी। जुकरबर्ग ने बताया था कि वे एक महीना भारत में रहे। इस दौरान वह नीम करोली बाबा के मंदिर में भी गए थे। जुकरबर्ग आए तो यहां एक दिन के लिए थे, लेकिन मौसम खराब हो जाने के कारण वह यहां दो दिन रुके थे। जुकरबर्ग मानते हैं कि भारत में मिली अध्यात्मिक शांति के बाद उन्हें फेसबुक को नए मुकाम पर ले जाने की ऊर्जा मिली। बाबा की तस्वीर को देख जूलिया ने अपनाया हिन्दू धर्म  हॉलिवुड की मशहूर अदाकारा जूलिया रॉबर्ट्स ने 2009 में हिंदू धर्म अपना लिया था। वह फिल्म ‘ईट, प्रे, लव’ की शूटिंग के लिए भारत आईं थीं। जूलिया रॉबर्ट्स ने एक इंटरव्यू में यह खुलासा किया था कि वह नीम करौली बाबा की तस्वीर से इतना प्रभावित हुई थीं कि उन्होंने हिन्दू धर्म अपनाने का फैसला कर डाला। जूलिया इन दिनों हिन्दू धर्म का पालन कर रही हैं।    

मूवी RRR के नाटू-नाटू सॉन्ग ने जीता ऑस्कर अवॉर्ड

In Entertainment
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एसएस राजामौली की चर्चित मूवी ररर के नाटू-नाटू गाने को ऑस्कर अवॉर्ड मिला है। भारत के लिए ये ऐतिहासिक पल है। फिल्ममेकर नाटू नाटू ने ओरिजनल सॉन्ग कैटेगिरी में अवॉर्ड जीता है। एमएम कीरावणी अवॉर्ड लेते हुए बेहद एक्साइटेड नजर आए। उनकी स्पीच भी चर्चा में बनी हुई है। इस जीत के बाद पूरे देश में खुशी का माहौल है। मेकर्स ने RRR मूवी के ट्विटर हैंडल से ट्वीट कर जीत की खुशी जताई है। उन्होंने लिखा- 'हम धन्य हैं कि आरआरआर सॉन्ग नाटू-नाटू के साथ बेस्ट सॉन्ग कैटेगरी में भारत का पहला ऑस्कर लाने वाली पहली फीचर फिल्म है। कोई भी शब्द इस अलौकिक पल को बयां नहीं कर सकते। धन्यवाद। जय हिंद। 'वहीं 'नाटू नाटू' के ऑस्कर जीतने पर फिल्म के लीड एक्टर जूनियर एनटीआर ने भी रिएक्ट किया है। उन्होंने कहा- 'मेरे पास अपनी खुशी व्यक्त करने के लिए शब्द नहीं हैं। ये सिर्फ आरआरआर की जीत नहीं है बल्कि एक देश के तौर पर भारत की जीत है। ये तो अभी शुरुआत है कि भारतीय सिनेमा कितनी दूर जा सकता है। एमएम कीरावनी और चंद्रबोस को बधाई।'

कांग्रेस की दूरी, कहा - आयोजन 'नरेंद्र मोदी फंक्शन'

In News
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  अयोध्या के राम मंदिर में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के कार्यक्रम से कांग्रेस सहित कई विपक्षी दलों ने दूरी बनाई है। कांग्रेस का राम मंदिर में न जाने को लेकर कहना है कि यह चुनावी, राजनीतिक, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और आरएसएस का कार्यक्रम है। कांग्रेस का कहना है कि राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ और बीजेपी ने 22 जनवरी के कार्यक्रम को पूरी तरह से राजनीतिक और 'नरेंद्र मोदी फंक्शन' बना दिया है।  यह चुनावी कार्यक्रम है और इसके जरिए चुनावी माहौल तैयार किया जा रहा है। जाहिर है राजनैतिक चश्मे से देखे तो राम मंदिर निर्माण का श्रेय बीजेपी को जाता है और बीजेपी भी इस भुनाने में कोई कसर नहीं छोड़ रही। उधर, कांग्रेस को कहीं न कहीं अंदाजा है कि लोगों में दिख रहा उत्साह अगर वोट में तब्दील हुआ तो उसकी राह मुश्किल होगी। ऐसे में ये कहना गलत नहीं होगा कि कांग्रेस के पास फिलहाल कोई चारा नहीं है। हालांकि माहिर मान रहे है कि 22  जनवरी के बाद विपक्ष के कई बड़े चेहरे अयोध्या में शीश नवाते दिखेंगे।      विदित रहे कि कांग्रेस सांसद और राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के साथ-साथ सोनिया गांधी को भी राम मंदिर आने का न्योता दिया गया था। इसके साथ-साथ लोकसभा सांसद अधीर रंजन चौधरी को भी बुलावा भेजा गया था। हालांकि, तीनों ने समारोह में नहीं जाने का फैसला लिया है। कांग्रेस ने भाजपा पर इस समारोह को राजनीतिक रंग देने के आरोप लगाए हैं। पार्टी ने मुहूर्त पर सवाल खड़ा करने वाले शंकराचार्य के बयान को आधार बनाकर 22 जनवरी को होने वाली प्राण प्रतिष्ठा पर सवाल खड़े किए हैं। पार्टी का कहना है कि समारोह राष्ट्रीय एकजुटता के लिए होना चाहिए।    अयोध्या न जाने का फैसला लेने वाले कद्दावर नेताओं में शरद पवार का नाम भी शामिल है। उन्होंने कहा है कि 22 जनवरी के समारोह में अयोध्या में काफी भीड़ होगी। ऐसे में वे मंदिर निर्माण पूरा होने के बाद रामलला के दर्शन करेंगे। सपा चीफ अखिलेश यादव और दिल्ली के सीएम अरविन्द केजरीवाल भी आयोजन में शामिल नहीं हो आरहे हैं। पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के अलावा पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव भी आयोजन में न जाने का निर्णय लिया हैं। इनके अलावा वाम दल के महासचिव सीताराम येचुरी सहित कई लेफ्ट के नेताओं ने भी आयोजन से दूरी बनाई है।   बीजेपी का तंज, कहीं जनता फिर कांग्रेस का बहिष्कार न कर दें ! केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर का कहना हैं कि, " कांग्रेस ने  नए संसद भवन और प्रधानमंत्री के संबोधन का बहिष्कार किया और लोगों ने उनका बहिष्कार कर दिया। अब उन्हें लगता है कि वे प्राण प्रतिष्ठा समारोह का बहिष्कार कर सकते हैं लेकिन हो सकता है कि लोग उनका फिर से बहिष्कार कर दें। कांग्रेस और उसके गठबंधन सहयोगियों ने भगवान राम के अस्तित्व को नकारने और हिंदुओं की भावनाओं को ठेस पहुंचाने का कोई मौका नहीं छोड़ा।  विपक्ष के नेता बयान दे रहे हैं और प्राण प्रतिष्ठा समारोह से दूरी बनाए रखने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन उन्हें भगवान राम के सामने आखिरकार आत्मसमर्पण करना होगा।  कई कांग्रेस नेता पूर्व पार्टी प्रमुख राहुल गांधी की बात नहीं मान रहे और अयोध्या में प्राण प्रतिष्ठा समारोह में शामिल हो रहे हैं।"

ऋषिकेश: टीएचडीसीआईएल ने विवेकानंद नेत्रालय अस्पताल देहरादून को भेंट किए नेत्र देखभाल उपकरण

In National News
Rishikesh: THDCIL gifts eye care equipment to Vivekananda Nethralaya Hospital, Dehradun

टीएचडीसी इंडिया लिमिटेड के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक आरके विश्नोई ने बताया कि कंपनी के कॉरपोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व के अंतर्गत सभी को गुणवत्तापूर्वक स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के दिशा में आगे बढ़ते हुए विवेकानंद नेत्रालय आई हॉस्पिटल देहरादून के नए ऑपरेशन थिएटर के लिए जीस माइक्रोस्कोप मॉडल ओपीएमआई लुमेरा 700 मशीन प्रदान की है।  जे. बेहेरा, निदेशक (वित्त) ने 24 फरवरी को मशीन का उद्घाटन किया, जो टीएचडीसी इंडिया लिमिटेड की सामाजिक जिम्मेदारी और विजन को सार्वभौमिक स्वास्थ्य सेवा तक पहुंचाने की दृढ़ संकल्पना को दर्शाता है।     विश्नोई ने जीवन में अच्छे स्वास्थ्य की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डालते हुए कहा कि एक सामाजिक रूप से जिम्मेदार संगठन के रूप में, टीएचडीसी इंडिया लिमिटेड निरंतर प्रदेश में स्वास्थ्य सेवा की चुनौतियों का सामना करने के लिए विभिन्न सीएसआर पहलुओं के माध्यम से प्रयासरत है। इसमें टिहरी जिले के दीन गांव में हंस फाउंडेशन के माध्यम से एक एलोपैथिक डिस्पेंसरी कासंचालन, सीमा डेंटल कॉलेज ऋषिकेश; एम्स, ऋषिकेश; और निर्मल आश्रम नेत्रालय, ऋषिकेश के साथ स्वास्थ्य शिविर आयोजित करना आदि शामिल है। टीएचडीसी इंडिया लिमिटेड जिला स्वास्थ्य अधिकारियों द्वारा अनुरोध किये जाने पर  समय-समय पर विभिन्न चिकित्सा वस्तुएं और उपकरण प्रदान करके राज्य सरकार के स्वास्थ्य बुनियादी ढांचे का समर्थन भी करता है।    उद्घाटन समारोह के दौरान जे. बेहेरा ने बताया कि टीएचडीसी इंडिया लिमिटेड ने अपनी सीएसआर योजना के अंतर्गत विवेकानंद अस्पताल, देहरादून के लिए ज़ीस माइक्रोस्कोप मॉडल ओपीएमआई लुमेरा 700 की खरीदारी के लिए 1.25 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान की । इसका उद्देश्य उत्तराखंड के दूरदराज क्षेत्रों में बसे समुदायों और उत्तम स्वास्थ्य सेवाओं से वंचित व्यक्तियों को सर्वोत्तम श्रेणी की नेत्र देखभाल सुविधाएं प्रदान करना है 7 उत्तराखंड के साथ-साथ इसमें उत्तर प्रदेश के कई जिले जैसे बिजनौर, शामली, मुजफ्फरनगर, और सहारनपुर आदि भी शामिल हैं। यह नई मशीन नेत्र संबंधी बीमारियों से पीड़ित लोगों के लिए एक वरदान के रूप में कार्य करेगी, जिससे मोतियाबिंद सर्जरी, ग्लूकोमा उपचार, रेटिना सर्जरी, और कॉर्निया प्रत्यारोपण जैसे उच्च गुणवत्ता के उपचार और प्रक्रियाएंभी संभव हैं।    टीएचडीसी अपने सामाजिक उत्तरदायित्व  को पूर्ण करते हुए उत्तराखंड के पहाड़ी समुदायों के लिए आंखों की बीमारियों का समाधान करने, स्वास्थ्य संबंधित सुविधाएं कम लागत में उपलब्ध कराने के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाता आया है। उद्घाटन समारोह के दौरान अमरदीप, महाप्रबंधक तथा टीएचडीसी इंडिया लिमिटेड व विवेकानंद नेत्रालय अस्पताल, देहरादून के अन्य अधिकारी भी उपस्थित रहे।

भूकंप से अफगानिस्तान से दिल्ली तक हिली धरती, 6.1 रही तीव्रता

In International News
Earth shook from Afghanistan to Delhi due to earthquake, intensity was 6.1

** हिंदुकुश में जमीन से 220 किमी नीचे था केंद्र ** फिलहाल किसी तरह के नुकसान की खबर नहीं  अफगानिस्तान के हिंदुकुश में आज दोपहर बाद 2:20 बजे भूकंप के तेज झटके महसूस किए गए। इसकी वजह से पाकिस्तान के इस्लामाबाद, रावलपिंडी और भारत में जम्मू-कश्मीर से दिल्ली तक धरती हिल गई।     नेशनल सेंटर फॉर सीसमोलॉजी के मुताबिक भूकंप की तीव्रता 6.1 मापी गई। इसका केंद्र हिंदुकुश में जमीन से करीब 220 किलोमीटर नीचे था। फिलहाल किसी तरह के नुकसान की कोई खबर नहीं है। नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी के मुताबिक भूकंप का केंद्र अफगानिस्तान में था। इसके झटके दिल्ली समेत उत्तर भारत के कई शहरों में महसूस किए गए। नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी के मुताबिक भूकंप का केंद्र अफगानिस्तान में था। इसके झटके दिल्ली समेत उत्तर भारत के कई शहरों में महसूस किए गए। दो माह पूर्व नेपाल में आया था 6.4 तीव्रता का भूकंप गत वर्ष 4 नवंबर को रात 11:32 बजे नेपाल में 6.4 तीव्रता का भूकंप आया था, जिसमें 157 लोगों की मौत हुई थी। तब दिल्ली-एनसीआर के अलावा उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान, हरियाणा, पंजाब और बिहार की राजधानी पटना में भी झटके महसूस किए गए थे। हालांकि भारत में किसी तरह के जान-माल का नुकसान नहीं हुआ था।  

शिव कुमार बटालवी : वो शायर जिसे मरने की बहुत जल्दी थी

In Kavya Rath
शिव कुमार बटालवी : वो शायर जिसे मरने की बहुत जल्दी थी

*अमृता प्रीतम ने बटालवी को कहा था 'बिरह का सुल्तान'    ' बिरहा बिरहा आखीए, बिरहा तू सुल्तान। जिस तन बिरहा ना उपजे, सो तन जाण मसान ...' प्रसिद्ध कवयित्री अमृता प्रीतम के शब्दों में वो ‘बिरह का सुल्तान’ था। पंजाब का एक ऐसा शायर जिसके जैसा न कोई था, न है और न कोई और होगा। वो हिंदुस्तान में भी खूब छाया और पाकिस्तान ने भी उसे जमकर चाहा. वो था  पंजाब का पहला सुपरस्टार शायर शिव कुमार बटालवी। वो शायर जिसने शराब में डूबकर वो रच दिया जिसे होश वाले शायद कभी न उकेर पाते। वो शायर जो मरने की बहुत जल्दी में था।       'असां तां जोबन रुत्ते मरनां, जोबन रूत्ते जो भी मरदा फूल बने या तारा, जोबन रुत्ते आशिक़ मरदे या कोई करमा वाला'.. बटालवी का  कहना था कि जवानी में जो मरता है वो या तो फूल बनता है या तारा। जवानी में या तो आशिक मरते हैं या वो जो बहुत करमों वाले होते हैं। जैसा वो कहते थे वैसा हुआ भी, महज 35 की उम्र में बटालवी दुनिया को अलविदा कह गए। पर जाने से पहले इतना खूबसूरत लिख गए कि शायरी का हर ज़िक्र उनके बगैर अधूरा है।   शिव कुमार बटालवी 23 जुलाई 1936 को पंजाब के सियालकोट में पैदा हुए, जो बंटवारे के बाद से पाकिस्तान में है। उनके पिता एक तहसीलदार थे पर न जाने कैसे शिव शायर हो गए। आजादी के बाद जब देश का बंटवारा हुआ तो बटालवी का परिवार पाकिस्तान से विस्थापित होकर भारत में पंजाब के गुरदासपुर जिले के बटाला में आ गया। उस वक़्त शिव कुमार बटालवी की उम्र महज़ दस साल थी।  नका कुछ बचपन और किशोरावस्था यहीं गुजरी। बटालवी ने इन दिनों में गांव की मिट्टी, खेतों की फसलों, त्योहारों और मेलों को भरपूर जिया, जो बाद में उनकी कविताओं में खुशबू बनकर महका। उन्होंने अपने नाम में भी बटालवी जोड़ा, जो बटाला गांव के प्रति उनका उन्मुक्त लगाव दर्शाता है। बटालवी  जिंदगी के सफर में  बटाला, कादियां, बैजनाथ होते हुए नाभा पहुंचे लेकिन अपने नाम में बटालवी जोड़ खुद को ताउम्र के लिए बटाला से जोड़े रखा। कुछ बड़े होने के बाद उन्हें गांव से बाहर पढ़ने भेजा गया। वो खुद तो गांव से आ गए मगर उनका दिल गांव की मिटटी पर ही अटका रहा। कहते है उनका गांव छूट जाना उन पर पहला प्रहार था, जिसका गहरा जख्म उन्हें सदैव पीड़ा देता रहा।     गांव से निकलकर आगे की पढ़ाई के लिए शिव कादियां के एस. एन. कॉलेज के कला विभाग गए। पर दूसरे साल ही उन्होंने उसे बीच में छोड़ दिया। उसके बाद उन्हें हिमाचल प्रदेश के बैजनाथ के एक स्कूल में इंजीनियरिंग की पढ़ाई हेतु भेजा गया। पर पिछली बार की तरह ही उन्होंने उसे भी बीच में छोड़ दिया। इसके बाद उन्होंने नाभा के सरकारी कॉलेज में अध्ययन किया। उनका बार-बार बीच में ही अभ्यास छोड़ देना, उनके भीतर पल रही अराजकता और अनिश्चितता का बीजारोपण था। पिता शिव को कुछ बनता हुआ देखना चाहते थे। जो पिता शिव के लिए चाहते थे वो शिव ने अपने लिए कभी नहीं चाहा, इसीलिए पिता - पुत्र में कभी नहीं बनी।    बटालवी की छोटी सी जीवन यात्रा तमाम उतार चढ़ाव समेटे हुए है, किसी खूबसूरत चलचित्र की तरह जिसमें स्टारडम है, विरह का तड़का है और जिसका अंत तमाम वेदना समेटे हुए है। शिव कुमार बटालवी के गीतों में ‘बिरह की पीड़ा’ इस कदर थी कि उस दौर की प्रसिद्ध कवयित्री अमृता प्रीतम ने उन्हें ‘बिरह का सुल्तान’ नाम दे दिया। शिव कुमार बटालवी यानी पंजाब का वह शायर जिसके गीत हिंदी में न आकर भी वह बहुत लोकप्रिय हो गया। कहते है उन्हें मेले में एक लड़की से मोहब्बत हो गयी थी। मेले के बाद जब लड़की नज़रों से ओझल हुई तो उसे ढूंढने के लिए एक गीत लिख डाला। गीत क्या मानो इश्तहार लिखा हो; ‘इक कुड़ी जिहदा नाम मुहब्बत ग़ुम है’ ओ साद मुरादी, सोहनी फब्बत गुम है, गुम है, गुम है ओ सूरत ओस दी, परियां वर्गी सीरत दी ओ मरियम लगदी हस्ती है तां फूल झडदे ने तुरदी है तां ग़ज़ल है लगदी... ये वहीँ गीत है जो फिल्म उड़ता पंजाब में इस्तेमाल हुआ और इस नए दौर में भी युवाओं की जुबा पर इस कदर चढ़ा कि मानो हर कोई बटालवी की  महबूबा को ढूंढ़ते के लिए गा रहा हो। कहते है बटालवी का ये लड़कपन का प्यार अधूरा रहा क्यों कि एक बीमारी के चलते उस लड़की की मौत हो गयी। खैर ज़िंदगी बढ़ने का नाम है सो बटालवी भी अवसाद से निकलकर आगे बढ़ने लगे। फिर एक लड़की मिली और फिर शिव को उनसे मोहब्बत हो गई। पर इस मर्तबा भी अंजाम विरह ही था। दरअसल, जिसे शिव दिल ओ जान से मोहब्बत करते थे उसने किसी और का घर बसाया और शादी करके विदेश चली गयी। एक बार फिर शिव तनहा हुए और विरह के समुन्दर में गोते खाने लगे।  तब शराब और अवसाद में डूबे शिव ने जो लिखा वो कालजयी हो गया ........... माए नी माए मैं इक शिकरा यार बनाया चूरी कुट्टाँ ताँ ओह खाओंदा नाहीं वे असाँ दिल दा मास खवाया इक उड़ारी ऐसी मारी इक उड़ारी ऐसी मारी ओह मुड़ वतनीं ना आया, ओ माये नी! मैं इक शिकरा यार बना शिकरा पक्षी दूर से अपने शिकार को देखकर सीधे उसका मांस नोंच कर फिर उड़ जाता है। शिव ने अपनी उस बेवफा प्रेमिका को शिकरा कहा। हालांकि वो लड़की कौन थी इसे लेकर तरह तरह की बातें प्रचलित है । पर  इसके बारे में आधिकारिक रुप से आज तक कोई जानकारी नहीं है और ना वो ख़ुद ही कभी लोगों के सामने आई। शिव की उस बेवफा प्रेमिका के बारे में एक किस्सा अमृता प्रीतम ने भी बयां किया है।   शिव एक दिन अमृता प्रीतम के घर पहुंचे और उन्हें बताया कि जो लड़की उनसे इतनी प्यार भरी बातें किया करती थी वो उन्हें छोड़कर चली गयी है। उसने विदेश जाकर शादी कर ली है। अमृता प्रीतम ने उन्हें जिंदगी की हकीकत और फ़साने का अंतर समझाने का प्रत्यन किया पर शिव का मासूम  दिल टूट चूका था। कहते है शिव उसके बाद ताउम्र उसी लड़की के ग़म में लिखते रहे। सिर्फ 24 साल की उम्र में शिव कुमार बटालवी की कविताओं का पहला संकलन "पीड़ां दा परागा" प्रकाशित हुआ, जो उन दिनों काफी चर्चित रहा। उसी दौर में शिव ने लिखा ........ अज्ज दिन चढ़ेया तेरे रंग वरगा तेरे चुम्मण पिछली संग वरगा है किरणा दे विच नशा जिहा किसे चिम्मे सप्प दे दंग वरगा      आखिरकार, 1967 में बटालवी ने अरुणा से शादी कर ली और उनके साथ दो बेटियां हुई। शिव शादी के बाद चंडीगढ़ चले गये। वहां वे स्टेट बैंक ऑफ इंडिया में कार्यरत रहे। पर कहते है बटालवी उस लड़की को नहीं भूल नहीं सके और उसकी याद में लिखते गए।   की पुछ दे ओ हाल फ़कीरां दा साडा नदियों बिछड़े नीरां दा साडा हंज दी जूने आयां दा साडा दिल जलया दिलगीरां दा धीरे-धीरे, बटालवी शराब की दुसाध्य लत के चलते 7 मई 1973 को लीवर सिरोसिस के परिणामस्वरूप जग को अलविदा कह गए। कहते है कि जीवन के अंतिम दौर में उनकी माली हालत भी ठीक नहीं थी और अपने ससुर के घर उन्होंने अंतिम सांस ली। पर बटालवी जैसे शायर तो पुरानी शराब की तरह होते है, दौर भले बदले  पर नशा वक्त के साथ गाढ़ा होता जाता है। ‘लूणा’ के लिए मिला साहित्य अकादमी पुरस्कार : ऐसा नहीं है कि शिव कुमार बटालवी सिर्फ विरह के शायर थे। बटालवी का नाम साहित्य के गलियारों में बड़े अदब के साथ लिया जाता है। ऐसा हो भी क्यों ना  इस दुनिया को अलविदा कहने  से पहले वे  ‘लूणा’ जैसा महाकाव्य लिख गए। इसी के लिए उन्हें सबसे कम उम्र में यानी महज 31 वर्ष की उम्र में साहित्य अकादमी पुरूस्कार भी मिला। ये सम्मान प्राप्त करने वाले वे सबसे कम उम्र के साहित्यकार है। ‘लूणा’ को पंजाबी साहित्य में ‘मास्टरपीस’ का दर्ज़ा प्राप्त है और साहित्य जगत में इसकी आभा बरक़रार है। कहा जाता था कि कविता हिंदी में है और शायरी उर्दू में। पर शिव ने जब पंजाबी में अपनी जादूगरी दिखाई तो उस दौर के तमाम हिंदी और उर्दू के बड़े बड़े शायर कवि हैरान रह गए।   नायाब गायकों ने गाये बटालवी के गीत : बटालवी की नज्मों को सबसे पहले नुसरत फतेह अली खान ने अपनी आवाज दी थी। उस्ताद नुसरत फ़तेह अली खान ने उनकी कविता 'मायें नी मायें मेरे गीतां दे नैणां विच' को गाया था । जगजीत सिंह ने उनका एक गीत 'मैंनू तेरा शबाब ले बैठा' गाया तो दुनिया को पता चला की शब्दों की जादूगरी क्या होती है। नुसरत साहब और जगजीत सिंह - चित्रा सिंह के अलावा रबी शेरगिल, हंस राज हंस, दीदार सिंह परदेसी सहित एक से बढ़कर एक नायाब गायकों ने बटालवी की कविताएं गाई। उनकी लिखी रचनाओं को गाकर न जाने कितने गायक शौहरत पा गए। बटालवी आज भी हर दिल अजीज है। बटालवी और विरह जुदा नहीं । बटालवी तो आखिर बटालवी है।

धर्मशाला: अब विदेशों में भी मिलेंगे नगरोटा के युवाओं को रोजगार के अवसर : आरएस बाली

In Job
Dharamshala: Now the youth of Nagrota will get employment opportunities in foreign countries also: RS Bali

29 व 30 जनवरी को होगा रोजगार मेले का आयोजन दुबई के लिए 100 से ज्यादा सिक्योरिटी गार्ड के लिए होगा साक्षात्कार होटल प्रबंधन में शेफ, कैटरिंग, हाउस कीपर, सर्विस-स्टाफ के लिए इंटरव्यू पर्यटन निगम के अध्यक्ष कैबिनेट रैंक आरएस बाली ने कहा कि अब विदेशों में भी नगरोटा के युवाओं को रोजगार के अवसर उपलब्ध करवाए जाएंगे। उन्होंने कहा कि इस बाबत दुबई की कुछ कंपनियों के साथ हिमाचल सरकार ने करार किया है। उन्होंने कहा कि नगरोटा के आईपीएच के विश्राम गृह में 29 तथा 30 जनवरी को नगरोटा विस क्षेत्र के युवाओं के लिए रोजगार मेला आयोजित किया जाएगा, इसमें दुबई की विभिन्न कंपनियों के लिए 100 से ज्यादा सिक्योरिटी गार्ड के पदों के लिए भर्ती की जाएगी। इसके साथ ही होटल प्रबंधन में शैफ, कैटरिंग, हाउस कीपर, सर्विस स्टाफ के पदों के लिए भी भर्ती की जाएगी।           आरएस बाली ने कहा कि युवाओं को रोजगार उपलब्ध करवाना उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि चुनावों से पहले रोजगार संघर्ष यात्रा भी नगरोटा बगबां से ही आरंभ की गई थी। उन्होंने कहा कि नगरोटा विस क्षेत्र में वर्ष में दो बार रोजगार मेले आयोजित किए जाएंगे ताकि ज्यादा से ज्यादा युवाओं को घर द्वार पर रोजगार के अवसर मिल सकें। पर्यटन निगम के अध्यक्ष आरएस बाली ने कहा कि नगरोटा विस क्षेत्र में विकास पुरूष स्व जीएस बाली के जन्म दिन पर जुलाई माह में पहला दो दिवसीय रोजगार मेला आयोजित किया गया था जिसमें आयोजित रोजगार मेले के पहले दिन 670 युवाओं को नामी गिरामी कंपनियों में रोजगार के लिए चयनित किया गया। दूसरे दिन रोजगार मेले में 450 युवाओं का चयन किया था।      रोजगार मेले के समन्वयक अमित कुमार ने बताया कि पर्यटन निगम के अध्यक्ष कैबिनेट रैंक आरएस बाली तथा सरकार के अथक प्रयासों से दुबई की कंपनियों के साथ रोजगार के लिए करार किया गया है उसी के आधार पर 29 तथा 30 जनवरी को नगरोटा में दुबई की विभिन्न कंपनियों के लिए सिक्योरिटी गार्ड्स के लिए इंटरव्यू लिए जाएंगे इसमें 24 से 35 आयु वर्ग के युवा भाग ले सकते हैं, दस जमा दो उत्तीर्ण होना जरूरी है। न्यूनतम उंचाई पांच फुट सात इंच तथा वजन साठ किलो होना चाहिए। इस के लिए सैलरी 50 हजार से लेकर 70 हजार प्रतिमाह होगी तथा सिलेक्टिड अभ्यर्थियों को 15 दिन बिलासपुर तथा 15 दिन बाराणसी में प्रशिक्षण दिया जाएगा इसके साथ ही स्किल डिवल्पमेंट के तहत वीजा तथा हवाई टिकट भी सरकार की ओर से वहन किया जाएगा। इसके साथ ही होटल प्रबंधन में भी विभिन्न पदों के लिए साक्षात्कार लिए जाएंगे।

शिमला:जवाहर बाल मंच के स्टेट चीफ कॉडिनेटर बने महेश सिंह ठाकुर

In Banka Himachal
शिमला:जवाहर बाल मंच के स्टेट चीफ कॉडिनेटर बने महेश सिंह ठाकुर

हिमाचल प्रदेश यूथ कांग्रेस के महासचिव एवं सिस्को संस्था के अध्यक्ष महेश सिंह ठाकुर को जवाहर बाल मंच का राज्य मुख्य संयोजक नियुक्त किया गया है। चीफ स्टेट कॉडिनेटर बनाए जाने पर महेश सिंह ठाकुर ने कांग्रेस अध्यक्ष  मल्लिकार्जुन खड़गे कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी, राहुल गांधी, प्रियंका गांधी,प्रदेश के सीएम सुखविन्दर सिंह सूक्खु , राष्ट्रीय प्रभारी केसी वेणुगोपाल,जवाहर बाल मंच के राष्टीय अध्यक्ष जी.वी. हरि. सहित अन्य नेताओं के प्रति आभार जताया है।  महेश ठाकुर ने कहा कि जवाहर बाल मंच का मुख्य उद्देश्य 7 वर्षों से लेकर 17 वर्ष के आयु के लड़के लड़कियां तक भारत के पूर्व प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू के विचार को पहुंचना।  उन्होंने कहा कि जिस तरीके से मौजूदा सरकार के द्वारा देश के इतिहास के साथ छेड़छाड़ हो रहा है देश के युवाओं को भटकाया जा रहा है जो की देश के लिए एक बहुत बड़ा चिन्ता का विषय है कांग्रेस पार्टी ने इस विषय को गंभीरता से लिया और राहुल गांधी के निर्देश पर डॉ जीवी हरी के अध्यक्षता में देशभर में जवाहर बाल मंच के द्वारा युवाओं के बीच में नेहरू जी के विचारों को पहुंचाया जाएगा। उन्होंने कहा वर्ष 2024 के चुनाव में कांग्रेस भारी बहुमत हासिल कर केंद्र से भाजपा को हटाने का काम करेगी। इसमें हिमाचल प्रदेश राज्य की भी प्रमुख भुमिका रहेगी।  उन्होंने कहा कि पूरे देश में महंगाई के कारण आमलोगों का जीना मुश्किल हो गया है। गरीब व मध्यम वर्गीय परिवार पर इस महंगाई का व्यापक असर पड़ रहा है। ऐसे में केंद्र सरकार के कानों में जूं तक नहीं रेंग रही है।  

राम लहर के सहारे चुनावी भवसागर पार करने की कवायद

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BJP-MOVING-ON-WITH-RAM-MANDIR-ACHEIVEMENT

  2024 के चुनावी भवसागर को पार करने के लिए भाजपा राम नाम की नौका पर सवार दिख रही है। भाजपा के सियासी उदय में राम नाम सदा साहरा रहा है। राम नाम लेकर ही भारतीय जनता पार्टी फर्श से अर्श तक पहुंच गई। 1984 में भाजपा ने अपना पहला लोकसभा चुनाव लड़ा था और महज 2 सीटों पर सिमट गई थी। वहीँ भाजपा आज देश की 300 से ज्यादा लोकसभा सीटों पर राज करती है। अब लोकसभा चुनाव दस्तक दे चुके है और इस बीच अयोध्या में श्री राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठता के चलते देश में राम लहर चली है और माहिर मान रहे है  भाजपा को इसका सियासी लाभ होना तय है।      यूँ तो भाजपा 1986 में लालकृष्ण आडवाणी के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद से ही हिन्दुत्त्व और राममंदिर के मुद्दे पर आक्रमक हो गई थी लेकिन औपचारिक तौर पर पार्टी ने राममंदिर बनाने का संकल्प लिया 1989 में हुई पालमपुर की राष्ट्रीय कार्यसमिति बैठक में। इन 35 सालों में भगवा दल ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। सर्वविदित है कि भारतीय जनता पार्टी के अतीत का संघर्ष लंबा है, जिसमें श्यामा प्रसाद मुखर्जी के जनसंघ से लेकर अटल बिहारी वाजपाई और लालकृष्ण आडवाणी का संघर्ष रहा है। शून्य से शिखर तक पहुंचने वाली भाजपा का सियासी सफर काफी कठिनाइयों वाला रहा है, लेकिन हर बार भाजपा के लिए राम नाम एक सहारा बना है।          जाहिर है मौजूदा वक्त में भी राम मंदिर के प्राण प्रतिष्ठता आयोजन ने देश का सियासी माहौल भी प्रभावित किया है। देश राम रंग में सराबोर हैं और राजनैतिक चश्मे से देखे तो भाजपा भी इसे भुनाने में कोई कसर नहीं छोड़ रही। दरअसल, ये गलत भी नहीं है क्यों कि राजनैतिक फ्रंट पर राम मंदिर निर्माण के संघर्ष की अगुआई भी भाजपा ने ही की है, सो श्रेय लेना राजनैतिक लिहाज से गलत भी नहीं है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस बार लोकसभा चुनाव में भाजपा 'हिंदू नवजागरण काल' को एक बड़े मुद्दे के रूप में पेश करेगी और राम मंदिर इसका प्रतीक बनेगा। अब इसका कितना लाभ चुनाव में भाजपा को मिलेगा ये तो नतीजे तय करेंगे, पर निसंदेह राम मंदिर के जरिये बीजेपी ने देश के 80 प्रतिशत मतदाताओं को प्रभावित जरूर किया है।   दो वादे पुरे, समान नागरिक सहिंता शेष भाजपा के तीन बड़े लक्ष्य रहे है, धारा 370  हटाना, राम मंदिर बनाना और समान नागरिक सहिंता लागू करना। ये कहना गलत नहीं होगा कि इन्हीं तीन वादों की बिसात पर भाजपा का काडर मजबूत हुआ। पार्टी ने हमेशा  इन तीन विषयों पर खुलकर अपना पक्ष भी रखा और अपना वादा भी दोहराया। इनमें से भाजपा दो वादे पुरे कर चुकी है, कश्मीर से धारा 370  हटाई जा चुकी है और अब राम मंदिर का निर्माण भी हो गया है। अब सिर्फ समान नागरिक सहिंता लागू करने का भाजपा का वादा अधूरा है और पार्टी इसे लागू करने की प्रतिबद्धता दोहरा रही है।   400 सीट जीतने का लक्ष्य  भाजपा को उम्मीद है कि राम लहर के बीच वो आगामी चुनाव में 400 सीट का लक्ष्य हासिल करेगी। पार्टी राम मंदिर के अलावा लाभार्थी वोट और महिला आरक्षण की बिसात पर ऐतिहासिक बहुमत हासिल करना चाहती है। हालहीं में हिंदी पट्टी के तीन राज्यों के विधानसभा चुनाव में भाजपा को हिंदुत्व एजेंडा का लाभ मिला है जिसके बाद पार्टी का जोश हाई है।    

कांग्रेस की दूरी, कहा - आयोजन 'नरेंद्र मोदी फंक्शन'

In Siyasatnama
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  अयोध्या के राम मंदिर में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के कार्यक्रम से कांग्रेस सहित कई विपक्षी दलों ने दूरी बनाई है। कांग्रेस का राम मंदिर में न जाने को लेकर कहना है कि यह चुनावी, राजनीतिक, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और आरएसएस का कार्यक्रम है। कांग्रेस का कहना है कि राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ और बीजेपी ने 22 जनवरी के कार्यक्रम को पूरी तरह से राजनीतिक और 'नरेंद्र मोदी फंक्शन' बना दिया है।  यह चुनावी कार्यक्रम है और इसके जरिए चुनावी माहौल तैयार किया जा रहा है। जाहिर है राजनैतिक चश्मे से देखे तो राम मंदिर निर्माण का श्रेय बीजेपी को जाता है और बीजेपी भी इस भुनाने में कोई कसर नहीं छोड़ रही। उधर, कांग्रेस को कहीं न कहीं अंदाजा है कि लोगों में दिख रहा उत्साह अगर वोट में तब्दील हुआ तो उसकी राह मुश्किल होगी। ऐसे में ये कहना गलत नहीं होगा कि कांग्रेस के पास फिलहाल कोई चारा नहीं है। हालांकि माहिर मान रहे है कि 22  जनवरी के बाद विपक्ष के कई बड़े चेहरे अयोध्या में शीश नवाते दिखेंगे।      विदित रहे कि कांग्रेस सांसद और राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के साथ-साथ सोनिया गांधी को भी राम मंदिर आने का न्योता दिया गया था। इसके साथ-साथ लोकसभा सांसद अधीर रंजन चौधरी को भी बुलावा भेजा गया था। हालांकि, तीनों ने समारोह में नहीं जाने का फैसला लिया है। कांग्रेस ने भाजपा पर इस समारोह को राजनीतिक रंग देने के आरोप लगाए हैं। पार्टी ने मुहूर्त पर सवाल खड़ा करने वाले शंकराचार्य के बयान को आधार बनाकर 22 जनवरी को होने वाली प्राण प्रतिष्ठा पर सवाल खड़े किए हैं। पार्टी का कहना है कि समारोह राष्ट्रीय एकजुटता के लिए होना चाहिए।    अयोध्या न जाने का फैसला लेने वाले कद्दावर नेताओं में शरद पवार का नाम भी शामिल है। उन्होंने कहा है कि 22 जनवरी के समारोह में अयोध्या में काफी भीड़ होगी। ऐसे में वे मंदिर निर्माण पूरा होने के बाद रामलला के दर्शन करेंगे। सपा चीफ अखिलेश यादव और दिल्ली के सीएम अरविन्द केजरीवाल भी आयोजन में शामिल नहीं हो आरहे हैं। पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के अलावा पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव भी आयोजन में न जाने का निर्णय लिया हैं। इनके अलावा वाम दल के महासचिव सीताराम येचुरी सहित कई लेफ्ट के नेताओं ने भी आयोजन से दूरी बनाई है।   बीजेपी का तंज, कहीं जनता फिर कांग्रेस का बहिष्कार न कर दें ! केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर का कहना हैं कि, " कांग्रेस ने  नए संसद भवन और प्रधानमंत्री के संबोधन का बहिष्कार किया और लोगों ने उनका बहिष्कार कर दिया। अब उन्हें लगता है कि वे प्राण प्रतिष्ठा समारोह का बहिष्कार कर सकते हैं लेकिन हो सकता है कि लोग उनका फिर से बहिष्कार कर दें। कांग्रेस और उसके गठबंधन सहयोगियों ने भगवान राम के अस्तित्व को नकारने और हिंदुओं की भावनाओं को ठेस पहुंचाने का कोई मौका नहीं छोड़ा।  विपक्ष के नेता बयान दे रहे हैं और प्राण प्रतिष्ठा समारोह से दूरी बनाए रखने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन उन्हें भगवान राम के सामने आखिरकार आत्मसमर्पण करना होगा।  कई कांग्रेस नेता पूर्व पार्टी प्रमुख राहुल गांधी की बात नहीं मान रहे और अयोध्या में प्राण प्रतिष्ठा समारोह में शामिल हो रहे हैं।"

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